Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
ओपिनियन

जो कट्टरवादी इस्लाम भारत में जीत का सपना देख रहा है, शायद यह सपना ही रहेगा, जानिए क्यों?

समय-समय पर अलगाववाद को मोहरा बना कर इस्लामिक आतंकवाद, देश में हिंसा और अराजकता को जन्म दे रहा है। किन्तु, सवाल यह है कि क्या इस्लामिक कट्टरता जीत सकती है?

(NewsGram Hindi)

भारत एक प्रबुद्ध देश है, जहाँ पर संस्कृति भी विचारों से जन्म लेती है। ‘अतिथि देवो भव’ या ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यह भारतीय संस्कृति का लम्बे समय हिस्सा रही हैं, यह विचार संस्कृति के रूप में पहचाने जाने से पहले हर एक भारतीय के विचारों में उपस्थित थीं और हमें आज की तरह इन संस्कृतियों का उदाहरण देकर भारत की महानता बताने की आवश्यकता नही थी। लेकिन आज के समय में इन्ही विचारों में मजहबी कट्टरता के जहर को घोला जा रहा है, समय-समय पर अलगाववाद को मोहरा बना कर इस्लामिक आतंकवाद, देश में हिंसा और अराजकता को जन्म दे रहा है। और समाज पर इस आघात का मोल आम नागरिक चुका रहा है। किन्तु अब सवाल यह है कि,

जो इस्लामिक कट्टरवादी जीत का सपना देख रहे हैं, क्या उनका सपना सच हो सकता है?

इस सवाल पर चर्चा से पहले आपको यह बताना आवश्यक है कि हिन्दुओं के प्रति घृणा कई समय से फैलाई जा रही है, जिनमें सबसे आगे रहते हैं औवेसी भाई, आजम खान, इमाम बुखारी, अमानतुल्ला खान और ऐसे कई राजनेता जिनके कई जगह आपको भड़काऊ भाषण सुनाई दे जाएंगे, और उनका सीधा हमला हिन्दुओं के लिए होता है और उनके प्रति घृणा फैलाना होता है। आपको याद होगा कि यह वही लोग हैं जिन्होंने ‘गाजियाबाद वाले चचा’ की घटना को असहिष्णुता का चोगा पहनाया था और अब उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण पर पकड़े गए दो आरोपियों पर इन सभी के मुँह पर ताला, हथकड़ी सब पड़ गया है । साथ ही वह लोग जो लिबरलों का हितैषी बता-बता कर हिन्दुओं को बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं उनके गले से भी हाय-तौबा का लड्डू निगला नहीं जा रहा है।


बहरहाल, अब बात करते हैं सवाल पर। प्रश्न यह था कि क्या इस्लामिक कट्टरवाद देश में जीत सकता है? इस प्रश्न का उत्तर इतिहास स्वयं दे रहा है, और आगे भी देता रहेगा। भारत के ही कई हिन्दू एवं राजपूत शासकों ने इस्लामिक आक्रमणकर्ताओं को समय-समय पर हराया है और उन्हें उनकी औकात से परिचित कराया है। यहाँ तक कि इस्लाम को भारत में पैर जमाने के लिए 500 साल का समय लग गया था, जबकि कहा यह जाता है कि कई अन्य देशों में इस्लामिक आक्रमणकर्ताओं ने बहुत जल्दी कब्जा कर लिया था। भारत में किसी भी मुगल या अन्य मुस्लिम शासक का शासन लंबे समय तक नहीं रहा था। इसके पीछे कारण है ‘ताकत का झूठा गुमान’ और यही अभिमान मुगलों के पतन का कारण भी रहा है।

क्या किसी इस्लामिक देश ने उन्नती की है?

