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कॉस्मेटिक सर्जरी में हुआ इजाफा और सबसे ज्यादा इसमें पुरूषों की संख्या!

ज़ूम कॉल या गूगल मीट पर ज्यादा वक्त बिताने के कारण दुनिया भर में लोगों में कॉस्मेटिक सर्जरी कराने की प्रवृति में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है।

सबसे ज्यादा जिस कल्चर में तेजी आई है, वह है वर्क फ्रॉम होम। (Pexel)

2020 में आए नोवल कोरोना वायरस (Corona Virus) ने सम्पूर्ण विश्व में उथल – पुथल मचा दिया है। कोविड संक्रमण से बचने के लिए मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग, लॉकडाउन, सैनिटाइजर कई तमाम चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। तेजी से फैलती महामारी की चेन को रोकने के लिए 2020 में सम्पूर्ण विश्व में लॉकडाउन लगाया गया था। लोगों की नौकरियां, बच्चों की पढ़ाई, दुकानें, बाजार सभी लॉकडाउन का शिकार हो चले।

कहते हैं, इस दुनिया में ढूंढों तो मंजिल तक पहुंचने के कई रास्ते मिल जाते हैं। ठीक उसी तरह पूरे विश्व ने लॉकडाउन से इतर एक नया रास्ता खोज लिया था। वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लासेस, ऑनलाइन मार्केटिंग आदि। सबसे ज्यादा जिस कल्चर में तेजी आई है, वह है वर्क फ्रॉम होम (Work From Home)। जहां ऑनलाइन, गूगल मीट (Google Meet) या ज़ूम कॉल (Zoom Call) पर मीटिंग की जाती है। काम किया जाता है। 


मजेदार बात जानने योग्य यह है कि, ज़ूम कॉल या गूगल मीट पर ज्यादा वक्त बिताने के कारण दुनिया भर में लोगों में कॉस्मेटिक सर्जरी (Cosmetic Surgery) कराने की प्रवृति में सबसे ज्यादा इजाफा हुआ है। इसका कारण यह है कि, ज़ूम कॉल या गूगल मीट पर बढ़ती मीटिंग के कारण लोगों ने बहुत लंबे समय तक खुद को लगातार बड़े गौर से कैमरे में देखा है। आमतौर पर ऑफिस में लोग, मीटिंग में, लंच पर एक दूसरे से मिलते हैं। एक दूसरे को देखते हैं। लेकिन कॉन्फ्रेंस कॉल में लोग अपने आप को काफी नोटिस करते हैं। अपने आप को दूसरों से तुलना करते हैं। मजे की बात यह है कि, इसमें से आधे से ज्यादा संख्या पुरुषों की है। पहले पुरुषों के आंकड़े 10 प्रतिशत से भी नीचे हुआ करते थे। लेकिन अब इनकी संख्या में वृद्धि हुई है। 

ज़ूम कॉल या गूगल मीट पर बढ़ती मीटिंग के कारण लोगों ने बहुत लंबे समय तक खुद को लगातार बड़े गौर से कैमरे में देखा है। (Pexel)

पहले लोग कॉस्मेटिक सर्जरी से डरते थे। लेकिन अब सर्जरी कराने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। फ्रांस में प्लास्टिक सर्जरी में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। ब्रिटेन की एक कंपनी सेव – फेस के प्रमुख एश्टन कॉलिन्स बताते हैं कि, उनके साथ 852 कॉस्मेटिक सर्जन जुड़े हुए हैं। इस संक्रमण के दौरान सेव – फेस का व्यापार काफी बढ़ा है। इटली में भी प्लास्टिक सर्जरी एसोसिएशन के प्रमुख डॉ. पीयर फ्रांसिस्को सीरिलो बताते हैं कि, अकेले रोम में 12 प्रतिशत मामलों की बढ़ोतरी हुई है। 

यह भी पढ़ें :- शरीर के वजन व कोलेस्ट्रॉल के ‘खराब’ स्तर से हो सकता है कोविड का खतरा

न्यूयॉर्क में 57 साल की अभिनेत्री किम का कहना है कि, ज़ूम पर खुद को देखते हुए उन्हें एहसास हुआ कि, उनका वजन 10 पाउंड बढ़ गया है और उनकी स्किन भी खराब दिख रही है। तभी उन्होंने लॉकडाउन में ही अपना फेस लिफ्ट कराया। इसी तरह ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने पिछले एक साल में अपने फेस की सर्जरी कराई है। प्लास्टिक सर्जरी की मदद से लोग अपना चेहरा और शरीर बदल रहे हैं। इससे आगे चल कर उन लोगों में कई बीमारी का जन्म हो सकता है। ये सर्जरी हमारे शरीर और चेहरे दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

