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टेक्नोलॉजी

दिल्ली विधानसभा की समिति करेगी फेसबुक मामले पर सुनवाई

भड़काऊ पोस्ट और हेट स्पीच के मामलों को नज़रअंदांज़ करने का आरोप फेसबुक पर लगाया जा रहा है। जिस पर दिल्ली विधानसभा की समिति सुनवाई करेगी।

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक। (Pixabay)

दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सदभाव समिति को शिकायत मिली है कि फेसबुक द्वारा जानबूझ कर भड़काऊ और घृणा फैलाने वाले पोस्ट को नजरअंदाज किया गया है। विधानसभा समिति के मुताबिक ऐसे कृत्य स्वयं फेसबुक की पॉलिसी के खिलाफ है। दिल्ली विधानसभा की समिति को मिली शिकायतों में अमेरिका स्थित ऑनलाइन न्यूज प्लेटफार्म ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में 14 अगस्त 2020 को प्रकाशित न्यूज के हवाले से किसी बड़े साजिश का आशंका व्यक्त की गई है। इसमें फेसबुक के अधिकारियों के शामिल होने का अंदेशा जताया गया है।

ऑनलाइन न्यूज प्लेटफार्म ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’। (Pixabay)


दिल्ली विधानसभा की शांति एवं सदभाव समिति के चेयरमैन राघव चड्ढा ने कहा, “इन शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि घृणित और भड़काऊ पोस्ट के खिलाफ आंतरिक पॉलिसी होने बावजूद इन पर फेसबुक द्वारा अंकुश नहीं लगाया गया। फेसबुक इस तरह की पोस्ट को लेकर अपनी आंखें बंद किए हुए है। इस तरह के पोस्ट न केवल सामुदायों के बीच में घृणा पैदा करते हैं, बल्कि समाज में दंगा और हिंसा की स्थिति पैदा करने में भी सक्षम हैं।”

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राघव चड्ढा ने कहा, “शिकायतकर्ताओं ने खासतौर पर द वॉल स्ट्रीट जर्नल के आर्टिकल ‘फेसबुक हेट स्पीच रूल्स कोलाइड विद इंडियन पोलिटिक्स’ का जिक्र किया है। जिसमें अंखी दास द्वारा जो फेसबुक की पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर हैं, उन्होंने अपनी पॉलिसी को नजरअंदाज करते हुए ग्रुपों पर किए गए भड़काऊ पोस्ट, जो फेसबुक के आंतरिक नियमों के अंतर्गत हिंसा को बढ़ावा देने की श्रेणी में आते थे, उसे जानबूझ कर नजरअंदाज किया गया।”

दिल्ली विधानसभा की इस समिति का गठन इसी साल किया गया है। दिल्ली में शांति और सुरक्षा को बनाए रखने के मौलिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए दिल्ली विधानसभा की इस कमेटी द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि पूरे मामले की तह तक जाया जाएगा। इसके लिए सभी आरोपों की जांच की जाए।

फेसबुक कर रहा भड़काऊ पोस्ट को नज़रअंदाज़। (Pixabay)

राघव चड्ढा ने कहा, “इस कमेटी ने शिकायतों की जांच के बाद प्रथम दृष्टया यह पाया है कि फेसबुक अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए आरोप काफी संगीन है, जिसकी यदि जांच नहीं की गई, तो इसके काफी दुष्प्रभाव परिणाम सामने आ सकते हैं। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए शिकायतकर्ता, और गवाहों को कमेटी के सामने उपस्थित होने का नोटिस जारी किया है।”

दिल्ली विधानसभा की समिति के मुताबिक परांजॉय गुहा ठाकुर्ता को मंगलवार यानी 25 अगस्त के दिन कमेटी के सामने को औपचारिक तौर पर उपस्थित होने के लिए समन जारी किया गया है। गुहा प्रख्यात पत्रकार और ‘द रियल फेस ऑफ फेसबुक इन इंडिया’ के सह लेखक हैं। उन्हें विशेषज्ञ के तौर पर फेसबुक के खिलाफ शिकायतों में कथित आरोपों पर अपनी राय देने के लिए बुलाया गया है। समिति ने निखिल पाहवा को भी समन किया है। वह डिजिटल राइट्स एक्टिविस्ट हैं।

विधानसभा समिति ने फैसला किया है कि पूरी कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग की जाएगी और मीडिया को भी मौजूद रहने की इजाजत दी जाएगी।(आईएएनएस)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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8 जनवरी को चुनाव आयोग(Election Commission of India) द्वारा जारी के गए 5 राज्यों के विधान सभा चुनावों(Vidhan Sabha Election 2022) के तारिखों के ऐलान से चुनावी गहमा-गहमी चरम पर है। आपको बता दें कि वर्ष 2022 में 5 अहम राज्यों में विधान सभा चुनाव आयोजित होने जा रहे हैं। यह राज्य हैं उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखण्ड, गोवा एवं मणिपुर। साथ ही उत्तर प्रदेश(Uttar Pradesh) में होने जा रहे चुनाव को 7 चरणों में बांटा गया है, मणिपुर 2 चरणों में और गोवा, उत्तराखण्ड, पंजाब(Punjab) में चुनाव 1 चरण में आयोजित किया जाएगा। चुनाव तारीखों के घोषित होने बाद सभी राजनीतिक दल एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं और हर वह हथकंडा अपना रहे हैं जिससे मतदाता आकर्षित हों। साथ ही अब यह भी संभावना अधिक है कि इस बीच चुनावी जमाखोरी बढ़ जाएगी।

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