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कोविड के अलावा दिल्ली को वेक्टर जनित बीमारियों के खिलाफ कमर कसने की जरूरत

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश ने कहा कि 30 मई से वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए एक अभियान शुरू किया जाएगा।

डेंगू के 25 मामले कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है| (Pixabay)

राष्ट्रीय राजधानी जहां पहले से ही कोविड-19 (Covid-19) महामारी की दूसरी घातक लहर से जूझ रही है, वहीं नागरिक अधिकारियों द्वारा वेक्टर जनित (डेंगू (Dengu), मलेरिया (Malaria) और चिकनगुनिया (Chikungunya) जैसी बीमारी) बीमारियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी दिल्ली के लोगों के लिए एक और चुनौती साबित हो सकती है।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के मुताबिक, शहर में अब तक डेंगू के 25 मामले सामने आए हैं, जिनमें फरवरी में डेंगू के 2 मामले, मार्च में 5, अप्रैल में 10 और 22 मई तक 8 मामले दर्ज किए गए हैं।


2013 के बाद से जनवरी-मई की अवधि में राजधानी में डेंगू के मामलों की यह सबसे अधिक संख्या है। नागरिक अधिकारियों ने दावा किया है कि हालांकि राजधानी में इस साल अब तक डेंगू के कारण किसी भी मौत की सूचना नहीं मिली है।

इसी अवधि में डेंगू के अलावा मलेरिया के 8 और चिकनगुनिया के 4 मामले भी दर्ज किए गए हैं। आमतौर पर जुलाई से नवंबर के बीच दिल्ली में वेक्टर जनित बीमारियों के मामले सामने आते हैं। यह अवधि मध्य दिसंबर तक बढ़ भी सकती है।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) (MCD) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से मई के बीच 2016 में डेंगू के कुल 10 मामले दर्ज किए गए थे, 2017 में 19 मामले, 2018 में 15 मामले, 2019 में 11 और 2020 में 18 मामले दर्ज किए गए थे।

वेक्टर जनित बीमारियों के उभरने के साथ, दिल्ली (Delhi) के नागरिक अधिकारियों (उत्तर, पूर्व और दक्षिण) ने कहा कि उन्होंने डेंगू और ऐसी अन्य बीमारियों के प्रसार के खिलाफ लड़ाई के लिए कमर कस ली है।

उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश ने कहा कि 30 मई से वेक्टर जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए एक अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के लार्वा की जांच करने के साथ-साथ नागरिकों को जागरूक करने के लिए घर-घर जाएंगे।

बड़े नालों में फॉगिंग व मच्छर रोधी दवा का छिड़काव किया जाएगा। (Pixabay)

उन्होंने कहा कि दूसरे चरण में जलाशयों में गंबुजिया मछली छोड़ने का कार्य किया जाएगा, ताकि जैविक रूप में मच्छरों के लार्वा को खत्म किया जा सके। तीसरे चरण में बड़े नालों में फॉगिंग व मच्छर रोधी दवा का छिड़काव किया जाएगा।

हालांकि मच्छरों (Mosquitoes) के लार्वा के प्रजनन की जांच के लिए घर-घर जाना इस समय नागरिक कर्मचारियों के लिए आसान नहीं होने वाला है, जब लोग कोविड-19 महामारी के कारण डरे हुए हैं और बाहरी लोगों को प्रवेश की अनुमति नहीं दे रहे हैं।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के एक वरिष्ठ चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. लल्लन वर्मा ने कहा कि घरों में मच्छरों के लार्वा की जांच करना नागरिक कर्मचारियों के लिए एक बहुत ही चुनौतीपूर्ण काम साबित हो रहा है, क्योंकि स्थिति पिछले साल से बहुत अलग है।

उन्होंने कहा, विभिन्न चुनौतियों के बावजूद, एसडीएमसी के कार्यकर्ता लोगों को जागरूक करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन नागरिक प्राधिकरण अकेले वेक्टर जनित बीमारियों को रोकने के लिए सब कुछ नहीं कर सकते हैं, इसलिए इसके लिए लोगों की भागीदारी बहुत महत्वपूर्ण है। लोगों को अपने घरों के अंदर पानी का भंडारण न हो, यह सुनिश्चित करना होगा।

यह भी पढ़ें :- कोरोना से मौत के बाद बॉडी में एक्टिव नहीं रहते वायरस : स्टडी

उन्होंने कहा कि डेंगू के 25 मामले कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, लेकिन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है और उन्हें खुद को वेक्टर जनित बीमारियों से बचाने के लिए नागरिक अधिकारियों की सलाह का पालन करना चाहिए।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम (ईडीएमसी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, स्वास्थ्य कार्यकर्ता आवासीय कॉलोनियों और नालों में मच्छर रोधी रसायन का छिड़काव कर रहे हैं। स्वास्थ्य कर्मियों की भी कमी है, क्योंकि वही कर्मचारी टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य प्रबंधन कार्य के लिए भी तैनात हैं। (आईएएनएस-SM)

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