Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
ओपिनियन

चील के समान तेज़ महान योद्धा “चीला राय”!

भारतीय इतिहास में चीला राय के नाम से विख्यात "शुक्लाध्वज" एक पराकर्मी सेनापती थे। कहा जाता है की ये अपने भाई राजा नारा नारायण के कमांडर इन चीफ थे |

भारतीय इतिहास में चीला राय के नाम से विख्यात “शुक्लाध्वज” एक पराकर्मी सेनापती थे। (ट्विटर)

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनावों ने सियासत जगत में फिर एक बार गरमा – गर्मी पैदा कर दी है । जहां अभी से ही चुनावी संग्राम शुरू हो गए हैं। सभी पार्टियां अपनी पूरी ताकत से चुनावी दौड़ को जीतने के भरसक प्रयास में जुटी है । राजनीति के इस खेल के फ़िर से वही नियम और वही खिलाड़ी । जहां सत्ता में केवल कुर्सी हासिल करना ही इनका लक्ष्य है । इसी रण में तृणमूल कांग्रेस और भाजपा में चुनावी संग्राम अपनी चरम सीमा पर है। दोनों ही पार्टियां एक दूसरे को कमज़ोर दिखाने का कोई रास्ता नहीं छोड़ती । पांच साल में बेहतर नतीजों के वादों के साथ , सभी पार्टियां जनता का भरोसा फिर एक बार हासिल करने में लगी है ।

इसी बीच केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी ने हाल ही में बंगाल दौरा किया। वहां उन्होंने एक रैली में कॉलेज ग्राउंड से बंगाल को संबोधित करते हुए कहा की यहां “अर्धसैनिक बलों” की एक नई  “नारायणी सेना बटालियन” बनाई जाएगी । साथ ही उन्होंने कहा , ट्रेंनिग सेंटर का नाम वीर “चीला राय” के नाम पर रखा जाएगा।


महायोद्धा चीला राय का नाम फिर एक बार याद किया जाएगा ‘केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह’ | (PIB)                                                                         

वीर “चीला राय” शायद आज कोई – कोई ही इनके नाम से,  इनकी वीरता से परिचित होगा । भारतीय इतिहास में चीला राय के नाम से विख्यात “शुक्लाध्वज” एक पराकर्मी सेनापती थे। इनका संबंध कामतपुर के कोच शाही राजवंश से था। कहा जाता है की ये अपने भाई राजा नारा नारायण के कमांडर इन चीफ थे , और उनके साम्राज्य के विस्तार में शुक्लाध्वज ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह हमारा दुर्भाग्य ही है की भारतीय इतिहासकारों ने इनकी वीरता को नजरंदाज कर दिया । महाराज विश्वा सिंह के पुत्र चीला राय का जन्म 1510 में हुआ था । इन्होंने ही कोच राजवंश की स्थापना की थी। चीला राय प्रारंभ से ही एक अद्भुत पराक्रमी वे सभी कौशल में निपुर्ण थे। इनकी वीरता व नारा नारायण की अध्यक्षता में इन्होंने अपने राजवंश का फैलाव चारो तरफ कर दिया था ।

नारा नारायण के कमांडर इन चीफ के रूप में चिला राय ने कभी ना हारने वाली एक श्रृंखला खड़ी कर ली थी। युद्ध के मैदान में जो उनका कौशल था वो आज भी असम में प्रसिद्ध है और उनके सैन्य हमलों की तेज़ी ने ही उन्हें चीला राय की उपाधि प्रदान की , जिसका अर्थ होता है “जो चील के समान तेज़ और दुश्मनों को पकड़ने में पतंग हो।

सैन्य रणनीतिकार में उस्ताद चीला राय ने कई युद्ध लड़े । और अपनी बुद्धि और कौशल से जीत भी हासिल की भूटिया, कचहरी जैसे राज्यों व अहोमों पर अपना वर्चस्व सुनिश्चित किया। 1562 में नारा नारायण व चीला राय ने अहोम साम्राज्य पर हमला किया और अपने सैनिकों के साथ मिलकर वहां के राजा पर जीत हासिल की। अहोम पर निर्णायक जीत के बाद चीला राय अपनी सेना के साथ कचहरी सम्राज्य पर हमला किया और यहां भी वह विजयी रहे ।  इसी तरह उन्होंने कई युद्ध लड़े , साम्राज्य पर कब्जे किए ।  प्रत्येक जीत ने कामात साम्राज्य को और अधिक शक्तिशाली बना दिया था। कहा जाता है की , चीला राय का नौसेना विभाग मुगल साम्राज्य के भी नौसेना विभाग से कई ज्यादा शक्तिशाली था।

चीला राय की जीत का सिलसिला युद्ध के मैदान पर नहीं बल्कि एक अभियान के दौरान खत्म हुआ। उनकी मृत्यु गंगा नदी किनारे 1571 में हुई थी। यहां से वीर चीला राय की जीत की श्रृंखला तो रुक गई थी लेकिन उनकी वीरता एवम् शौर्य ने इतिहास के पन्नों में एक सम्मानित जगह हासिल कर ली थी ।

यह भी पढ़े :- अम्बेडकरवादी सोच के जरिए अपनों में ही फूट डालने में जुटे हैं ये पत्रकार!

