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‘पॉक्सो एक्ट में स्किन-टू-स्किन टच जरूरी नहीं’: सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज किया बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया है , जिसमें यह कहा गया था कि पोक्सो एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध तब बनता है , जब आरोपी ने पीड़िता को स्किन-टू-स्किन टच किया हो।

सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज किया बॉम्बे हाई कोर्ट का फैसला । (Wikimedia Commons)

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (18 नवंबर 2021) को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया है , जिसमें यह कहा गया था कि पोक्सो एक्ट के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध तब बनता है , जब आरोपी ने पीड़िता को स्किन-टू-स्किन टच किया हो। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को बदलते हुए कहा है कि पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) में स्किन टू स्किन टच जरूरी नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यौन उत्पीड़न का सबसे महत्वपूर्ण घटक यौन इरादा है, न कि बच्चे के साथ त्वचा से त्वचा का टच होना। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता है कि यौन उत्पीड़न की मंशा से कपड़े के ऊपर से बच्चे के संवेदनशील अंगों को छूना यौन शोषण नहीं है।


दरअसल पूरा मामला दिसंबर 2016 का है, जब 39 वर्षीय आरोपी सतीश बंदू ने 12 साल की बच्ची को खाने के लिए कुछ देने का झांसा देकर उसके ब्रेस्ट को दबाया और उसकी सलवार निकालने की कोशिश की।

मामला बॉम्बे हाई कोर्ट में गया तो एचसी ने कहा कि "त्वचा से त्वचा के संपर्क" के बिना नाबालिग के स्तन को टटोलना यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता है, जैसा कि पॉक्सो (POCSO Act) अधिनियम के तहत परिभाषित किया गया है। चूंकि आदमी ने बिना कपड़े निकाले बच्चे को टटोला, इसलिए अपराध को यौन हमला नहीं कहा जा सकता है और इसके बजाय, आईपीसी की धारा 354 के तहत एक महिला के साथ छेड़छाड़ का अपराध बनता है।

शीर्ष अदालत ने अटॉर्नी जनरल और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अलग-अलग अपीलों पर सुनवाई के दौरान 27 जनवरी को बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी और अब इस फैसले को रद्द करते हुए आरोपी को 3 साल की सजा सुनाई है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल , जिन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ द्वारा पारित इस फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की थी , ने कहा , "अगर कल, कोई व्यक्ति सर्जिकल दस्ताने पहनता है और एक महिला के पूरे शरीर को महसूस करता है, तो उसे इस फैसले के अनुसार यौन उत्पीड़न के लिए दंडित नहीं किया जाएगा। यह निंदनीय आदेश है। आरोपी ने सलवार को नीचे लाने की कोशिश की और फिर भी जमानत दे दी गई... न्यायाधीश ने स्पष्ट रूप से दूरगामी परिणाम नहीं देखे। " उन्होंने यह भी कहा कि "एक नाबालिग के स्तन को बिना चोटी को हटाए भी छूना अधिनियम के तहत यौन उत्पीड़न का अपराध है। "


rape cases in india , supreme court , POCSO Act 2020 में हर रोज 77 महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुए। [Pixabay]

आइये अब जानते हैं क्या है पोक्सो (POCSO Act) एक्ट।

POCSO एक्ट का पूरा नाम '' प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रेन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट '' है। हिंदी में इसे "लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012" भी कहते हैं।

2012 में बाल विकास मंत्रालय द्वारा भारत में यौन शोषण, यौन उत्पीड़न और पोर्नोग्राफी से 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा के लिए कानूनी प्रावधानों को मजबूत करने के उद्देश्य से यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (POCSO Act) की स्थापना की गई है। इस कानून के तहत नाबालिग बच्चों के साथ होने वाले यौन अपराध और छेड़छाड़ के मामलों में सख्त कार्रवाई की जाती है। इस अधनियम में यह भी कहा गया है कि अगर कोई विशेष परिस्थिति ना हो तो इसके केस का निपटारा एक साल में किया जाना चाहिए।

देश में बच्चियों के साथ बढ़ते आपराधिक मामलों को देखते हुए हाल ही में भारत सरकार द्वारा 'पाक्सो ऐक्ट-2012' में बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब 12 साल तक की बच्ची से रेप के दोषियों को मौत की सजा मिलेगी।

आपको बता दें की 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को देश के हर जिले में विशेष पोक्सो कोर्ट बनाने का आदेश दिया था। इन अदालतों के लिए फंड केंद्र सरकार देती है।

यह भी पढ़ें : जानें कौन थीं रानी कमलापति ,जिनके नाम पर अब हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम रखा गया है

2020 में बलात्कार के 28 हजार से ज्यादा मामले दर्ज

भारत में अक्सर बलात्कार के मामले में शिकायत दर्ज कराने के बजाय छिपा लिए जाते हैं। वजह है रेप विक्टिम के प्रति हम भारतीयों का व्यवहार। हमारे देश में बलात्कार होने पर सबसे पहले विक्टिम को ही दोषी ठहराया जाता है। कभी उनके कपड़ों पर सवाल उठाए जाते हैं , तो कभी उनके व्यवहार पर। इसके अलावा कई बार यह भी देखा गया है की पीड़ितों को पुलिस थाने में प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है और उनपर केस वापस लेने के लिए दबाव बनाया जाता है।

स्टेटिस्टा रिसर्च डिपार्टमेंट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक , साल 2020 में , भारत में बलात्कार के 28 हजार से ज्यादा मामले सामने आए। जबकि 2019 में भारत में कुल 32 हजार रेप के मामले दर्ज हुए थे।

एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार , 2020 में हर रोज 77 महिलाओं के साथ दुष्कर्म हुए, जिसमे सबसे ज्यादा मामले (5,310 ) अकेले राजस्थान से आए। वहीं उत्तर प्रदेश से 2,769 , मध्य प्रदेश से 2,339 और महाराष्ट्र से 2,061 बलात्कार के मामले सामने आए हैं।

Input : Various Sources; Edited By: Manisha Singh

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