Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
दुनिया

कनाडाई पीएम के नरम पड़े रुख, जानिए क्या है कारण?

भारत के घरेलू मामलों में विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ नरेंद्र मोदी सरकार के कड़े रुख से कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को समर्थन देने से पीछे हटना पड़ा है।

कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो (Wikimedia Commons)

By: आरती टिक्कू सिंह

भारत के घरेलू मामलों में विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ नरेंद्र मोदी सरकार के कड़े रुख से कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को अपनी बयानबाजी और किसान आंदोलन को समर्थन देने से पीछे हटना पड़ा है।


पिछले हफ्ते, ट्रूडो ने भारत के किसान आंदोलन को अपना समर्थन दिया था, यह दावा करते हुए कि स्थिति चिंताजनक है।

टोरंटो में सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि ट्रूडो की टिप्पणी पर मोदी सरकार के नई दिल्ली में कनाडाई उच्चायुक्त को बुलाने और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के इस घोषणा के बाद कि वो कोविड-19 (एमसीजीसी) पर कनाडा के नेतृत्व वाले मंत्री समन्वय समूह को छोड़ देंगे, कनाडा के सरकारी हलकों में दहशत फैल गई।

भारत सरकार ने स्पष्ट संदेश भेजा था कि इस तरह के व्यवहार से द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित होगा क्योंकि यह ट्रूडो सरकार में पहले भी हो चुका है। भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार ट्रूडो के खालिस्तानी समर्थक ²ष्टिकोण के चलते 2017-18 से 2018-19 तक लगभग 1 बिलियन डॉलर कम हो गया।

यह भी पढ़ें: किसान आंदोलन : कंधा किसान का बंदूक राजनीतिक दलों की

भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2017-18 में 7.23 बिलियन डॉलर का था। इस अवधि में कनाडा को भारत का निर्यात 2.51 बिलियन डॉलर और कनाडा से आयात 4.72 बिलियन डॉलर था, जो कि 2018-19 में 6.3 बिलियन डॉलर का था।

कनाडाई निवेशक भारत को निवेश के लिए एक आकर्षक देश मानते हैं, विशेषकर कोरोनावायरस के बाद की अवधि में। 400 से अधिक कनाडाई कंपनियों की भारत में मौजूदगी है, और 1,000 से अधिक कंपनियां सक्रिय रूप से भारतीय बाजार में कारोबार कर रही हैं।

कनाडा दाल, अखबारी कागज, लकड़ी के गूदे, अभ्रक, पोटाश, लोहे के स्क्रैप, तांबा, खनिज और औद्योगिक रसायनों का निर्यात करता है और चाहता है कि भारत और अधिक आयात करे। सूत्रों ने कहा कि कनाडा के कारोबारी चाहते हैं कि उनकी सरकार भारत के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) और द्विपक्षीय निवेश संवर्धन और भागीदारी समझौते (बीआईपीपीए) पर हस्ताक्षर करे।

कनाडा में भारतीय उच्चायोग की कूटनीति के बाद, सूत्रों ने कहा कि ट्रूडो ने अब अपना रुख नरम कर लिया है। ट्रूडो ने कहा, कनाडा हमेशा दुनिया भर में कहीं भी शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के लिए खड़ा रहेगा और हम डी-एस्केलेशन और बातचीत की ओर कदम बढ़ते देख खुश हैं।

सूत्रों ने कहा कि ट्रूडो के किसान आंदोलन पर भारत के खिलाफ पहले की बयानबाजी उनकी राजनीतिक मजबूरियों से प्रेरित थी – वे अपने दूसरे कार्यकाल में अल्पसंख्यक सरकार चला रहे हैं और उन्हें सिख वोट बैंक की जरूरत है।

यह भी पढ़ें: जानिए कैसे किसान आंदोलन ने एक फल विक्रेता की किस्मत बदल दी?