आज भी पराकर्मी कमांडर इन चीफ “चीला राय” की वीरता को उनकी जयंती के रूप में , खूब धूम धाम से मनाया जाता है। असम सरकार के सर्वोच्च बहादुरी पुरस्कार का नाम भी वीर “चीला राय” के नाम पर रखा गया है।

लेकिन, आज बड़ी मात्रा में लोग वीर चीला राय की कहानी से अनभिज्ञ है। चीला राय की वीरता की कहानी को उजागर करना बेहद आवश्यक है। ताकि इस समाज का बच्चा – बच्चा उनके पराकर्म से परिचित हो सके और एक नई सीख हासिल कर सके।

Popular

मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। (IANS)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के समक्ष 22 मिनट के अपने संबोधन में 'अद्वितीय' पैमाने पर विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति और समस्या-समाधान क्षमता के संदर्भ में भारत की शक्ति के विचार को सामने रखा। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भारतीयों की प्रगति होती है तो विश्व के विकास को भी गति मिलती है। मोदी ने अपने संबोधन में कहा, "जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत में सुधार होता है, तो दुनिया बदल जाती है। भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों की मापनीयता और उनकी लागत-प्रभावशीलता दोनों अद्वितीय हैं।"

पेश हैं मोदी के भाषण की 10 खास बातें:

आकांक्षा: "ये भारत के लोकतंत्र की ताकत है कि एक छोटा बच्चा जो कभी एक रेलवे स्टेशन के टी-स्टॉल पर अपने पिता की मदद करता था, वो आज चौथी बार, भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर यूएनजीए को संबोधित कर रहा है।

लोकतंत्र: सबसे लंबे समय तक गुजरात का मुख्यमंत्री और फिर पिछले 7 साल से भारत के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे हेड ऑफ गवर्मेट की भूमिका में देशवासियों की सेवा करते हुए 20 साल हो रहे हैं। मैं अपने अनुभव से कह रहा हूं। हां, लोकतंत्र उद्धार कर सकता है। हां. लोकतंत्र ने उद्धार किया है।"

बैंकिंग: "बीते सात वर्षों में भारत में 43 करोड़ से ज्यादा लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया है, जो अब तक इससे वंचित थे। आज 36 करोड़ से अधिक ऐसे लोगों को भी बीमा सुरक्षा कवच मिला है, जो पहले इस बारे में सोच भी नहीं सकते थे।"

स्वास्थ्य देखभाल: "50 करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा देकर, भारत ने उन्हें क्वालिटी हेल्थ सर्विस से जोड़ा है। भारत ने 3 करोड़ पक्के घर बनाकर, बेघर परिवारों को घर का मालिक बनाया है।"

जलापूर्ति: "प्रदूषित पानी, भारत ही नहीं पूरे विश्व और खासकर गरीब और विकासशील देशों की बहुत बड़ी समस्या है। भारत में इस चुनौती से निपटने के लिए हम 17 करोड़ से अधिक घरों तक, पाइप से साफ पानी पहुंचाने का बहुत बड़ा अभियान चला रहे हैं।"

भारत और भारतीय: "दुनिया का हर छठा व्यक्ति भारतीय है। जब भारतीय प्रगति करते हैं, तो दुनिया के विकास को भी गति मिलती है। जब भारत बढ़ता है, तो दुनिया बढ़ती है। जब भारत सुधार करता है, तो दुनिया बदल जाती है।"

विज्ञान और तकनीक: "भारत में हो रहे विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार दुनिया में एक बड़ा योगदान दे सकते हैं। हमारे तकनीकी समाधानों का स्केल और उनकी कम लागत, दोनों अतुलनीय है। भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए हर महीने 3.5 अरब से ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं।"

यह भी पढ़ें :- खान को भारत का जवाब : पाकिस्तान 'आतंकवादियों का समर्थक, अल्पसंख्यकों का दमन करने वाला'

वैक्सीन : "मैं यूएनजीए को ये जानकारी देना चाहता हूं कि भारत ने दुनिया की पहली डीएनए वैक्सीन विकसित कर ली है, जिसे 12 साल की आयु से ज्यादा के सभी लोगों को लगाया जा सकता है। एक और एमआरएनए टीका विकास के अंतिम चरण में है।" निवेश का अवसर: "मैं दुनिया भर के वैक्सीन निमार्ताओं को भी निमंत्रण देता हूं। आओ, भारत में वैक्सीन बनाएं।"

आतंकवाद: "प्रतिगामी सोच वाले देश आतंकवाद को एक राजनीतिक उपकरण के रूप में उपयोग कर रहे हैं। इन देशों को यह समझना चाहिए कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। साथ ही, यह सुनिश्चित करना नितांत आवश्यक है कि अफगानिस्तान के क्षेत्र का उपयोग आतंकवाद फैलाने या आतंकवादी हमलों के लिए न हो।"

