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मनोरंजन

इस तरह से एक्टिंग में आए डैनी हस्टन

अभिनेता-निर्देशक डैनी हस्टन का कहना है कि वह अधिक से अधिक फिल्मों का निर्देशन करना चाहते थे, लेकिन कैमरे के पीछे रहकर वह अपने लिए कभी एक खास मुकाम हासिल नहीं कर सके।

अभिनेता-निर्देशक डैनी हस्टन का कहना है कि वह अधिक से अधिक फिल्मों का निर्देशन करना चाहते थे. (Wikimedia Commons)

अभिनेता-निर्देशक डैनी हस्टन का कहना है कि वह अधिक से अधिक फिल्मों का निर्देशन करना चाहते थे, लेकिन कैमरे के पीछे रहकर वह अपने लिए कभी एक खास मुकाम हासिल नहीं कर सके। तभी उनके दोस्तों की तरफ से उन्हें किरदारों को निभाने के लिए ऑफर मिलने लगे और उन्होंने आखिरकार इन्हें स्वीकारना शुरू कर दिया। कॉन्टेंकटम्यू्जिक डॉट कॉम की रिपोर्ट के मुताबिक दिवंगत दिग्गज फिल्मकार जॉन हस्टन ने अपने बेटे डैनी ने कहा, “मैंने एक निर्देशक के तौर पर शुरूआत की थी। फिर मैंने अभिनय की तरफ रुख किया क्योंकि अपने द्वारा निर्देशित परियोजनाओं को मैंने कुछ खास सफलता हासिल करते नहीं देखा और तभी मेरे दोस्तों ने मुझे अपनी फिल्मों में कास्ट करना शुरू कर दिया।”

साल 2017 में आई उनके निर्देशन में बनी फिल्म ‘द लास्ट फोटोग्राफ’ का जिक्र करते हुए हस्टन ने इसे ‘सिंपल’ और ‘खूबसूरत’ करार दिया।


अभिनेता-निर्देशक डैनी हस्टन का कहना है कि वह अधिक से अधिक फिल्मों का निर्देशन करना चाहते थे.(Wikimedia Commons)

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मेट्रो के समाचार पत्र के साथ एक साक्षात्कार में कहा, “यह एक सरल और सुंदर कहानी है, जो मेरे दोस्त साइमन एस्टायर द्वारा लिखी गई है। एक तस्वीर जो मुख्य पात्र से चुरा ली गई जो बाद में स्पाईरल हो जाती है और कहानी के माध्यम से हमें पता चलता है कि फोटो का मतलब क्या है। मुझे लगता है कि हम सभी की पास ऐसी चीज होती है जिसके मायने होते हैं और उससे जुड़ी याद हमेशा हमारे साथ रहती है।”(आईएएनएस-PK)

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भारत, अमेरिका के विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर चर्चा की ( Pixabay )

भारत(india) और अमेरिका(America) के विशेषज्ञों ने शनिवार को कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज (सीसीयूएस) के माध्यम से जलवायु परिवर्तन (Environment change) से निपटने के लिए विभिन्न तकनीकों पर चर्चा करते हुए कहा कि वे 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में से पांच - जलवायु कार्रवाई, स्वच्छ ताकत, उद्योग, नवाचार और बुनियादी ढांचा, खपत और उत्पादन जैसे लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए साझेदारी की है। विज्ञान विभाग के सचिव एस.चंद्रशेखर ने कहा, "सख्त जलवायु व्यवस्था के तहत हम उत्सर्जन कटौती प्रौद्योगिकियों के पोर्टफोलियो के सही संतुलन की पहचान और अपनाने का एहसास कर सकते हैं। ग्लासगो में हाल ही में संपन्न सीओपी-26 में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के उल्लेखनीय प्रदर्शन के साथ-साथ महत्वाकांक्षाओं को सामने लाया। दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बावजूद हम जलवायु लक्ष्यों को पूरा करेंगे।"

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के कार्बन कैप्चर पर पहली कार्यशाला में अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने कहा, "पीएम ने हम सभी को 2070 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन राष्ट्र बनने को कहा है।" उन्होंने सीसीयूएस के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आरडी एंड डी की दिशा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की हालिया पहलों के बारे में भी जानकारी दी।

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वेल्लोर के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला ( Pixabay)

कोरोना के इस दौर में ऐप टेक्नॉलॉजी (App Technology) की पढ़ाई कई समस्याओं का समाधान कर रही है। ऐसा ही एक समाधान 10 वर्षीय छात्र कनिष्कर आर ने कर दिखाया है। कनिष्कर ने पेशे से वकील अपने पिता की मदद एक ऐप (App) बनाकर की। दस्तावेज संभालने में मददगार यह ऐप वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करता है। 10 वर्षीय कनिष्कर का यह ऐप अब उसके पिता ही नहीं बल्कि देश के कई अन्य वकील भी इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक उद्यम की शक्ल ले रहा है।

कनिष्कर अपने पिता को फाईलें संभालते देखता था, जो दिन पर दिन बढ़ती चली जा रही थीं। जल्द ही वह समझ गया कि उसके पिता की तरह ही अन्य वकील भी थे, जो इसी समस्या से पीड़ित थे। इसलिए जब कनिष्कर को पाठ्यक्रम अपने कोडिंग के प्रोजेक्ट के लिए विषय चुनने का समय आया, तो उसने कुछ ऐसा बनाने का निर्णय लिया, जो उसके पिता की मदद कर सके। वेल्लोर (Vellore) के इस 10 वर्षीय छात्र ने अपनी लगन से वकीलों के लिए ई-अटॉर्नी नामक एक ऐप बना डाला। इस ऐप का मुख्य उद्देश्य वकीलों और अधिवक्ताओं को अपने क्लाईंट के एवं काम से संबंधित दस्तावेज संभालने में मदद करना है। इस ऐप द्वारा यूजर्स साईन इन करके अपने काम को नियोजित कर सकते हैं और क्लाईंट से संबंधित दस्तावेज एवं केस की अन्य जानकारी स्टोर करके रख सकते हैं। इस ऐप के माध्यम से यूजर्स सीधे क्लाईंट्स से संपर्क भी कर सकते हैं। जिन क्लाईंट्स को उनके वकील द्वारा इस ऐप की एक्सेस दी जाती है, वो भी ऐप में स्टोर किए गए अपने केस के दस्तावेज देख सकते हैं।

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डॉ. मुनीश रायजादा ने इस वेब सीरीज़ के माध्यम से आम आदमी पार्टी में हुए भ्रस्टाचार को सामने लाने का प्रयास किया है

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डॉ.मुनीश रायजादा ने फोन पर आईएएनएस से बात करते हुए बताया कि, " मंच इस वेब सीरीज का प्रचार यह कहकर नहीं कर रहा था कि यह एक राजनीतिक वेब सीरीज है, और मैंने सोचा कि मैं इस वेब सीरीज को बड़े पैमाने में दर्शकों तक कैसे ले जा सकता हूँ फिर मैंने यूट्यूब के बारे में सोचा।" यह वेब सीरीज यूट्यूब पर 17 जनवरी को रिलीज़ किया गया।

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