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कॉलेज, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय बंद होने के बावजूद बरकरार है दिव्यांग छात्रों का हौसला

विश्वविद्यालय बंद, कॉलेज बंद, प्रयोगशालाएं बंद, लाइब्रेरी भी बंद, कोचिंग, ट्रेनिंग सब कुछ बंद। ऐसे में जहां सामान्य छात्रों के लिए इस स्थिति से उबर पाना मुश्किल हो रहा है

ऑन-लाइन मोड स्टडी फॉर स्टूडेंट्स(pixabay)

 विश्वविद्यालय बंद, कॉलेज बंद, प्रयोगशालाएं बंद, लाइब्रेरी भी बंद, कोचिंग, ट्रेनिंग सब कुछ बंद। ऐसे में जहां सामान्य छात्रों के लिए इस स्थिति से उबर पाना मुश्किल हो रहा है, वहीं इस स्थिति ने दिव्यांग छात्रों की मुश्किलें और अधिक बढ़ाई हैं। हालांकि कोरोना को ध्यान में रखते हुए दिल्ली विश्वविद्यालय ने पढ़ाई जारी रखने और परीक्षा देने में दिव्यांग छात्रों को कुछ अतिरिक्त सहूलियतें देने का अहम निर्णय लिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग दो हजार छात्र,300 शिक्षक व 200 दिव्यांग कर्मचारी है। कई कॉलेजों में उनके लिए चलने के लिए टैक्टाइल फ्लोरिंग, रैम्प, लिफ्ट, ब्रेल चिन्ह, ब्रेल प्रिंटर आदि नहीं है। हालांकि डीयू के करीब एक दर्जन कॉलेजों में दिव्यांग छात्रों से संबंधित यह सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनमें हंसराज कॉलेज ,खालसा कॉलेज , माता सुंदरी कॉलेज , मिरांडा हाउस ,सोशल वर्क डिपार्टमेंट, सोशल साइंस फैकल्टी,लक्ष्मी बाई कॉलेज, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आई.पी कॉलेज, लेडी श्रीराम कॉलेज, राजधानी कॉलेज, सत्यवती कॉलेज शामिल हैं।

विश्वविद्यालय बंद होने के बावजूद विकलांग छात्रों के हौसले में कमी नहीं आई है। दिल्ली विश्वविद्यालय के डीन एग्जामिनेशन डीएस रावत ने आईएएनएस को बताया, “इस बार हुई ओपन बुक एग्जाम में 734 दिव्यांग छात्र शामिल हुए। अच्छी बात यह रही कि सभी छात्रों ने सफलतापूर्वक न केवल अपनी परीक्षा दी बल्कि सामान्य छात्रों की ही तरह अपनी आंसर शीट भी जमा कराई। “


डीन एग्जामिनेशन के मुताबिक परीक्षा देने के लिए नेत्रहीन छात्रों को अपना राइटर साथ रखने का विकल्प दिया गया। इसके साथ ही सभी दिव्यांग छात्रों को सामान्य छात्रों के मुकाबले अधिक विकल्प उपलब्ध कराए गए। जहां सामान्य छात्रों को विश्वविद्यालय के पोर्टल पर आंसर शीट अपलोड करनी होती है। वहीं दिव्यांग छात्रों को आंसर शीट अपलोड करने या फिर ईमेल से भेजें का विकल्प दिया गया। साथ ही परीक्षा के लिए अतिरिक्त समय भी उपलब्ध कराया गया।

हालांकि मजे की बात यह रही कि दिव्यांग छात्रों में से अधिकांश छात्रों ने सामान्य छात्रों की ही तरह दिल्ली विश्वविद्यालय के पोर्टल पर आंसर शीट अपलोड की। प्रत्येक छात्र की चार परीक्षा के हिसाब से दिव्यांग छात्रों कि लगभग 3000 के आसपास आंसर शीट थी, लेकिन विकल्प होने के बावजूद केवल 200 आंसर शीट ही ई-मेल से भेजी गई।

दिल्ली विश्वविद्यालय के मुताबिक इन परीक्षाओं में दिव्यांग छात्रों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा है और लगभग सभी छात्र परीक्षाओं में उत्तीर्ण हुए हैं।

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दिव्यांग छात्रों की पढ़ाई लिखाई को लेकर स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद संवेदनशील है। नई शिक्षा नीति के 1 वर्ष पूरा होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में एक और काम हुआ है जो उनके हृदय के बहुत करीब है। यह बहुत संवेदनशील भी है। आज देश में 3 लाख से भी ज्यादा बच्चे ऐसे हैं, जिनको शिक्षा के लिए सांकेतिक भाषा की आवश्यकता पड़ती है। इसे समझते हुए भारतीय साइन लैंग्वेज को एक भाषा विषय, एक सब्जेक्ट का दर्जा प्रदान किया गया है। अब छात्र इसे एक भाषा के तौर पर भी पढ़ पाएंगे। इससे भारतीय साइन लैंग्वेज को बढ़ावा मिलेगा।

–(आईएएनएस-PS)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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