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छत्तीसगढ़ : आईटीबीपी शिक्षक ‘स्मार्ट’ क्लास में

भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा के साथ माओवाद प्रभावित राज्यों में सरकार विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने नया अवतार लेते हुए स्थानीय स्कूली बच्चों के लिए ‘स्मार्ट’ शिक्षक बनकर उन्हें शिक्षित करने के साथ छात्रों से हल्बी भाषा सीख रहे हैं। राज्य में तैनात 90,000 से अधिक

भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा के साथ माओवाद प्रभावित राज्यों में सरकार विरोधी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) ने नया अवतार लेते हुए स्थानीय स्कूली बच्चों के लिए ‘स्मार्ट’ शिक्षक बनकर उन्हें शिक्षित करने के साथ छात्रों से हल्बी भाषा सीख रहे हैं।

राज्य में तैनात 90,000 से अधिक जवान वाले बल माओवाद प्रभावित कोंडागांव जिले में स्थानीय बच्चों के लिए इंटरनेट आधारित कक्षाएं आयोजित करा रहे हैं। बच्चों को शिक्षित करने के क्रम में ये आईटीबीपी कर्मी, बल की खुफिया क्षमता को बढ़ाने के लिए, धीरे-धीरे उनसे स्थानीय हल्बी भाषा सीख रहे हैं।


पांच जनवरी से कोंडागांव और आसपास के गांवों में दूरदराज के गांवों में बच्चों के लिए शुरू किया गया ऑनलाइन ऑडियो-विजुअल की मदद से छात्र के ज्ञान को बढ़ाने के लिए आईटीबीपी की 41 वीं बटालियन के कर्मियों द्वारा अध्याय की कक्षाएं आयोजित की जाती हैं। कंप्यूटर और प्रोजेक्टर जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मदद से भी कक्षाएं ली जाती हैं।

यह कक्षाएं गुरुवार को छोड़कर सप्ताह में दोपहर 3 बजे से 4.30 बजे के बीच आयोजित की जाती हैं। ये कक्षाएं उन आईटीबीपी कर्मियों द्वारा ली जाती हैं जो स्नातक हैं और जिन्हें पढ़ाने का अनुभव और ज्ञान है। इसके अलावा, यूट्यूब पर ऑनलाइन सीखने वाले कई वीडियो और छात्रों को सीखने और अभ्यास करने के पर्याप्त अवसर देकर ई-लर्निग वेबसाइटों की मदद भी ली जाती है।

आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडेय ने आईएएनएस को बताया,” प्रतिदिन आधे घंटे के कैप्सूल कोर्स भविष्य में छात्रों को उच्च अध्ययन करने में सक्षम बनाता है और बच्चों को ई-लर्निग और वर्चुअल ऑनलाइन कक्षाओं के तरीकों को समझने में मदद करेगा।” उन्होंने आगे कहा, इस पहल से कुछ 50 छात्रों को लाभान्वित किया जा रहा है।

पांडेय ने कहा कि ये सभी कक्षाएं इंटरनेट के माध्यम से आयोजित की जाती हैं, हालांकि मोबाइल सिग्नल क्षेत्र में काफी कमजोर है। उन्होंने आगे कहा, जवान अपने मोबाइल फोन को बांस के खंभे या पेड़ की डालियों के माध्यम से ऊंचाई पर बांध देते हैं, जहां नेटवर्क मिलता है और यह वाईफाई हॉटस्पॉट के माध्यम से स्मार्ट कक्षाओं के लिए उपयोग किए जाने वाले लैपटॉप से जुड़ा होता है जिसे प्रोजेक्टर के माध्यम से बड़ी स्क्रीन के रूप में पेश किया जाता है। ब्लूटूथ स्पीकर के माध्यम से आवाज आती है।

अधिकारी ने कहा कि कक्षा 1 से 9 तक के छात्रों को पढ़ाया जाता है और गणित और अंग्रेजी पर विशेष रूप से ध्यान दिया जाता है। पांडेय ने कहा, “बच्चों को कुछ फिल्में भी दिखाई जाती हैं जो उन्हें शिक्षा प्रदान करने में मदद करती हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “कंपनी कमांडर, एक सब-इंस्पेक्टर और स्नातक की डिग्री वाले कुछ कांस्टेबल सहित आधा दर्जन से अधिक आईटीबीपी कर्मी इस काम में लगे हुए हैं।” इन छात्रों को पढ़ाने वालों में शामिल पवन कुमार, सहायक कमांडेंट ने आईएएनएस को बताया, “हमने उन्हें कोविड-19 के बारे में समझाने का प्रयास किया।”

साइट ऑनलाइन अध्ययन सामग्री प्रदान करती हैं जो बच्चों को पढ़ाने के लिए उपयोग में आती हैं। (आईएएनएस)

उन्होंने कहा, “हम गूगल मीट, यूट्यूब और कुछ शिक्षा वेबसाइटों जैसे ईकिड्सलर्निग डॉट ऑर्ग और आईएक्सएल डॉट कम का उपयोग करते हैं। ये साइट ऑनलाइन अध्ययन सामग्री प्रदान करती हैं जो बच्चों को पढ़ाने के लिए उपयोग में आती हैं। बोधगुरु वेबसाइट और कुछ यूट्यूब चैनल का उपयोग इन बच्चों को शिक्षित करने के लिए कुछ वीडियो चलाने के लिए भी किया जाता है।”

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कुमार ने कहा कि वाईफाई डोंगल का इस्तेमाल बेहतर इंटरनेट स्पीड पाने के लिए किया जाता है और इन्हें सिग्नल पाने के लिए एक निश्चित ऊंचाई पर बांस के खंभे या पेड़ों पर लटका दिया जाता है।

कक्षाओं और समय के बारे में पूछे जाने पर अधिकारी ने कहा, “कक्षाएं दो पालियों में चलाई जाती हैं। कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों को एक पाली में और दूसरे बच्चों को दूसरी पाली में पढ़ाया जाता है। दोपहर 3 बजे से शाम 4.30 बजे तक एक निश्चित समय होता है। ये कक्षाएं गुरुवार के अलावा सप्ताह के छह दिनों को चलती हैं।”

अधिकारी के अनुसार, इन छात्रों को पढ़ाने के लिए कमरा स्थापित किया जाता है, उनकी दिलचस्पी बनाए रखने के लिए कुछ स्नैक्स भी प्रदान किए जाते हैं। अधिकारी ने कहा कि ये कक्षाएं 5 जनवरी से हडेली क्षेत्र में चलाई जा रही हैं। (आईएएनएस)

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

कोरोना(Corona) के कारण लगभग 18 से 20 महीने झूझने और घरों में बंद रहने के बाद दुनिया में अब ज़िन्दगी पटरी पर लौट रही है लेकिन अब दक्षिण अफ्रीका में पाए गए कोरोना के नए वैरिएंट ने अब दुनिया के कई देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। नए वैरिएंट का नाम बी.1.1.1.529 है। इस वैरिएंट के आने से वैज्ञानिको के बीच चिंता बढ़ गई है क्योंकि उनकी माने तो यह वैरिएंट डेल्टा प्लस वैरिएंट(Delta Plus Variant) से भी ज़्यादा खतरनाक है।

दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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