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वैधानिक प्रक्रिया को अपनाए बगैर बच्चों को गोद लेने वालों पर होगी कार्रवाई, हो सकती है जेल

केन्द्रीय बाल संरक्षण आयोग द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि वैधानिक प्रकिया अपनाए बिना निराश्रित बच्चों को गोद लेने पर छह माह का कारावास अथवा 10 हजार रुपए जुमार्ना या दोनों सजा हो सकती है।

निराश्रित बच्चे ( सांकेतिक फोटो- wikimedia commons)

कोरोना संक्रमण के चलते कई बच्चों ने अपने पालकों को खोया है। ऐसे निराश्रित बच्चों को गैर सरकारी संगठन बिना वैधानिक प्रक्रिया को पूरा किए गोद दे रहे है। यह मामले सामने आने पर केंद्रीय बाल संरक्षण आयोग ने हिदायत दी है कि वैधानिक प्रक्रिया को अपनाए बगैर बच्चों को गोद लेने वालों पर कार्रवाई होगी। उन्हें जेल व जुर्माने की सजा तक हो सकती है। केन्द्रीय बाल संरक्षण आयोग द्वारा यह स्पष्ट किया गया है कि वैधानिक प्रकिया अपनाए बिना निराश्रित बच्चों को गोद लेने पर छह माह का कारावास अथवा 10 हजार रुपए जुमार्ना या दोनों सजा हो सकती है।

बिना वैधानिक प्रक्रिया के बच्चों को गोद लेने पर होगी सजा l (सांकेतिक फोटो- wikimedia commons)


आयोग द्वारा कहा गया है कि पूर्व के माह में शिकायतें प्राप्त हुई हैं जिनमें यह आरोप लगाया गया है कि कई गैर सरकारी संगठन उन बच्चों के बारे में विज्ञापन प्रसारित कर रहे हैं, जो अनाथ हो गए हैं अथवा जिन्होंने कोविड संक्रमण के फलस्वरूप अपने परिवार को खो दिया है। गोद लेना व देना एक वैधानिक प्रकिया है, जिसका पालन किया जाना अनिवार्य है। गोद लेने व देने के लिए संपूर्ण भारत में एकमात्र एवं एकीकृत प्रावधान किया गया है जिसे केन्द्रीय दस्तक ग्रहण अधिकरण (कारा) कहा जाता है।

यह भी पढ़े: मिशन इंद्रधनुष से भारत में बाल टीकाकरण दरों में सुधार किया.

आयोग ने कहा है कि ऐसे निराश्रित व जरूरतमंद बच्चों के संबंध में सोशल मीडिया पर पोस्ट डालने से बचें एवं उसकी जानकारी चाइल्ड लाइन 1098, स्थानीय पुलिस, विशेष दत्तक ग्रहण अभिकरण, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई अथवा कारा को दें। (आईएएनएस-PS)

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कारवार नौसेना बेस पर।(PIB)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि भारत और चीन के बीच लद्दाख में सैन्य गतिरोध के बीच गलवान गतिरोध के दौरान नौसेना की अग्रिम तैनाती ने देश की मंशा और तत्परता को दिखाया है। भारत और चीन के बीच तनाव के मद्देनजर भारतीय नौसेना की सक्रिय तैनाती पर राजनाथ सिंह का यह पहला आधिकारिक शब्द है। राजनाथ सिंह कोच्चि में देश के स्वदेशी विमानवाहक पोत पर काम का निरीक्षण करने के बाद बोल रहे थे। उन्होंने कहा, “गलवान गतिरोध के दौरान नौसेना की सक्रिय अग्रिम तैनाती ने हमारे इरादे का संकेत दिया कि हम शांति चाहते हैं लेकिन किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि नौसेना किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार है। स्वदेशी विमान वाहक पर किए जा रहे कार्यों की प्रत्यक्ष रूप से समीक्षा करना खुशी की बात है, जो भारत का गौरव है और आत्मानिर्भर भारत का एक चमकदार उदाहरण है। आपको बता दें कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कारवार और कोच्चि के दो दिवसीय दौरे पर हैं।

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केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह(साभार: PIB)

रक्षा क्षेत्र में सुधारों पर भरोसा जताते हुए रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ये सुधार आने वाले समय में भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाएंगे। एक ई-बुकलेट के विमोचन के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह पुस्तिका रक्षा क्षेत्र को मजबूत और अधिक कुशल बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार के संकल्प का प्रतिबिंब है। ई-बुकलेट, जिसका शीर्षक 20 रिफॉर्म्स इन 2020 है, मंत्रालय द्वारा नीतिगत बदलाव, नवाचार और डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से सशस्त्र बलों के अधिक सामंजस्य और आधुनिकीकरण के लिए वर्ष में किए गए रक्षा सुधारों का एक संक्षिप्त अवलोकन प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह ई-बुकलेट नीति परिवर्तन, नवाचार और डिजिटलीकरण के माध्यम से सशस्त्र बलों में आधुनिकीकरण लाने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा साल 2020 में किए गए सुधारों का एक संक्षिप्त अवलोकन है।

राजनाथ सिंह ने भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति और सैन्य मामलों के विभाग (डीएमए) के निर्माण का उल्लेख सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख फैसलों में से एक के रूप में किया। सीडीएस का पद सशस्त्र बलों के बीच दक्षता और समन्वय बढ़ाने और दोहराव को कम करने के लिए बनाया गया है, जबकि बेहतर नागरिक-सैन्य एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए डीएमए की स्थापना की गई है। बयान में यह भी कहा गया कि नई प्रौद्योगिकी के विकास की दिशा में यह एक अभूतपूर्व प्रयास है। इसके अलावा कहा गया कि निजी क्षेत्र के साथ बढ़ी हुई साझेदारी से रक्षा निर्यात में पर्याप्त वृद्धि हुई है।

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