जिस वजह से मरीजों की तादाद धीरे – धीरे बढ़ती जाएगी। जो एक गंभीर चिंता का विषय है। लोगों को समझना चाहिए कि वह अपने आप को एक कैमरे में देख रहे हैं और केवल कैमरे के हिसाब से खुद में इतना बदलाव नहीं करना चाहिए। सर्जरी बिल्कुल नहीं करनी चाहिए। 

जरूरी है, अपने शरीर, चेहरे की देखभाल करना और इसका सबसे अच्छा उपाय व्यायाम (Exercise) है। व्यायाम से हम अपने शरीर का वजन भी कम कर सकते हैं। हमारी स्किन भी अच्छी हो सकती है। 7 – 8 घंटे लैपटॉप पर काम करने से दिमाग और आंखों को नुकसान पहुंचता है, उसे भी हम व्यायाम के माध्यम से शांत कर सकते हैं। एक कैमरे में सुंदर दिखने के लिए किसी को भी कॉस्मेटिक सर्जरी का सहारा नहीं लेना चाहिए। व्यायाम से खुद को बदलिए। करोड़ों आमदनी खर्च करके एक प्लास्टिक सर्जरी से नहीं।

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प्री-एक्लेमप्सिया गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद रक्तचाप में अचानक वृद्धि है। (Unsplash)

एक नए अध्ययन के अनुसार, जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान कोविड संकमित होती हैं, उनमें प्री-एक्लेमप्सिया विकसित होने का काफी अधिक जोखिम होता है। यह बीमारी दुनिया भर में मातृ और शिशु मृत्यु का प्रमुख कारण है। प्री-एक्लेमप्सिया गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद रक्तचाप में अचानक वृद्धि है। अमेरिकन जर्नल ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान सॉर्स कोव2 संक्रमण वाली महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के बिना प्रीक्लेम्पसिया विकसित होने की संभावना 62 प्रतिशत अधिक होती है।

वेन स्टेट यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में आणविक प्रसूति और आनुवंशिकी के प्रोफेसर रॉबटरे रोमेरो ने कहा कि यह जुड़ाव सभी पूर्वनिर्धारित उपसमूहों में उल्लेखनीय रूप से सुसंगत था। इसके अलावा, गर्भावस्था के दौरान सॉर्स कोव 2 संक्रमण गंभीर विशेषताओं, एक्लम्पसिया और एचईएलएलपी सिंड्रोम के साथ प्री-एक्लेमप्सिया की बाधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ जुड़ा है। एचईएलएलपी सिंड्रोम गंभीर प्री-एक्लेमप्सिया का एक रूप है जिसमें हेमोलिसिस (लाल रक्त कोशिकाओं का टूटना), ऊंचा लिवर एंजाइम और कम प्लेटलेट काउंट शामिल हैं। टीम ने पिछले 28 अध्ययनों की समीक्षा के बाद अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए, जिसमें 790,954 गर्भवती महिलाएं शामिल थीं, जिनमें 15,524 कोविड -19 संक्रमण का निदान किया गया था।

गर्भावस्था के दौरान संक्रमण के बिना प्रीक्लेम्पसिया विकसित होने की संभावना 62 प्रतिशत अधिक होती है। (Unsplash)

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।(PIB)

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बुधवार को दोहराया कि भारत सामूहिक स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए Covid-19 महामारी के खिलाफ एक निर्णायक और समन्वित प्रतिक्रिया देने के वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रहा है। कोविंद ने यह भी कहा कि दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत भारतीयों को अब तक 80 करोड़ से अधिक खुराक मिल चुकी है।

राष्ट्रपति भवन से एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को एक आभासी समारोह में आइसलैंड, गाम्बिया गणराज्य, स्पेन, ब्रुनेई दारुस्सलाम और श्रीलंका के लोकतांत्रिक गणराज्य के राजदूतों/उच्चायुक्तों से परिचय पत्र स्वीकार किए।

अपना परिचय पत्र प्रस्तुत करने वाले राजदूत निम्न हैं : महामहिम गुडनी ब्रैगसन, आइसलैंड के राजदूत, महामहिम मुस्तफा जवारा, गाम्बिया गणराज्य के उच्चायुक्त, महामहिम जोस मारिया रिडाओ डोमिंगुएज, स्पेन के राजदूत, महामहिम दातो अलैहुद्दीन मोहम्मद ताहा, ब्रुनेई दारुस्सलाम के उच्चायुक्त, महामहिम अशोक मिलिंडा मोरागोडा, श्रीलंका के लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य के उच्चायुक्त।


इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इन सभी राजदूतों को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी और उन्हें भारत में एक सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत के इन सभी पांच देशों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और भारत इनके साथ शांति, समृद्धि का एक समन्वित दृष्टिकोण साझा करता है।

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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