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देश

महामारी में लोगों की मदद के लिए बनाई ‘कोविड आर्मी फॉर इंदौर’

इंदौर में ''कोविड आर्मी फॉर इंदौर" बना ली गई है। इसमें आर्मी से जुड़े लगभग डेढ़ सौ वालंटियर कोरोना पीड़ितों की निशुल्क सेवा कर रहे हैं।

आर्मी से जुड़े लगभग डेढ़ सौ वालंटियर कोरोना पीड़ितों की निशुल्क सेवा कर रहे हैं। (IANS)

कोरोना (Corona) महामारी के बढ़ते संकट के बीच मदद करने वाले आगे आ रहे हैं। इंदौर में तो संक्रमित लोगों की मदद की खातिर ”कोविड आर्मी फॉर इंदौर” भी बना ली गई है। इसमें आर्मी से जुड़े लगभग डेढ़ सौ वालंटियर (Volunteer) कोरोना पीड़ितों की निशुल्क सेवा कर रहे हैं।

राज्य में सबसे ज्यादा संक्रमित जिलों में इंदौर की गिनती होती है । यहां शासन-प्रशासन से लेकर आम लोग भी कोरोना संक्रमितों के लिए और पीड़ितों की मदद में जुटे हुए हैं। यही पहल एक निजी बैंक के युवा चिन्मय बक्शी ने शुरू की है । वैसे तो बे बैंक में डाटा साइंटिस्ट हैं मगर उन्होंने पीड़ितों की मदद के लिए नवाचार किया है।


चिन्मय बताते हैं कि उनके मन में पीड़ितों की मदद का विचार आया उसके बाद उन्होंने वार रूम के नाम से इंटरनेट मीडिया पर कुछ ग्रुप बनाएं , जिसमें धीरे-धीरे डेढ़ सौ वॉलेंटियर जुट गए हैं। यह सभी लोग ऑक्सीजन (Oxygen), रेमडेसीविर इंजेक्शन (Remdesiveer Injection) और अन्य जरूरत की चीजों को उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं । जो समूह काम कर रहा है उसे नाम दिया गया है कोविड आर्मी फॉर इंदौर (Indore)।

धीरे-धीरे डेढ़ सौ वॉलेंटियर जुट गए हैं। यह सभी लोग ऑक्सीजन, रेमडेसीविर इंजेक्शन और अन्य जरूरत की चीजों को उपलब्ध कराने का काम कर रहे हैं । (Pexels)

कोरोना के गंभीर मरीजों को प्लाज्मा की जरूरत पड़ रही है तो ऐसे लोगों के लिए ‘ कोविड डेश इंडिया ओआरजी’ के नाम से एक वेबसाइट बनाई है । इस काम में अमीषा राजानी, नेहल दाया, चिराग जैन ,नमन जैन और अश्विन सैम्यूल बड़ी जिम्मेादरी निभा रहे हैं। बीते एक सप्ताह में इस साइट को लगभग डेढ़ लाख हिट्स मिल चुके हैं, जिसमें प्लाज्मा देने वाले और प्लाज्मा चाहने वाले दोनों रजिस्टर होते हैं। दोनों इसके अपडेट को देख भी सकते हैं। अब तक कई मरीजों को प्लाज्मा उपलब्ध कराया जा चुका है।

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कोरोना संक्रमितों के बीच काम करते हुए चिन्मय ने अनुभव किया है कि सबसे ज्यादा परेशानी लोगों का डर है। कई लोग ऐसे हैं जो ठीक भी हो चुके हैं और वह प्लाज्मा लेना चाहते हैं। इसके साथ ही अस्पताल जाने तक से डरते हैं उन्हें इस बात की चिंता रहती है कहीं दोबारा उन्हें कोरोना अपनी चपेट में न ले ले। (आईएएनएस-SM)

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