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टेक्नोलॉजी

स्मार्ट डस्टबीन में डालते ही धू-धकर जल जाएगा बेकार मास्क

कोरोना वायरस से बचाव के हथियार बने मास्क के बेकार होंने पर अब कोई समस्या नहीं आएगी। डस्टबीन में डालते ही यह धू-धकर जल उठेगा।

एंटी कोरोना स्मार्ट डस्टबिन।(आईएएनएस)

कोरोना वायरस से बचाव के हथियार बने मास्क के बेकार होंने पर अब कोई समस्या नहीं आएगी। डस्टबीन में डालते ही यह धू-धकर जल उठेगा। इसे न तो कहीं इधर-उधर फेंकने की समस्या रहेगी, न ही इस बेकार मास्क से वायरस के बढ़ने का भय भी रहेगा। वाराणसी के दो छात्र आयुष और रेशमा द्वारा बनाएं गये स्मार्ट डस्टबीन से यह संभव हो सकेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के सक्षम स्कूल में पढ़ने वाले आयुष और रेषमा ने बताया कि कोरोना संकट में मास्क बहुत उपयोगी सिद्ध हुआ है। हालांकि, लोगों के इधर, उधर फेंकने से वायरस के फैलने का खतरा भी रहा है। इसे देखते हुए हमने स्मार्ट इलेक्ट्रिक डस्टबीन का इजाद किया है।


आयुष ने बताया कि “स्मार्ट डस्टबीन में प्रयोग किए हुए मास्क, ग्लब्स और पीपीईकिट को डालने से यह जल जाएगा। इससे फैलने वाले संक्रमण का खतरा भी नहीं होगा। यह कार्यलयों, अस्पतालों और एयरपोर्ट समेत अन्य सार्वजनिक जगहों पर रखकर इलेक्ट्रिक से संचालित किया जा सकता है।”

रेशमा ने बताया कि “यह डस्टबिन मेटल के चादर से बना हुआ हैं तकरीबन 3 फुट उंचा है। डस्टबीन के ऊपरी हिस्से में एक छोटा सा सेंसर ढक्कन लगा हैं जो किसी व्यक्ति के नजदीक आने पर ऑटोमेटिक खुल जाएगा। डस्टबिन के ढक्कन को खुलते ही आप अपने बेकार मास्क को इसके के अंदर डाल दें। मास्क डालते ही सेंसर 20 सेकेंड के लिए इसमें लगे हीटर को ऑन कर देता हैं। जिससे मास्क महज कुछ सेकंड में जल कर खाक हो जाते हैं। डस्टबीन में 200 मास्क, ग्लब्स होने पर डस्टबीन का हीटर ऑन होकर इसे नष्ट कर देगा। इसका प्रयोग मैनुअल और आटोमैटिक किया जा सकता है। इसे बनाने में 6 दिन का समय व 3500 रुपये का खर्च आया हैं। इसे बनाने में अल्ट्रासोनिक सेंसर, गियर मोटर, मोशन सेंसर, हीटर प्लेट 1000 वाट, स्पीकर, स्विच, का इस्तेमाल किया गया हैं। इसका आकार बढ़ाया जा सकता है। इसे आने वाले समय में बिना बिजली के चिंगारी से जलाने की तकनीक पर भी काम किया जा रहा है।”

स्मार्ट डस्टबिन पर्यावरण के लिए रहेगा लाभदायक।(आईएएनएस)

सक्षम स्कूल की संस्थापक सुबिना चोपड़ा ने बताया, “कोरोना संकट में मास्क, ग्लब्स, पीपीई किट बहुत काम आए लेकिन यह अक्सर प्रयोग होंने के बाद लोग सार्वजनिक स्थलों फेंक देते जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। इसे देखते हुए हमने अपने दो बच्चों यह एंटी इलेक्ट्रिक स्मार्ट डस्टबीन बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। जिसे बच्चों ने बनाया है। इस डस्टबीन के प्रयोग से हम फैलने वाले संक्रमण को रोक सकते हैं।”

आइआइटी बीएचयू में बायो मेडिकल के एसोसिएट प्रोफेसर डा. मार्शल धयाल ने बताया, “स्मार्ट डस्टबीन बनाने का प्रयास काफी सराहनीय है। कोरोना संकट के दौरान देखने को मिला है कि लोगों ने प्रयोग किए हुए मास्कों या अन्य मेडिकल वेस्टेज खुले स्थानों पर पड़े रहते हैं। जिससे संक्रमण होने का भय बना रहता है। अगर यह स्मार्ट डस्टबीन में डाले जाए और यह जल जाएंगे। तो इससे संक्रमण का खतरा बिल्कुल नहीं रहेगा। यह अच्छी चीज है। इस डस्टबीन का प्रयोग कार्यालयों, अस्पतालों में किया जा सकता है।”

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वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी, क्षेत्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी महादेव पांडेय ने बताया कि “कोरोना को रोकने के लिए मास्क बड़ा कारगर साबित हुआ है। लेकिन, कोरोना संक्रमितों के इलाज और जांच के बाद निकले मेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इससे संक्रमण फैलने की आशंका बनी रहती है। इसमें मास्क, ग्लब्स और पीपीई किट समेत अनेक चीजें शामिल है। यह स्मार्ट डस्बीन में मेडिकल वेस्ट अपने आप जल जाएगा। यह काफी अच्छा नावाचार है। इसमें बच्चों के वेस्ट डायपर को भी नष्ट करनें का भी तरीका निकाला जा सकता है। यह काफी सराहनीय कदम है।” (आईएएनएस-PS)

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\u0915\u094b\u0930\u094b\u0928\u093e \u0935\u093e\u092f\u0930\u0938 कोरोना का डेल्टा वैरिएंट हाल के दिनों में दुनियाभर में कहर बरपाया है (pixabay)

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आप को बता दे की यह योजना राज्य सरकार द्वारा यूके और आयरलैंड में उच्च अध्ययन करने हेतु अनुसूचित जनजातियों के छात्रों के लिए शुरू की गई है। छात्रवृत्ति के पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रों को विविध खर्चो के साथ-साथ ट्यूशन फीस भी पूरी तरह मिलेगी । इस योजना के अनुसार झारखंड राज्य में हर साल अनुसूचित जनजाति से 10 छात्रों का चयन किया जाएगा।

सितंबर में ब्रिटेन के 5 विभिन्न विश्वविद्यालयों में अपना अध्ययन कार्यक्रम शुरू करंगे 6 छात्र जिनको को चुना गया हैं।

अगर बात करे चयनित छात्रों की सूचि के बारे में तो इसमें से हरक्यूलिस सिंह मुंडा जो कि "यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन " के "स्कूल ऑफ ओरिएंटल एंड अफ्रीकन स्टडीज" से एमए करने जा रहे हैं। "मुर्मू यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन" से छात्र अजितेश आर्किटेक्चर में एमए करने जा रहे हैं। और वंहीआकांक्षा मेरी "लॉफबोरो विश्वविद्यालय" में जलवायु परिवर्तन, विज्ञान और प्रबंधन में एमएससी करेंगी, जबकि दिनेश भगत ससेक्स विश्वविद्यालय में जलवायु परिवर्तन, विकास और नीति में एमएससी करेंगे।

\u0938\u094d\u091f\u0942\u0921\u0947\u0902\u091f विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए छात्र (pixabay)

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