अब आप और हम अतीत से निकलकर वर्तमान को देखने की कोशिश करते हैं, और मैं आपसे यह सवाल करता हूँ कि, क्या किसी इस्लामिक देश ने उन्नती की है? अफगानिस्तान में कई वर्ष पूर्व जब इस्लामिक आक्रमणकारी आए तो उन्होंने हजारों वर्ष पुराने बौद्ध एवं हिन्दू संस्कृति को नष्ट कर दिया था। वहां आज भी उन संस्कृति के अवशेष उपस्थित हैं, साथ ही अफगानिस्तान की स्थिति आज के आधुनिक युग में भी कुछ खास नहीं बदली है। अफगानिस्तान के साथ भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान, जिसका बटवारा ही धर्म के नाम पर हुआ था, वह आज भी खुद को बदनामी से नहीं बचा पाता है, ‘आतंकिस्तान’, ‘आतंक पर पलने वाला’ न जाने किन-किन नामों से जाना जाता है। भारत को भी सोने की चिड़िया से बदलकर उसे लूटने वाले कौन थे? इन सभी मुद्दों पर विचार करना आवश्यक है।

पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान आतंकियों की वजह से न ही आगे बढ़ रहा है और न वहां के स्थिति में सुधर आ रहा है।(फाइल फोटो)

अब आप कहेंगे की सऊदी अरब, जहाँ से इस्लाम जन्मा है वह तो बहुत फल-फूल रहा है। तो आपको बता दूँ कि वहां का नेतृत्व आधुनिकता के साथ चलने वाला है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने यहाँ तक कह दिया है कि ‘हदीस’ को वह नहीं मानते हैं। अब इसपर भी तरह-तरह के आशंकाएं बढ़ गई हैं। कहा यह जा रहा है कि सऊदी के क्राउन प्रिंस को मारने के लिए कई इस्लामिक गुट आतुर बैठे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि मोहम्मद बिन सलमान का यह रवैया इस्लाम के लिए खतरा है। अब आप बताएं कि जहाँ एक तरफ देश के लिब्रलधारी, मुस्लिमों की हालत पर हाय-तौबा मचाते हैं, किन्तु वह उस समय मूक-बधिर दिखाई देते हैं जब धर्मांतरण का मुद्दा उठता है, जब मुस्लिम महिलाओं की आजादी का मुद्दा उठता है और इसी भ्रम को मोहम्मद बिन सलमान तोड़ना चाहते हैं, सऊदी में महिलाओं को समान अधिकार देकर। अब जहाँ कट्टरवादियों को महिलाओं के आजादी से आपत्ति हो वहां विकास की बात करना अपमान ही है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने लड़कियों के कपड़ों पर सवाल उठाया था।

यह भी पढ़ें: ओपिनियन ‘इस्लाम संविधान को नहीं मानता है!’

इतिहासकारों द्वारा केवल उन क्रूर हत्यारों को महान बताया जाता है।

अब जो इस्लमिक देश सऊदी अरब पर मदद की आस लगाए बैठे हैं उनके लिए भी सऊदी के नेतृत्व ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। जो पाकिस्तान इस्लाम की दुहाई देता हुआ उनसे मदद मांगता, और खाली कटोरी भरने की गुहार करता है उसे भी सऊदी अरब बदनाम करके खाली हाथ वापस भेजता है। सऊदी छोड़िए भारत सहित ऐसे कई लेखक एवं विद्वान हैं जिन्होंने इस्लाम को समझा है और आज वह उसका भंडाफोड़ कर रहे हैं। तारेक फतेह, सलमान रशीदी, इब्न वर्राक, अनवर शेख यह कुछ ऐसे लेखक हैं जिन्होंने कट्टरता के खिलाफ विश्व को आईना दिखाया है। लेकिन भारत में लिबरल इतिहासकारों द्वारा केवल उन क्रूर हत्यारों को महान बताया जाता है जिन्होंने लाखों हिन्दुओं की हत्या की।

बहरहाल, आपको बता दें कि अस्तित्व की लड़ाई में हिन्दू अभी भी कोसों दूर खड़ा है और यदि वह जागरूक नहीं हुआ तो उसको पछाड़ने का सपना देखने वाले, देश को बर्बाद करने का भी सपना देखेंगे।

(धर्म, संस्कृति, देश और दुनिया से जुड़े महत्वपूर्ण खबरों के लिए न्यूज़ग्राम हिंदी को फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर फॉलो करें।)

Popular

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

Keep Reading Show less

अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

Keep Reading Show less

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

Keep reading... Show less