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टेक्नोलॉजी

कोरोनाकाल में रिमोट एक्सेस प्रोटोकॉल पर साइबर हमले बढ़े

कोरोना महामारी के समय में दुनियाभर में वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा, लेकिन इसके साथ ही बीते साल में रिमोट एक्सेस प्रोटोकॉल्स के खिलाफ साइबर हमले का सिलसिला भी काफी बढ़ा है। एक नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

कोरोना ( Corona )महामारी के समय में दुनियाभर में वर्क फ्रॉम होम ( work from home   )का चलन बढ़ा, लेकिन इसके साथ ही बीते साल में रिमोट एक्सेस प्रोटोकॉल्स के खिलाफ साइबर हमले का सिलसिला भी काफी बढ़ा है। एक नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। साइबर ( CYBER )सिक्योरिटी फर्म कैस्परस्काई के एक रिसर्च में दिखाया गया है कि घर से काम शुरू करने के बाद आरडीपी (रिमोट डेस्कटॉप प्रोटोकॉल) के खिलाफ ब्रूट फोर्स के अटैक ने आसमान छुआ है। यह शायद सबसे लोकप्रिय रिमोट डेस्कटॉप ( Desktop )  प्रोटोकॉल है, जिसका इस्तेमाल विंडोज या सर्वर्स के एक्सेस के लिए किया जाता है। साल 2020 के नवंबर में दुनियाभर में अटैक के 40.9 करोड़ की संख्या के साथ इसने एक नई ऊंचाई को छुआ है।

ब्रूट फोर्स अटैक में हमलावर अलग-अलग यूजरनेम और पासवर्ड का इस्तेमाल तब तक करते रहते हैं, जब तक कि उन्हें सही कॉम्बिनेशन और कॉर्पोरेट र्सिोसेज का एक्सेस नहीं मिल जाता है। कैस्परस्काई की टेलीमेट्री के मुताबिक, साल 2020 के मार्च में जब लॉकडाउन हुआ, उस वक्त आरडीपी के खिलाफ ब्रूट फोर्स अटैक की संख्या फरवरी में दर्ज 9.31 करोड़ से सीधा 27.74 करोड़ तक जा पहुंचा। यानी इसमें 197 फीसदी का इजाफा हुआ है।


कोरोना महामारी के समय में साइबर हमले बढ़े । ( आईएएनएस )

यह भी पढ़ें: ‘चीन की आक्रामकता ने रणनीतिक सहयोग करने के लिए खोलीं भारत की आंखें’

भारत के संदर्भ में फरवरी, 2020 में यह 13 लाख की संख्या से मार्च के महीने में 33 लाख तक पहुंच गया। अप्रैल से मासिक तौर पर यह कभी 30 करोड़ की संख्या से नीचे गया ही नहीं है। बीते साल नवंबर में 40.9 करोड़ की संख्या के साथ एक नया रिकॉर्ड कायम किया है।

ब्योरे के मुताबिक, भारत में जुलाई, 2020 में दर्ज हमले की सबसे अधिक संख्या 45 लाख आंकी गई। ( AK आईएएनएस )
 

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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