Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
मनोरंजन

बच्चों की फिल्में मुश्किल से ही बनती है – सतीश कौशिक

भारत के सिनेमा जगत में बच्चों के लिए फिल्में कम मात्रा में बनाई जाती हैं वहीं बाहर के देशों में बच्चों के लिए बन रही फिल्मों की शैली काफी वृहद है।

बच्चों की फिल्में मुश्किल से ही थिएटर पर रिलीज होती हैं। (Pixabay)

By – नतालिया निंगथौजम

अभिनेता-फिल्मकार सतीश कौशिक इस बात को मानते हैं कि बच्चों के लिए कम फिल्में बनती हैं और साथ ही भारत में इस शैली की फिल्मों के लिए कोई खरीदार भी नहीं है।


कौशिक ने आईएएनएस को बताया, “बच्चों की फिल्में मुश्किल से ही बनती है। अगर बनती भी है और उन्हें सही से थिएटर पर रिलीज नहीं किया जाता है। एक या दो फिल्में फिल्म महोत्सवों में भाग लेती हैं।”

साल 2017 में बच्चों के लिए स्कूल चलेगा नामक एक फिल्म का निर्माण और उसमें अभिनय कर चुके इस कलाकार ने कहा, “बाहर के देशों में बच्चों के लिए बन रही फिल्मों की शैली काफी वृहद है, लेकिन अगर हम ऐसी फिल्में बनाएंगे, तो कोई भी वितरक इसे खरीदना नहीं चाहेगा। बच्चों के लिए बनाई जाने वाली फिल्मों का कोई क्रेता ही नहीं है।”

उनका मानना है कि इस शैली को लोकप्रिय बनाने का एक ही तरीका है और वह ये कि इनमें बच्चों के साथ किसी चर्चित वयस्क कलाकार को भी शामिल करें।

यह भी पढ़ें – जब बेटे ने अपने माँ-बाप को लिखा WhatsApp पत्र

राजकुमार राव और नुसरत भरूचा अभिनीत अपनी हालिया फिल्म छलांग के बारे में उन्होंने कहा, “बच्चों के साथ आपको इन फिल्मों में किसी हीरो को भी शामिल करना होगा। उदाहरण के तौर पर आप ‘छलांग’ को ही ले लीजिए। यह एक ऐसी फिल्म है, जो व्यवसायिक है, नाटकीय है, जिसके गाने अच्छे हैं, जिसकी कहानी प्रेरक है और हंसी का तड़का भी है और इन सबसे बढ़कर यह एक बच्चों की फिल्म है।”

उन्होंने आगे यह भी कहा, “यह बच्चों के लिए एक मुख्यधारा की फिल्म भी है। उन्हें यह बेहद पसंद आएगी। फिल्म में उन्हें अपनी ही छवि देखने को मिलेगी। ‘मिस्टर इंडिया’ भी बच्चों के लिए बनी एक मेनस्ट्रीम फिल्म थी।”

साल 1987 में आई इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में सतीश ने सबके चहेते किरदार कैलेंडर को निभाया था। (आईएएनएस)

Popular

देश के जवानों की शहादत रोकने के लिए एमआईआईटी मेरठ की तरफ से एक बड़ा प्रयास किया गया है। (Wikimedia commons)

देश की सीमाओं की सुरक्षा करते वक्त हमारे देश के वीर सैनिक अक्सर शहीद हो जाते हैं इसलिए कभी ना कभी भारतीयों के मन में यह आता है कि हम अपने वीर जवानों की शहादत को कैसे रोक सकते? लेकिन इस क्षेत्र में अब हमें उम्मीद की किरण मिल गई है। दरअसल, हमारे जवानों की सुरक्षा के लिए मेरठ इंस्टीट्यूट आफ इंजनियरिंग टेक्नोलॉजी (एमआईईटी) इंजीनियरिंग कॉलेज, मेरठ के सहयोग से एक मानव रहित बॉर्डर सिक्योरिटी सिस्टम तैयार किया गया है। इस डिवाइस को मानव रहित सोलर मशीन गन नाम दिया गया है। यह सिस्टम बॉर्डर पर तैनात जवानों की सुरक्षा और सुरक्षित रहते हुए आतंकियों का सामना करने के लिए बनाया गया है। इसे तैयार करने वाले युवा वैज्ञानिक श्याम चौरसिया ने बताया कि यह अभी प्रोटोटाईप बनाया गया है। इसकी मारक क्षमता तकरीबन 500 मीटर तक होगी, जिसे और बढ़ाया भी जा सकता है।

यह मशीन गन इलेट्रॉनिक है। इसे संचालित करने के लिए किसी इंसान की जरुरत नहीं होगी। इसका इस्तेमाल अति दुर्गम बॉर्डर एरिया में आतंकियों का सामना करने के लिए किया जा सकेगा। इसमें लगे सेंसर कैमरे दुश्मनों पर दूर से नजर रख सकतें हैं। आस-पास किसी तरह की आहट होने पर यह मानव रहित गन जवानों को चौकन्ना करने के साथ खुद निर्णय लेकर दुश्मनों पर गोलियों की बौछार भी करने में सक्षम होगा। इस मानव रहित गन को ऑटोमेटिक और मैनुअल भी कर सकते हैं।

Keep Reading Show less

मंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में महिला सशक्तिकरण ,कोविद टिकाकरण जैसे मुद्दों पर बात की। (Twitter)

'मन की बात' आकाशवाणी पर प्रसारित किया जाने वाला एक कार्यक्रम है, जिसके जरिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के नागरिकों को संबोधित करते हैं। रविवार को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में 100 करोड़ से अधिक लोगों को कवर करने वाले COVID टीकाकरण अभियान के लिए स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की सराहना करते हुए लोगों को बधाई दी। साथ ही उन्होंने संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर रविवार को कहा, 'भारत हमारे ग्रह को एक बेहतर जगह बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।'

उन्होंने कहा, "भारत ने हमेशा विश्व शांति के लिए काम किया है। इसे संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में हमारे योगदान के रूप में देखा जाता है। भारत योग और स्वास्थ्य के पारंपरिक तरीकों को और लोकप्रिय बनाने के लिए भी काम कर रहा है।

Keep Reading Show less

काउंटरप्वाइंट की रिसर्च में कहा गया है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाला बाजार बन गया है।(Wikimedia commons)

Keep reading... Show less