Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
दुनिया

401,000 नए प्रवासियों को स्वीकार करेगा कनाडा

यह भारतीयों के लिए खुशी की खबर है, क्योंकि कनाडा में बसने वाले बाहरी देशों के लोगों में उनकी संख्या काफी अधिक होती है।

कनाडा में बाहर से आने वालों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है। (Unsplash)

कनाडा 350,000 के सामान्य वार्षिक आंकड़े के मुकाबले 2021 में रिकॉर्ड 401,000 नए प्रवासियों को स्वीकार करेगा। कोविड-19 की वजह से प्रतिबंधों के कारण इस दिशा में 2020 में होने वाली कमी को पूरा करने के लिए 2022 में यह आंकड़ा 411,000 और 2023 में 421,000 हो जाएगा।

यह भारतीयों के लिए खुशी की खबर है, क्योंकि कनाडा में बसने वाले बाहरी देशों के लोगों में उनकी संख्या काफी अधिक होती है। वास्तव में, कनाडा में भारतीय आप्रवासन पिछले तीन से चार वर्षों में तेजी से बढ़ा है। जबकि 2016 में 39,340 भारतीय प्रवासी कनाड़ा पहुंचे थे। 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 85,000 हो गया, जिसमें 105 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।


कनाडा में भारतीय आव्रजन के तेजी से बढ़ने के पीछे अमेरिकी नीतियों और आईटी और स्वास्थ्य पेशेवरों की कमी के कई कारक शामिल हैं। इसी तरह, कनाडा आने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 2016 में 76,075 से बढ़कर 2019 में 219,855 हो गई है, जिसमें लगभग 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

यह भी पढ़ें – भारत और नेपाल – टू नेशन विद वन पीपल

छात्रों और नवागंतुकों की रिकॉर्ड संख्या के कारण, भारतीय कनाडा में सबसे तेजी से बढ़ते समुदायों में से एक बन गए हैं, जिनकी संख्या 3.7 करोड़ से अधिक के देश में 16 लाख को पार कर रही है।

कनाडा की हवा लोगों को उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करती है। (Unsplash)

जैसे कि कनाडा की जन्म दर में गिरावट आई है, नए आप्रवासियों की जनसंख्या वृद्धि का यह 82 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा नए लोग हर साल कनाडा में अरबों डॉलर भी लाते हैं। इसके साथ ही यहां स्वास्थ्य, सूचना एंव प्रौद्योगिकी और खेती जैसे क्षेत्र नए प्रवासियों के बिना जीवित नहीं रह सकते। चूंकि लगभग 60 प्रतिशत अप्रवासी आर्थिक श्रेणी में आते हैं, वे नए व्यवसाय शुरू करके अर्थव्यवस्था का भी समर्थन करते हैं।

यह भी पढ़ें – कनाडा में भी भारतीय दिखा रहे हैं अपना जलवा

सरकारी आंकड़ों में कहा गया है कि 33 प्रतिशत से अधिक व्यवसाय नए लोगों के स्वामित्व में है, क्योंकि कनाडाई पारिस्थितिकी तंत्र लोगों को उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित करता है, नौकरी चाहने वालों को नहीं।

आव्रजन मंत्री मार्को मेंडिसिनो ने शुक्रवार को नए आव्रजन लक्ष्यों की घोषणा करते हुए नवागंतुकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे व्यवसायों को कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है, लेकिन स्वयं के व्यवसाय शुरू करके ही ऐसा किया जा सकता है। (आईएएनएस)

Popular

एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

Keep Reading Show less
बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


Keep Reading Show less

अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है। (Unsplash)

अगरबत्ती उपयोग पर त्रिपुरा अपने खोए हुए गौरव को वापस पाने का संभव कोशिश कर रहा है, जिसे पहले वियतनाम और चीन द्वारा नियंत्रण किया जा रहा था। त्रिपुरा इंडस्ट्रियल विकास निगम के अधिकारियों के अनुसार राज्य में बांस की छड़ियों का उत्पादन में भारी गिरावट आई है 2010 में 29,000 मीट्रिक टन से गिरकर 2017 में 1,241 मीट्रिक टन हो गया था, क्योंकि भारत कि प्रतिवर्ष 70,000 (96 प्रतिशत) मीट्रिक टन गोल बास की छड़ियां (46प्रतिशत) वियतनाम और (47 प्रतिशत) चीन द्वारापूरी की जा रही थी।

टीआईडीसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि 2019 में, केंद्र सरकार ने सीमा शुल्क 25 प्रतिशत बढ़ा दिया और बांस के उत्पादों को प्रतिबंधित सूची में शामिल कर दिया गया, जिससे दूसरे देशों के लिए समस्या उत्पन्न हुई। वर्तमान में, पूर्वोत्तर राज्य 2,500 मीट्रिक टन बांस की छड़ें पैदा कर रहा है और आने वाले कुछ वर्षों में उत्पादन (12,000 मीट्रिक टन) पढ़कर हो जाएगा, क्योंकि आधुनिक मशीनों के साथ 14 और नई बांस की छड़ें निर्माण इकाइयां जल्द ही पूरे राज्य में आ जाएंगी।उन्होंने कहा, पहले त्रिपुरा के कारीगर हाथ से बांस की छड़ें बनाते थे ,परंतु कुछ साल पहले सरकार ने उनकी अनुकूल मशीन खरीदने में सहायता की।

Keep reading... Show less