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Pakistan में न तो मंदिर सुरक्षित और न ही अल्पसंख्यक बेटियाँ!

भारत का कभी हिस्सा रहे पाकिस्तान में आतंकियों के बढ़त के साथ-साथ जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं भी आए दिन सामने आती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार Pakistan में प्रति वर्ष करीब 1000 अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन Conversion कराया जाता है, जो कि चिंता का विषय है। पाकिस्तान में Minority लड़कियों परअत्याचार यहीं तक सीमित

(VOA)

भारत का कभी हिस्सा रहे पाकिस्तान में आतंकियों के बढ़त के साथ-साथ जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाएं भी आए दिन सामने आती हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार Pakistan में प्रति वर्ष करीब 1000 अल्पसंख्यक लड़कियों का जबरन Conversion कराया जाता है, जो कि चिंता का विषय है। पाकिस्तान में Minority लड़कियों परअत्याचार यहीं तक सीमित नहीं है। इस्लामिक कट्टरता के वेश में 40 से 50 साल के वृद्ध 15-16 साल की लड़कियों से जबरन शादी करते हैं। इनमें शामिल होती हैं हिन्दू, सिख, और ईसाई धर्म की Minority बेटियाँ। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि लॉकडाउन के दौरान यह अभ्यास तेज हो गया है लड़कियों के तस्कर इंटरनेट पर अधिक सक्रिय हैं और तो और परिवार भी बहुत अधिक कर्जे में है।

अमेरिका पहले ही धार्मिक स्वतंत्रता के लिए Pakistan को 'विशेष चिंता' वाले देशों की सूची में डाल चुका है। ऐसा Minority बेटियों का अपहरण, कम उम्र में शादी और उनके साथ हो रहे बलात्कार की घटनाओं को ध्यान में रख कर किया गया है। आम तौर पर पाकिस्तान में लड़कियों का अपहरण शादी के लिए तलाश कर रहे लड़कों द्वारा या फिर करीबी रिश्तेदारों द्वारा किया जाता है। या फिर कर्जे में डूबे माता-पिता से जमींदार लड़की छीन कर खुद शादी कर लेता है या फिर आगे बेच देता है, और इन सबके बीच पाकिस्तानी पुलिस तमाशबीन बनी रहती है। Pakistan के स्वतंत्र मानवाधिकार आयोग के अनुसार एक बार Conversion होने के बाद, लड़कियों की शादी जल्दी से कर दी जाती है, और भी उम्रदराज पुरुषों से या उन अपहरणकर्ताओं से।


पाकिस्तान में बेटियों के खिलाफ हो रहे जुर्म की दुनिया भर में निंदा हो रही है।(VOA)

जबरन धर्मपरिवर्तन के खेल में पुलिस से लेकर मौलवी सभी शामिल रहते हैं और इन सब के पीछे पैसों के बड़े हेर-फेर का अंतहीन इस्तेमाल है। इनका निशाना केवल गैर-इस्लामिक(Minority) बेटियाँ ही होती हैं क्योंकि उनपर निशाना साधना बहुत आसान होता है। 22 करोड़ Minority वाले देश पाकिस्तान में आय-दिन उन पर जुल्म ढाया जाता है। और अगर कोई पुलिस से इस प्रताड़ना के खिलाफ शिकायत करता है तो आरोपी पर करवाई के उलट शिकायतकर्ता पर ही ईशनिंदा का मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया जाता है।

दक्षिणी सिंध प्रांत के सामंती काशमोर क्षेत्र में, 13 वर्षीय सोनिया कुमारी का अपहरण कर लिया गया था, और एक दिन बाद पुलिस ने उसके माता-पिता को बताया कि वह(लड़की) हिंदू धर्म से Islam में परिवर्तित हो गई है। जिसके उपरांत उसकी माँ अपनी बेटी को छोड़ देने गुहार एक वीडियो के जरिए लगाई, जिसे पूरी दुनिया ने देखा। माँ ने गुहार लगाई कि “भगवान के लिए, कुरान, जो भी आप मानते हैं, कृपया मेरी बेटी को वापस कर दें, उसे जबरन हमारे घर से ले जाया गया था।" किन्तु कुछ ही दिन बाद एक पत्र Hindu कार्यकर्ता के पास आया जिसे सोनिया के माता-पिता द्वारा जबरन लिखवाया गया था कि “13 वर्षीय बच्ची ने स्वेच्छा से Conversion किया था और 36 वर्षीय एक व्यक्ति का निकाह किया।" वह व्यक्ति पहले से ही दो बच्चियों के साथ विवाहित है।

14 साल की नेहा का जबरन धर्म परिवर्तन करवाया गया था।(VOA)

ऐसा ही कुछ हाल हुआ नेहा का भी हुआ। जिसे महज 14 साल की उम्र में ईसाई धर्म से जबरन Islam धर्म में परिवर्तन करवाया गया और वह भी उसने करवाया जिसे वह अपनी मौसी मानती थी। संदेस बलोच, जिसने खुद भी कई साल पहले Islam में धर्म परिवर्तन कराया था। उसने नेहा को अपने 45 साल के देवर से निकाह करवाया। जिसके उपरांत उसे कमरे बंद रखा जाता, प्रताड़ना दी जाती और साथ ही साथ शोषण भी किया जाता था। बलोच की बेटी से यह प्रताड़ना सहन नहीं हुई, जिसके बाद उसने नेहा को शादी के एक हफ्ते बाद एक बुर्का और 500 रुपए लाकर दिए और नेहा वहाँ से भाग गई। किन्तु उसके ताज़े ज़ख्म पर एक और चोट लगी जब वह घर पहुंची। नेहा की माँ ने बेटी को स्वीकारने से मना कर दिया, क्योंकि उन्हें डर था कि उसका जबरन बनाया गया पति उनके परिवार के साथ गलत न कर बैठे। जिसके बाद नेहा अब कराची के ही गिरजाघर के पादरी के परिवार संग रहती है।

यह भी पढ़ें: आरजू के मामले ने पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण के खतरे को किया उजागर

Pakistan में नेहा और सोनिया जैसीं हज़ारों बेटियां हैं जिनमें या तो वकील बनने का सपना था या डॉक्टर बनने का, लेकिन उनका पांव थमा हैवानियत और दरिंदगी के चौखट पर। नेहा खुशनसीब थी कि वह उस नर्क से भाग सकी लेकिन हर कोई खुशनसीब नहीं होता।

स्रोत: VOA; हिंदी अनुवाद: शान्तनू मिश्रा

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