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दुनिया

कोरोना महामारी का भारत की शिक्षा पर बड़ा असर

दरअसल, यूनेस्को ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार, कोरोना महामारी से भारत में लगभग 32 करोड़ छात्रों की शिक्षा प्रभावित हुई है।

भारत में स्कूल जाने वाले करीब 26 करोड़ छात्र हैं। (Pixabay)

देखा जाए तो मौजूदा दौर हम सभी की जिंदगी का शायद सबसे अटपटा और उथल-पुथल वाला है और सबसे ज्यादा उलझन वाला भी है। आज लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि आगे जिंदगी कैसे चलेगी? कोरोनावायरस (Corona Virus) महामारी के दौरान जहां एक ओर लोग अपनी जिंदगी पटरी पर लाने की योजना बना रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर उन्हें यह चिंता सता रही है कि अगर स्थिति पूरी तरह से ठीक नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में वे अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज कैसे भेजेंगे? यह चिंता वाकई वाजिब भी है।

कोरोना वायरस का भारत (India) की शिक्षा पर बड़ा असर पड़ा है। दरअसल, यूनेस्को ने एक रिपोर्ट जारी की है जिसके अनुसार, कोरोना महामारी से भारत में लगभग 32 करोड़ छात्रों की शिक्षा प्रभावित हुई है। देश में 85 प्रतिशत माता-पिता को अपने बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता होने लगी है। उन्हें लगता है कि कोरोना के चक्कर में उनके बच्चों का भविष्य दांव पर है, जिंदगी की दौड़ में कहीं पिछड़ न जाएं और कहीं उनका पढ़ाई का साल खराब न हो जाए।


कुछ निजी स्कूल मीटिंग एप्लिकेशन जैसे जूम, माइक्रोसोफ्ट टीम आदि के जरिए पढ़ा रहे हैं। लेकिन एक सर्वे के अनुसार, हर पांच में से दो माता-पिता के पास बच्चों की ऑनलाइन कक्षाओं के सेटअप के लिए जरूरी सामान ही मौजूद नहीं हैं, सिर्फ इंटरनेट की सुविधा या लैपटॉप, टैबलेट की समस्या नहीं है, बल्कि समस्या ये भी है कि इस समय अधिकतर लोग घर से बैठे ऑफिस का काम कर रहे हैं। ऐसे में उनके पास एक ही लैपटॉप या कम्पयूटर है, जिससे या तो उनके बच्चे की पढ़ाई का नुकसान होगा या उनके काम का।

अगर स्थिति पूरी तरह से ठीक नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में वे अपने बच्चों को स्कूल-कॉलेज कैसे भेजेंगे? (Pixabay)

जाहिर है, सरकारों को भी इस चिंता के बारे में पता है, इसलिए भारत के केंद्रीय बोर्ड सीबीएसई और आईसीएसई ने बची हुई परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। यह ऐलान भी आ गया है कि कॉलेजों और पेशेवर कोर्सेज में भी फाइनल परीक्षाएं नहीं होंगी। लेकिन उन बच्चों और उनके माता-पिता की समस्या अभी तक टली नहीं है, जो करियर की अहम पायदान पर खड़े हैं, जिन्हें उसी स्कूल या कॉलेज अगली क्लास तक का नहीं, बल्कि जिंदगी के अगले मुकाम तक का सफर तय करना है। जो इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, मैनेजमेंट या किसी प्रतियोगिता की तैयारी में जुटे हैं और जो देश-दुनिया के नामी-गिरामी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश करने को जद्दोजहद में लगे हैं।

यह भी पढ़ें :- “वर्क फ्रॉम होम” करने वाले लोगों के साथ साइबर अपराध में वृद्धि : रिपोर्ट

