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देश

शशि थरूर, राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे व अन्य देशद्रोह मामले में नामजद

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों के हिंसक ट्रैक्टर रैली के बाद एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में नोएडा पुलिस ने कांग्रेस के सांसद शशि थरूर, वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे, विनोद के जोस और अन्य को देशद्रोह के मामले में नामजद किया है।

गणतंत्र दिवस के मौके पर किसानों के हिंसक ट्रैक्टर रैली के बाद एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में नोएडा पुलिस ने कांग्रेस के सांसद शशि थरूर, वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई, मृणाल पांडे, विनोद के जोस और अन्य को देशद्रोह के मामले में नामजद किया है। नोएडा के सेक्टर 20 थाने में उनके खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराई गई है। इसमें कहा गया है कि ट्रैक्टर रैली के दौरान एक किसान की मौत को लेकर गलत खबर चलाने और ट्वीट करने के लिए उन्हें नामजद किया गया है। एफआईआर में नेशनल हेराल्ड के एडिटर-इन-चीफ जफर आगा और कारवां के एडिटर अनंत नाथ का भी नाम शामिल है।


26 जनवरी को किसानों का जुलूस।(VOA)

इन सभी लोगों को भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए (धर्म, जाति, भाषा के आधार पर लोगों में वैमनस्य पैदा करना व सौहाद्र्र बिगाड़ने की कोशिश), 153बी (राष्ट्र की अखंडता के लिए संकट पैदा करना), 295ए (जानबूझकर धार्मिक भावना भड़काना), 298 (आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर किसी सम्प्रदाय अथवा धर्म विशेष के व्यक्ति की भावना को आहत करना), 504 (सामाजिक शांति भंग करना), 506 (धमकी देना), 505(2) (उपद्रव भड़काने के लिए गलत बयानी), 124ए (देशद्रोह), 34 (हिंसा भड़काने के लिए उकसाना), 120-बी (आपराधिक साजिश) और सूचना-प्रौद्यागिकी अधिनियम, 2000 के तहत नामजद किया गया है।

यह भी पढ़ें: क्या भारत के इस दुर्दशा के लिए राय ने बलिदान दिया था?

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें एक प्रदर्शनकारी को आईटीओ के पास तेज रफ्तार से ट्रैक्टर चलाते और बैरिकेड तोड़ते हुए दिखाया गया है। तेज रफ्तार के कारण ट्रैक्टर पलट भी जाता है। पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रदर्शनकारी की मौत इस हादसे में हुई।
(आईएएनएस)

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यूनेस्को को पूर्व पेंटागन अधिकारी, माइकल रुबिन की फटकार (Wikimedia Commons)

माइकल रुबिन, जो एक पूर्व पेंटागन सलाहकार रह चुके हैं, का मानना हैं कि यूनेस्को को न केवल अफगानिस्तान, बल्कि पाकिस्तान को भी अपने संस्था से बाहर कर देना चाहिए क्योंकि दोनों ही देश यूनेस्को की सहायता के योग्य नहीं है। उनका यह भी कहना है कि चीन भी इसी काबिल है। तीनों वर्तमान में यूनेस्को के कार्यपालक समिति में हैं, जबकि तीनों इसके बिल्कुल भी योग्य नहीं है। रुबिन, वाशिंगटन एक्जामिनर में लिखते हैं कि, "सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के बजाय, यूनेस्को के भ्रष्टाचार ने इसे विनाश का उत्प्रेरक बना दिया है। अफगानिस्तान में, दुनिया को तालिबान को जिम्मेदार ठहराना चाहिए"।

रुबिन आगे कहते हैं कि किस तरह अफगानिस्तान में तालिबान, अफगानिस्तान की सांस्कृतिक विरासत को मिटाने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रयास कर रहा है। वे पाकिस्तानी अधिकारियों के इशारे पर ऐसा करते हैं, जो पश्तून राष्ट्रवाद से डरते हैं और विभिन्न अफगान राजवंशों की विरासत के साथ-साथ इसके इतिहास की गहराई को मिटाना चाहते हैं। अफगानी विरासत को खत्म करके, पाकिस्तान अपनी भविष्य की भूमि हथियाने को सही ठहरा सकता है ।

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एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

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बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


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