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दुनिया

कोविड को एक समय में एक देश से नहीं हराया जा सकता: गुटेरेस

"गुटेरेस ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा है कि "कोविड को एक समय में एक देश से नहीं हराया जा सकता है।"

दुनिया के भविष्य के लिए उपयुक्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता के लिए एक रूपरेखा की जरूरत है| (Wikimedia Commons)

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस (Antonio Guterres) ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता का आह्वान करते हुए कहा है कि “कोविड को एक समय में एक देश से नहीं हराया जा सकता है।”

सोमवार को जिनेवा में चल रही विश्व स्वास्थ्य सभा में एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा, ” विश्व के नेताओं को टीकों, परीक्षणों और उपचारों की समान पहुंच के लिए वैश्विक योजना के साथ तत्काल कदम उठाना चाहिए।”


समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने संयुक्त राष्ट्र (United Nation) प्रमुख के हवाले से कहा, “यह वैश्विक स्तर पर सबसे गरीब देशों में जीवन रक्षक उपकरणों को तैनात करने के लिए एसीटी-एक्सेलरेटर और कोवैक्स सुविधा के वित्तपोषण के साथ शुरू होगा।”

उन्होंने जी 20 टास्क फोर्स के लिए अपनी अपील दोहराई जो सभी देशों को वैक्सीन उत्पादन क्षमता, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), एसीटी-एक्सेलरेटर पार्टनर्स और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और अन्य प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाती है।

उन्होंने कहा कि टास्क फोर्स को स्वैच्छिक लाइसेंस और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से लेकर पेटेंट पूलिंग और बौद्धिक संपदा अधिकारों तक सभी विकल्पों की खोज करके विनिर्माण क्षमता को कम से कम दोगुना करने का लक्ष्य रखना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने महामारी के खिलाफ लड़ाई में वैश्विक एकजुटता का आह्वान किया है| (Wikimedia Commons)

महासचिव के अनुसार, ” जी 20 टास्क फोर्स को एसीटी-एक्सेलरेटर और इसकी कोवैक्स सुविधा का उपयोग करके समान वैश्विक वितरण को संबोधित करना चाहिए और इसे प्रमुख शक्तियों द्वारा उच्चतम स्तर पर सह-आयोजित किया जाना चाहिए, जो बहुपक्षीय प्रणाली के साथ-साथ अधिकांश वैश्विक आपूर्ति और उत्पादन क्षमता रखते हैं। ”

“कोविड-19 (Covid-!9) महामारी की शुरूआत से मैंने दो-गति वाली वैश्विक प्रतिक्रिया के खतरों की चेतावनी दी है। दुख की बात है कि जब तक हमने अभी कार्रवाई नहीं की तो हम एक ऐसी स्थिति का सामना करेंगे जिसमें अमीर देश अपने अधिकांश लोगों का टीकाकरण (Vaccination) करा कर अपनी अर्थव्यवस्थाओं को खोलेंगे, जबकि वायरस सबसे गरीब देशों में चक्कर लगाने और उत्परिवर्तित करके गहरी पीड़ा का कारण बनेगा।”

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“कोरोना के बढ़ते मामले सैकड़ों हजारों लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकते हैं और वैश्विक आर्थिक सुधार को धीमा कर सकते हैं।”

गुटेरेस ने कहा, “कोविड-19 से उबरने की हमारी कोशिश महिलाओं की प्रजनन सेवाओं से लेकर बच्चों के टीकाकरण और मानसिक स्वास्थ्य कवरेज तक अन्य आवश्यक स्वास्थ्य देखभाल की कीमत पर नहीं आनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि डब्ल्यूएचओ (WHO) को वैश्विक महामारी की तैयारियों के केंद्र में होना चाहिए, इसे टिकाऊ और अनुमानित संसाधनों की जरूरत है और इसे अपनी मांग के मुताबिक काम करने के लिए पूरी तरह से सशक्त होना चाहिए।

“दुनिया के भविष्य के लिए उपयुक्त अंतरराष्ट्रीय सहयोग और एकजुटता के लिए एक रूपरेखा की जरूरत है साथ ही स्थायी और अनुमानित वित्तपोषण के लिए नए समाधान और रोकथाम का पता लगाने और बीमारी के प्रकोप की प्रतिक्रिया के लिए राष्ट्रीय क्षमता बढ़ाने की जरूरत है।” (आईएएनएस-SM)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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