भारत में स्कूल जाने वाले करीब 26 करोड़ छात्र हैं। जाहिर है, ऑनलाइन कक्षाओं (Online Classes) के जरिए शहरों में स्कूलों के नया सत्र शुरू हो गए हैं, जबकि आर्थिक रूप से कमजोर और गांव-देहातों में रहने वाले छात्र इस मामले में कहीं पीछे छूट रहे हैं। कोई नहीं जानता कि देश कोरोना से खतरे से निकलकर कब सामान्य जि़ंदगी में आएगा, ऐसे में अब सरकार के सामने ये चुनौती है कि वो स्कूल के इन छात्रों को कैसे साथ लेकर चलेगी। (आईएएनएस-SM)

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भारत, अमेरिका के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा की ( Pixabay )

भारत(india) और अमेरिका(America) के विशेषज्ञों ने शनिवार को कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन (Environment change) से निपटने के लिए विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए कहा कि वे 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से पांच - जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ताकत, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, खपत और उत्पादन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साझेदारी की है। विज्ञान विभाग के सचिव एस.चंद्रशेखर ने कहा, "सख्त जलवायु व्यवस्था के तहत हम उत्सर्जन कटौती प्रौद्योगिकियों के पोर्टफोलियो के सही संतुलन की पहचान और अपनाने का एहसास कर सकते हैं। ग्लासगो में हाल ही में संपन्न सीओपी-26 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ-साथ महत्वाकांक्षाओं को सामने लाया। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद हम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करेंगे।"

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर पर पहली कार्यशाला में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पीएम ने हम सभी को 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्र बनने को कहा है।" उन्होंने सीसीयूएस के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आरडी एंड डी की दिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की हालिया पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

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वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

कोरोना के इस दौर में ऐप टेक्नॉलॉजी (App Technology) की पढ़ाई कई समस्याओं का समाधान कर रही है। ऐसा ही एक समाधान 10 वर्षीय छात्र कनिष्कर आर ने कर दिखाया है। कनिष्कर ने पेशे से वकील अपने पिता की मदद एक ऐप (App) बनाकर की। दस्तावेज संभालने में मददगार यह ऐप वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करता है। 10 वर्षीय कनिष्कर का यह ऐप अब उसके पिता ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य वकील भी इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक उद्यम की शक्ल ले रहा है।

कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

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डॉ. मुनीश रायजादा ने इस वेब सीरीज़ के माध्यम से आम आदमी पार्टी में हुए भ्रस्टाचार को सामने लाने का प्रयास किया है

आम आदमी पार्टी(AAP) पंजाब के लोकसभा चुनाव में अपनी बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है वहीं पार्टी के एक पूर्व सदस्य ने राजनैतिक शैली में वेब सीरीज़ के रूप में 'इनसाइडर अकाउंट" निकला है जिसमे दावा किया गया है कि पार्टी अपने मूल सिद्धांतों से भटक गई है। 'ट्रांसपेरेंसी : पारदर्शिता का निर्माण शिकागो में कार्यरत चंडीगढ़ के चिकित्सक डॉ.मुनीश रायज़ादा द्वारा किया गया है। यूट्यूब(Youtube) पर उपलब्ध यह वेब सीरीज़ यह दर्शाती है कि कैसे एक पार्टी पारदर्शी होने के साथ साथ व्यवस्था परिवर्तन लाने के बजाय गैर-पारदर्शी औऱ राजनीतिक आदत का हिस्सा बन गई। यह वेब सीरीज अक्टूबर 2020 में पूरी होने के बाद ओटीटी प्लेटफॉर्म एमएक्स प्लयेर पर रिलीज हुई। डॉ.मुनीश रायज़ादा के अनुसार इस वेब सीरीज़ को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

डॉ.मुनीश रायजादा ने फोन पर आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि, " मंच इस वेब सीरीज का प्रचार यह कहकर नहीं कर रहा था कि यह एक राजनीतिक वेब सीरीज है, और मैंने सोचा कि मैं इस वेब सीरीज को बड़े पैमाने में दर्शकों तक कैसे ले जा सकता हूँ फिर मैंने यूट्यूब के बारे में सोचा।" यह वेब सीरीज यूट्यूब पर 17 जनवरी को रिलीज़ किया गया।

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