कनाडा में छह लाख सिख प्रवासी हैं, जिनको ट्रूडो की लिबरल पार्टी से लेकर सभी दल अपनी ओर खींचना चाहते हैं। कनाडा में सिखों का एक बड़ा वर्ग वैचारिक रूप से खालिस्तान आंदोलन का समर्थक रहा है। 1980 के दशक के दौरान पंजाब में एक हिंसक अलगाववादी सिख आतंकवादी आंदोलन, पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित था। पंजाब में हजारों निर्दोष लोगों को खालिस्तानी आतंकवादियों ने मार डाला, जिसके बाद भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें पूरी तरह से बाहर निकाल दिया।

हालांकि, पंजाब में उग्रवाद का सफाया हो चुका है, पिछले पांच सालों में, पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई कनाडा, यूके और अन्य जगहों पर सिख प्रवासियों की मदद से आंदोलन को फिर से जीवित करने का प्रयास कर रही है।(आईएएनएस)

Popular

मस्क ने कर्मचारियों से टेस्ला वाहनों की डिलीवरी की लागत में कटौती करने को कहा। [Wikimedia Commons]

टेस्ला के सीईओ एलन मस्क (Elon Musk) ने कर्मचारियों से आग्रह किया है कि वे चल रहे त्योहारी तिमाही में वाहनों की डिलीवरी में जल्दबाजी न करें, लेकिन लागत को कम करने पर ध्यान दें, क्योंकि वह नहीं चाहते हैं कि कंपनी 'शीघ्र शुल्क, ओवरटाइम और अस्थायी ठेकेदारों पर भारी खर्च करे ताकि कार चौथी तिमाही में पहुंचें।' टेस्ला आम तौर पर प्रत्येक तिमाही के अंत में ग्राहकों को कारों की डिलीवरी में तेजी लाई है।

सीएनबीसी द्वारा देखे गए कर्मचारियों के लिए एक ज्ञापन में, टेस्ला के सीईओ (Elon Musk) ने कहा कि ऐतिहासिक रूप से जो हुआ है वह यह है कि 'हम डिलीवरी को अधिकतम करने के लिए तिमाही के अंत में पागलों की तरह दौड़ते हैं, लेकिन फिर डिलीवरी अगली तिमाही के पहले कुछ हफ्तों में बड़े पैमाने पर गिर जाती है।'

Keep Reading Show less

बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) [Wikimedia Commons]

बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) ने लोकप्रिय स्पेनिश सीरीज 'मनी हाइस्ट' के लिए अपने प्यार को कबूल कर लिया है और सर्जियो माक्र्विना द्वारा निभाए गए अपने पसंदीदा चरित्र 'प्रोफेसर' को ट्रिब्यूट दिया है। एक मजेदार टेक में, स्टार ने प्रसिद्ध 'प्रोफेसर' चरित्र को ट्रिब्यूट दी, हैशटैग इंडियाबेलाचाओ फैन प्रतियोगिता की शुरूआत करते हुए प्रशंसकों को श्रृंखला के लिए अपने प्यार को दिखाने और साझा करने की अनुमति दी। आयुष्मान पियानो पर क्लासिक 'बेला चाओ' का अपना गायन भी गाते हुए दिखाई देते हैं।

Keep Reading Show less

पंकज त्रिपाठी, अभिनेता [wikimedia commons]

अभिनेता पंकज त्रिपाठी कई विज्ञापन को साइन करने के लिए तैयार हैं। मगर साथ ही अभिनेता ने लापरवाही से सौदों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया है, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके प्रशंसकों और समाज के प्रति उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। त्रिपाठी जी के कालीन भैया ('मिजार्पुर'), सुल्तान ('गैंग्स ऑफ वासेपुर'), रुद्र ('स्त्री') और कई अन्य उनके किरदार दर्शकों को बेहद पसंद आए हैं।

Mirzapur, amazon prime video, web series अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने मिर्जापुर वेब सीरीज में अपने पात्र कालीन भैया के लिए काफी प्रशंसा बटोरी । (Pankaj Tripathi , Facebook)

Keep reading... Show less