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व्यक्ति विशेष

दलाई लामा : धार्मिक स्वतंत्रता विचार की स्वतंत्रता ही अभिव्यक्ति है

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता वास्तव में विचार की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है और उन्होंने लोगों से दयालु, ईमानदार और सच्चे होने का आग्रह किया।

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा (wikimedia commnos)

तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता वास्तव में विचार की स्वतंत्रता की अभिव्यक्ति है और उन्होंने लोगों से दयालु, ईमानदार और सच्चे होने का आग्रह किया। गुरुवार को वाशिंगटन में एक अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता (आईआरएफ) शिखर सम्मेलन के समापन दिवस पर एक वीडियो संदेश में आध्यात्मिक नेता ने कहा, “आस्तिक परंपराएं एक निर्माता में विश्वास करती हैं, जबकि जैन धर्म, बौद्ध धर्म और अन्य जैसी गैर आस्तिक परंपराएं तर्क की एक अलग पंक्ति का पालन करती हैं। “

“आजकल हम धार्मिक विश्वास की संरचना और मूल्यों के पालन के बीच अंतर कर सकते हैं जो धर्म का सार है, ईमानदारी और सौहार्दता। गैर-विश्वासियों को भी ईमानदार और सच्चा होना चाहिए। “


उन्होंने कहा कि ” इन दिनों, मैं इस बात पर जोर देता हूं कि हमें यह समझने की जरूरत है कि पूरे सात अरब मनुष्य (आज जीवित) समान हैं। हमें मानवता की एकता और सम्मान की सराहना करने और एक-दूसरे की मदद करने की जरूरत है। गैर-विश्वासियों को भी ये दृष्टिकोण प्रासंगिक लगेगा।”

तीन दिवसीय आईआरएफ शिखर सम्मेलन, जो गुरुवार को संपन्न हुआ, उसने दुनिया भर में धार्मिक उत्पीड़न को संबोधित किया, जिसमें चीन के झिंजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र में मुस्लिम उइगरों को लक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।

आध्यात्मिक नेता दलाई लामा (Wikimedia Commons)

दलाई लामा ने कहा, “हम इंसानों में, जानवरों के विपरीत, बहुत तेज बुद्धि है। हमारे पास भविष्य की कल्पना करने की क्षमता भी है। यही वह संदर्भ है जिसमें हमारी विभिन्न धार्मिक परंपराएं विकसित हुईं। इसलिए, धार्मिक स्वतंत्रता वास्तव में एक अभिव्यक्ति है विचार की स्वतंत्रता की।”

“हमारी विभिन्न धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग दर्शन और अलग-अलग प्रथाएं हैं, लेकिन सभी एक ही संदेश देते है, प्रेम, क्षमा, संतोष और आत्म-अनुशासन का संदेश। यहां तक कि विश्वास नहीं करने वालों के लिए भी, ये गुण, संतोष, आत्म अनुशासन और अपने से ज्यादा दूसरों के बारे में सोचना बहुत प्रासंगिक हैं।”

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता ने कहा, “अतीत में, और दुर्भाग्य से आज भी, धर्मों को राजनीतिक कारणों से, या सत्ता की चिंता के कारण, उनके कुछ अनुयायियों के बीच लड़ाई के लिए प्रेरित किया गया है। हमें इस तरह के विचारों को अतीत में छोड़ देना चाहिए।”

बौद्ध भिक्षु, जिन्होंने अपने कई समर्थकों के साथ हिमालय की मातृभूमि से भागकर,भारत में तब शरण ली, जब चीनी सैनिकों ने 1949 में ल्हासा में प्रवेश किया और ल्हासा पर नियंत्रण कर लिया था, बौद्ध शिक्षाओं को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में लाने वाला प्रमुख आध्यात्मिक व्यक्ति हैं।

यह भी पढ़े : धर्म और विज्ञान का सत्ता संघर्ष है ‘प्रमेय’ .

वह निर्वासन में लगभग 1,40,000 तिब्बतियों के साथ रहते हैं, जिनमें से 1,00,000 से अधिक भारत में हैं। तिब्बत में 60 लाख से अधिक तिब्बती रहते हैं। (आईएएनएस-PS)

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5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीख़ की घोषणा के बाद कार्यकर्तओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पहला सवांद कार्यक्रम (Wikimedia Commons)


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने संसदीय क्षेत्र वारणशी के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से बातचीत की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भाजपा कार्यकर्ताओं से बात करते हुए कहा कि "उन्हें किसानों को रसायन मुक्त उर्वरकों के उपयोग के बारे में जागरूक करना चाहिए।"

नमो ऐप के जरिए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान बताया कि नमो ऐप में 'कमल पुष्प" नाम से एक बहुत ही उपयोगी एवं दिलचस्प सेक्शन है जो आपको प्रेरक पार्टी कार्यकर्ताओं के बारे में जानने और अपने विचारों को साझा करने का अवसर देता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नमो ऐप के सेक्शन 'कमल पुष्प' में लोगों को योगदान देने के लिए आग्रह किया। उन्होंने बताया की इसकी कुछ विशेषतायें पार्टी सदस्यों को प्रेरित करती है।

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हुदा मुथाना वर्ष 2014 में आतंकवादी समूह आईएस में शामिल हुई थी। घर वापसी की उसकी अपील पर यूएस कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया (Wikimedia Commons )

2014 में अमेरिका के अपने घर से भाग कर सीरिया के अतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट (आईएस) में शामिल होने वाली 27 वर्षीय हुदा मुथाना वापस अपने घर लौटने की जद्दोजहद में लगी है। हुदा मुथाना वर्ष 2014 में आतंकवादी समूह इस्लामिक स्टेट के साथ शामिल हुई साथ ही आईएस के साथ मिल कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आतंकवादी हमलों की सराहना की और अन्य अमेरिकियों को आईएस में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया था। हुदा मुथाना को अपने किये पर गहरा अफसोस है।

वर्ष 2019 में हुदा मुथाना के पिता ने संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के सुप्रीम कोर्ट में अमेरिका वापस लौटने के मामले पर तत्कालीन ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुक़द्दमा दायर किया था। संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) के सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बिना किसी टिप्पणी के हुदा मुथाना के इस मामले पर सुनवाई से इनकार कर दिया।

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