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देश

कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए देश में 63 राज्य कृषि विश्वविद्यालय: धर्मेंद्र प्रधान

शिक्षा के माध्यम से कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए देश में 63 राज्य कृषि विश्वविद्यालय, 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, 4 डीम्ड विश्वविद्यालय और 4 केंद्रीय विश्वविद्यालय कृषि संकाय के साथ काम कर रहे हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।(wikimedia commons)

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने जानकारी दी है कि शिक्षा के माध्यम से कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए देश में 63 राज्य कृषि विश्वविद्यालय, 3 केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, 4 डीम्ड विश्वविद्यालय और 4 केंद्रीय विश्वविद्यालय कृषि संकाय के साथ काम कर रहे हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

आईसीएआर ने सूचित किया है कि कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों को कृषि शिक्षा में आकर्षित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर छात्रों को विभिन्न राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय छात्रवृत्तियां प्रदान की जाती हैं।


इसके अलावा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 की परिकल्पना है कि बेहतर कुशल स्नातकों और तकनीशियनों, नवीन अनुसंधान और प्रौद्योगिकियों और प्रथाओं से जुड़े बाजार-आधारित विस्तार के माध्यम से कृषि उत्पादकता बढ़ाई जाए। इसके लिए कृषि और संबद्ध विषयों की क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार किया जाना चाहिए।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान।(PIB)

सामान्य शिक्षा के साथ एकीकृत कार्यक्रमों के माध्यम से कृषि और पशु चिकित्सा विज्ञान में पेशेवरों की तैयारी में तेजी से वृद्धि की जाएगी। कृषि शिक्षा का डिजाइन स्थानीय ज्ञान, पारंपरिक ज्ञान और उभरती प्रौद्योगिकियों को समझने और उपयोग करने की क्षमता वाले विकासशील पेशेवरों की ओर स्थानांतरित हो जाएगा। भूमि उत्पादकता में गिरावट, जलवायु परिवर्तन, हमारी बढ़ती आबादी के लिए खाद्य पर्याप्तता आदि जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से यह पेशेवर अवगत होंगे।

इसके अलावा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम चरण 3, शिक्षा मंत्रालय, सरकार द्वारा शुरू किया गया। हाल ही के बजट 2021-22 में प्रारंभिक कार्य शुरू करने के लिए तकनीकी शिक्षा में बहुविषयक शिक्षा अनुसंधान सुधार के लिए 10 करोड़ का प्रावधान किया गया है। भारत सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है कि राज्य सरकारें तकनीकी शिक्षा गुणवत्ता सुधार कार्यक्रम के लिए एक स्थिरता योजना तैयार करें, ताकि परियोजना अवधि यानी 30 सितंबर 2021 से आगे किसी भी शैक्षणिक गतिरोध से बचा जा सके।

यह भी पढ़े : आईआईटी का कमाल, बोतल में डाली जिंदगी ! .

शिक्षा मंत्रालय ने फोकस राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए की गई गतिविधियों को जारी रखने की योजना बनाने का अनुरोध किया है।(आईएएनएस-ps)

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आईपीएल में रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) का एक मैच (wikimedia commons)

भारत के क्रिकेट टीम के कप्तान और दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली ने एक के बाद टीम से अपनी कप्तानी छोड़ने का जैसे ऐलान किया वैसे हि , उनके चाहने वाले , प्रशंसकों और साथी खिलाडियों ने अपनीं प्रतिक्रिया देना शुरू कर दी । इसी बीच दक्षिण अफ्रीका के पूर्व तेज गेंदबाज डेल स्टेन का कहना है कि आईपीएल की टीम का नेतृत्व करने का दबाव और युवा परिवार का होना रॉयल चेलेंजर्स बेंगलोर (आरसीबी) के कप्तान विराट कोहली के इस आईपीएल के बाद टीम की कप्तानी छोड़ने के फैसले का कारण हो सकता है। आरसीबी की टीम की और से रविवार की देर रात यह घोषणा की गई , कि विराट कोहली आईपीएल 2021 सीजन के बाद टीम की कप्तानी छोड़ देंगे । इस के पहले कोहली ने कुछ दिन पहले ही टी20 विश्व कप के बाद भारतीय टीम के टी20 प्रारूप की कप्तानी छोड़ने का भी फैसला किया था।


डेल स्टेन ने आगे कहा कि, " विराट कोहली आरसीबी टीम के साथ शुरू से जुड़े हैं। मुझे नहीं पता, जैसे-जैसे जीवन आगे बढ़ता है आप चीजों को प्राथमिकता देने लगते हैं। कोहली का नया यूवा परिवार है । उन्हें अपनी पर्शनल लाइफ भी देखना है ।
डेल ने यह भी कहा कि , "हो सकता है, उस जिम्मेदारी (कप्तानी) से थोड़ा सा त्याग करना और सिर्फ अपनी बल्लेबाजी पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम होना उनके करियर के लिए इस समय एक अच्छा निर्णय है।"

