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देश

जानें कौन थे जनरल बिपिन लक्ष्मण सिंह रावत

CDS जनरल बिपिन लक्ष्मण रावत (General Bipin Laxman Singh Rawat) ने 11वीं गोरखा राइफल की पांचवी बटालियन से दिसंबर 1978 में करियर की शुरुआत की थी।

सीडीएस जनरल बिपन रावत का हेलीकाप्टर दुर्घटना में आज निधन हो गया। (NewsGram Hindi)

8 दिसंबर 2021 (बुधवार) की दोपहर एक दुर्घटना की खबर ने पूरे देश में हलचल मचा दी। दोपहर करीब 12 बजकर 20 मिनट पर तमिलनाडु में कुन्नूर के जंगलों में सेना का Mi -17V5 हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया । इसमें चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत (Bipin Rawat) और उनकी पत्नी मधुलिका समेत 14 लोग सवार थे, जिनमें से 13 की मौत हो गयी और 1 की हालत अभी गंभीर बताई जा रही है। मरने वालों में जनरल बिपिन रावत और उनकी पत्नी भी शामिल थे। हादसे की वजह खराब मौसम और कम विजिबिलिटी को माना जा रहा है। जनरल बिपिन रावत की मौत से हर कोई स्तब्ध है। उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) और राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने भी दुख जाहिर किया है।

कौन थे जनरल बिपिन लक्ष्मण सिंह रावत ?
जनरल बिपिन लक्ष्मण सिंह रावत (Bipin Laxman Singh Rawat) देश के पहले चीफ ऑफ़ डिफेन्स स्टाफ थे। उनका जन्म 16 मार्च, 1958 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के चौहान राजपूत परिवार में हुआ। कई पीढ़ियों से उनका परिवार भारतीय सेना में सेवा दे रहा है। उनके पिता लक्ष्मण सिंह रावत भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट जनरल थे। जनरल रावत की मां भी किसी आम घराने से नहीं थीं। वो उत्तरकाशी के पूर्व विधायक किशन सिंह परमार की बेटी थी।
शिक्षा

रावत ने देहरादून के कैंबरीन हॉल स्कूल और शिमला के सेंट एडवर्ड स्कूल से शुरूआती शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून ज्वाइन कर लिया। यहां उन्हें 'सोर्ड ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया गया। वे फोर्ट लीवनवर्थ, अमेरिका में डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंगटन और हायर कमांड कोर्स के ग्रेजुएट भी रहे। उन्होंने मद्रास यूनिवर्सिटी से डिफेंस स्टडीज में एमफिल, मैनेजमेंट में डिप्लोमा और कम्प्यूटर स्टडीज में भी डिप्लोमा किया। 2011 में, उन्हें सैन्य-मीडिया सामरिक अध्ययनों (Military-Media strategic studies) पर रिसर्च के लिए चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी, मेरठ की ओर से '' डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी '' से सम्मानित किया गया।


करियर
रावत (Bipin Rawat) ने 11वीं गोरखा राइफल की पांचवी बटालियन से दिसंबर 1978 में करियर की शुरुआत की थी, जो उनके पिता की ही इकाई थी। मेजर के रूप में उन्होंने उरी , जम्मू और कश्मीर में एक कंपनी की कमान संभाली। ब्रिगेडियर के पद पर पदोन्नत होकर रावत ने सोपोर में राष्ट्रीय राइफल्स के 5 सेक्टर की भी कमान संभाली। 17 दिसंबर 2016 को, भारत सरकार द्वारा उन्हें 27 वें थल सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया। इसके बाद 30 दिसंबर 2019 को, 61 वर्ष की उम्र में उन्हें भारत के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) के रूप में नियुक्त किया गया और 1 जनवरी 2020 से उन्होंने पदभार ग्रहण किया। वे 65 साल की उम्र तक इस पद पर रहने वाले थे। उन्हें पूर्वी सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा, कश्मीर घाटी और पूर्वोत्तर में कामकाज का भी अच्छा अनुभव रहा।
जनरल रावत ने ब्रिगेड कमांडर, जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ (GOC-in-C) साउथर्न कमांड , जनरल स्टाफ ऑफिसर ग्रेड 2, मिलिट्री ऑपरेशन्स डायरेक्टोरेट, कर्नल मिलिट्री सेक्रेटरी एंड डिप्टी मिलिट्री सेक्रेटरी, सीनियर इंस्ट्रक्टर इन जूनियर कमांड विंग, कमांडर यूनाइटेड नेशन्स पीसकीपिंग फोर्स मल्टीनेशनल ब्रिगेड, वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ, आर्मी चीफ और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ के रूप में देश की सेवा की।
जनरल रावत को मिले सम्मान

लगभग 43 वर्षों के अपने करियर के दौरान, सेना में अपनी उत्कृष्ट सेवा के लिए जनरल रावत को परम विशिष्ट सेवा मेडल, उत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल, युद्ध सेवा मेडल, सेना मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था।

पहले भी क्रैश हुआ है रावत का हेलिकॉप्टर

बिपिन रावत (Bipin Rawat) एक बार पहले भी हेलिकॉप्टर क्रैश के शिकार हो चुके हैं। फरवरी 2015 में, जब रावत लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर थे, उनका चीता हेलिकॉप्टर नागालैंड के दीमापुर में क्रैश हो गया था।

रावत का भारतीय सेना में योगदान

जनरल बिपिन रावत भारतीय सेना को प्रोफेशनल आर्मी बनाने के लिए जाने जाते थे। सेना के आधुनिकीकरण में भी उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। उन्होंने सेना में महिलाओं की भर्ती को लेकर भी आवाज उठायी।

यह भी पढ़ें : नहीं रहे सीडीएस जनरल बिपिन रावत

साल 2015 में मणिपुर में हमारी सेना पर आतंकी हमला हुआ, जिसमें भारत के 18 सैनिक शहीद हो गए। 15 जवानों को गंभीर चोटें भी आयीं। भारतीय सेना ने तब इसके जवाब में सीमा पार ऑपरेशन चलाया और NSCN आतंकी ग्रुप के 60 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया। जनरल रावत ने ही इस आतंकवाद विरोधी अभियान की निगरानी की थी।

इसके अलावा जब भारत ने सितंबर 2016 में उरी में एक सैन्य शिविर पर हुए आतंकी हमले के खिलाफ जवाबी कार्रवाई में नियंत्रण रेखा पार करके पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की थी, तब वह थल सेनाध्यक्ष थे। बता दें की इस आतंकी हमले में हमारे 19 सैनिक मारे गए थे।

Input: Various sources; Edited By: Manisha Singh

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