आतंकवाद से निपटने पर जोर देते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, "हमें इस बात के लिए भी सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश, अपने स्वार्थ के लिए, एक टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश ना करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता को, वहां की महिलाओं और बच्चों को, वहां के अल्पसंख्यकों को मदद की जरूरत है और इसमें हमें उन्हें सहायता प्रदान करके अपना दायित्व निभाना ही होगा।" (आईएएनएस-SM)


पूर्वोत्तर सीमा क्षेत्र बहुत संवेदनशील हैं और उनके लिए तोड़फोड़ के ऐसे प्रयासों के बारे में जानना नितांत आवश्यक है। (Unsplash)

भारत चीन सीमा पर बसे हुए गांव चिंता का विषय हैं। हैग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड ने एक बड़ी सूचना देते हुए बड़ा खुलासा किया है कि चीन ने भारत के साथ अपनी सीमा पर 680 'जियाओकांग' (समृद्ध या संपन्न गांव) बनाए हैं। ये गांव भारतीय ग्रामीणों को बेहतरीन चीनी जीवन की और प्रभावित करने के लिए हैं।

कृष्ण वर्मा, ग्लोबल काउंटर टेररिज्म काउंसिल के सलाहकार बोर्ड के एक सदस्य ने आईएएनएस को बताया, " ये उनकी ओर से खुफिया मुहिम और सुरक्षा अभियान है। वे लोगों को भारत विरोधी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसलिए हम अपने पुलिस कर्मियों को इन प्रयासों के बारे में अभ्यास दे रहे हैं और उन्हें उनकी हरकतों का मुकाबले का सामना करने के लिए सक्षम बना रहे हैं। चीनी सरकार के द्वारा लगभग 680 संपन्न गांव का निर्माण किया जा चुका है। जो चीन और भूटान की सीमाओं पर हैं। इस गांव में चीन के स्थानीय नागरिक भारतीयों को प्रभावित करते है कि चीनी सरकार बहुत अच्छी है। शुक्रवार को भारत सरकार के पूर्व विशेष सचिव वर्मा गुजरात के गांधीनगर में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) में 16 परिवीक्षाधीन उप अधीक्षकों (डीवाईएसपी) के लिए 12 दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के अवसर पर एक कार्यक्रम में थे।

Keep Reading Show less

बड़े देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है।(Canva)

विदेशी कोयला बिजली वित्त को रोकने की चीन की घोषणा के बाद, श्रीलंका, चिली, डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके जैसे देशों के एक समूह ने 'नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट' की घोषणा की है। इसका उद्देश्य अन्य सभी देशों को नए कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों के निर्माण को रोकने के लिए प्रोत्साहित करना है ताकि 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। पहली बार, विकसित और विकासशील देशों का एक विविध समूह नए कोयले से चलने वाले बिजली उत्पादन को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों को गति देने के लिए एक साथ आया है। उनकी नई पहल के लिए हस्ताक्षरकर्ताओं को वर्ष के अंत तक कोयले से चलने वाली बिजली उत्पादन परियोजनाओं के नए निर्माण की अनुमति तुरंत बंद करने और समाप्त करने की आवश्यकता है।

ये देश अन्य सभी सरकारों से इन कदमों को उठाने और संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन सीओपी26 से पहले समझौते में शामिल होने का आह्वान कर रहे हैं ताकि शिखर सम्मेलन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को "इतिहास को कोयले की शक्ति सौंपने" में मदद मिल सके। नो न्यू कोल पावर कॉम्पेक्ट, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के आह्वान का जवाब देता है कि इस साल नए कोयले से चलने वाली बिजली का निर्माण समाप्त करने के लिए, 1.5 डिग्री सेल्सियस लक्ष्य को पहुंच के भीतर रखने और जलवायु परिवर्तन के विनाशकारी प्रभावों से बचने के लिए पहला कदम है। साथ ही सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करने के लिए सतत विकास लक्ष्य 7 को प्राप्त करना है।

एनर्जी कॉम्पैक्ट्स जीवित दस्तावेज हैं और अन्य देशों को इसमें शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। समूह का लक्ष्य जल्द से जल्द नए हस्ताक्षरकर्ताओं की सबसे बड़ी संख्या को इकट्ठा करना है। ऊर्जा पर संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय वार्ता 40 वर्षो में पहली बार ऊर्जा पर चर्चा करने वाला एक महासचिव के नेतृत्व वाला शिखर सम्मेलन है। यह जलवायु लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में ऊर्जा की महत्वपूर्ण भूमिका के साथ-साथ कोविड रिकवरी प्रक्रियाओं सहित विकास प्राथमिकताओं को पहचानता है। श्रीलंका और चिली ने हाल ही में नई कोयला परियोजनाओं को रद्द करने और राजनीतिक बयान देने में नेतृत्व दिखाया है कि वे अब नई कोयला शक्ति का पीछा नहीं करेंगे। डेनमार्क, फ्रांस, जर्मनी, मोंटेनेग्रो और यूके ने अपनी पिछली कोयला परियोजनाओं को पहले ही रद्द कर दिया है और अब वे अपने शेष कोयला बिजली उत्पादन की सेवानिवृत्ति में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

Keep reading... Show less