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दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन (wikimedia commons)

दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी में शुमार अमेजन को लेकर एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है । द मॉर्निग कॉन्टेक्स्ट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन ने भारत में अपने कानूनी प्रतिनिधियों के आचरण की जांच शुरू कर दी है। एक व्हिसलब्लोअर शिकायत के आधार पर यह जांच हुई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि अमेजन द्वारा कानूनी शुल्क में भुगतान किए गए कुछ पैसे को उसके एक या अधिक कानूनी प्रतिनिधियों द्वारा घूस में बदल दिया गया है।

काम करने वाले दो लोगों ने जो कि अमेजन की इन-हाउस कानूनी टीम के साथ है , उन्होंने मिलकर पुष्टि की कि अमेजन के वरिष्ठ कॉर्पोरेट वकील राहुल सुंदरम को छुट्टी पर भेजा गया है। एक संदेश में उन्होंने कहा, "क्षमा करें, मैं प्रेस से बात नहीं कर सकता।" हम स्वतंत्र रूप से यह पता नहीं लगा सके कि आंतरिक जांच पूरी हो चुकी है या प्रगति पर है।

कई सवालों के एक विस्तृत सेट के जवाब में, अमेजन के प्रवक्ता ने कहा, "भ्रष्टाचार के लिए हमारे पास शून्य सहनशीलता है। हम अनुचित कार्यो के आरोपों को गंभीरता से लेते हैं, उनकी पूरी जांच करते हैं, और उचित कार्रवाई करते हैं। हम विशिष्ट आरोपों या किसी की स्थिति पर इस समय जांच या टिप्पणी नहीं कर रहे हैं इस समय जांच।"

\u0911\u0928\u0932\u093e\u0907\u0928 \u0930\u093f\u091f\u0947\u0932\u0930 \u0905\u092e\u0947\u091c\u0928 दुनिया की सबसे बड़े ऑनलाइन रिटेलर अमेजन कंपनी का लोगो (wikimedia commons)

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भारतीय जनता पार्टी भाजपा का चुनावी चिन्ह (wikimedia commons)

अभी-अभी भारत के पंजाब राज्य में एक बड़ी राजनेतिक घटना घटी जब वंहा का मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया और सत्ता दल पार्टी ने राज्य ने नया मुख्यमंत्री बनाया । पंजाब में एक दलित को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने एक बड़ी सियासी चाल खेल दी है। अब कांग्रेस इसका फायदा अगले साल होने जा रहे राज्यों के विधानसभा चुनाव में उठाने की रणनीति पर भी काम करने जा रही है । उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के सियासी पारे को गरम कर दिया है कांग्रेस की इस मंशा ने।

कांग्रेस नेता हरीश रावत जो कि पंजाब में दलित सीएम के नाम का ऐलान करने वाले वो उत्तराखंड से ही आते हैं, अतीत में प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और आगे भविष्य में भी सीएम पद के दावेदार हैं, इसलिए बात पहले इस पहाड़ी राज्य के सियासी तापमान की करते हैं। साढ़े चार साल के कार्यकाल में भाजपा राज्य में अपने दो मुख्यमंत्री को हटा चुकी है और अब तीसरे मुख्यमंत्री के सहारे राज्य में चुनाव जीतकर दोबारा सरकार बनाना चाहती है। इसलिए भाजपा इस बात को बखूबी समझती है कि हरीश रावत उत्तराखंड में तो इस मुद्दें को भुनाएंगे ही।

बात करे उत्तराखंड राज्य कि तो यहा पर आमतौर पर ठाकुर और ब्राह्मण जाति ही सत्ता के केंद्र में रहती है, लेकिन अब समय बदल रहा है राजनीतिक दल भी दलितों को लुभाने का विशेष प्रयास कर रहे हैं। दरअसल, उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है , जिसमें 13 सीट अनुसूचित जाति और 2 सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। मसला सिर्फ 13 आरक्षित सीट भर का ही नहीं है। उत्तराखंड राज्य के 17 प्रतिशत से अधिक दलित मतदाता 22 विधानसभा सीटों पर जीत-हार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इसके साथ ही कुल 36 सीटों पर जीत हासिल करने वाली पार्टी राज्य में सरकार बना लेती है।

brahmin in uttrakhand उत्तराखंड राज्य में 70 विधानसभा सीट आती है (wikimedia commons)

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