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देश

भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार अगले दशक में 30 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा: रिपोर्ट

नई रिपोर्ट मुताबिक, मिलिनिएल्स और जेन जेड के नेतृत्व में ऑनलाइन गतिविधियों में तेजी हुई है. इसे देखते हुए भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार अगले दशक में 10 गुना बढ़ने की उम्मीद है.

एक नई रिपोर्ट मुताबिक, मिलिनिएल्स और जेन जेड के नेतृत्व में ऑनलाइन गतिविधियों में तेजी हुई है.(Wikimedia Commons)

सोमवार को सामने आई एक नई रिपोर्ट मुताबिक, मिलिनिएल्स और जेन जेड के नेतृत्व में ऑनलाइन गतिविधियों में तेजी हुई है। इसे देखते हुए भारत का डिजिटल विज्ञापन बाजार अगले दशक में 10 गुना बढ़ने की उम्मीद है। साल 2020 में इसमें 3 अरब डॉलर बढ़ोतरी हुई है। आने वाले साल 2030 तक यह 25-30 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा। डिजिटल विज्ञापन बाजार के कुल विज्ञापन बाजार में 70-85 प्रतिशत का योगदान होने की संभावना है, जो वर्तमान में देश में 33 प्रतिशत है।

आधारित बाजार अनुसंधान फर्म ( रिडसीर) के रिपोर्ट के मुताबिक, इस बढ़ते विकास के लिए जीडीपी/केपीटल, डिजिटल बैंकीं में वृद्धि और डारेक्ट टू सेलार / चैलेंजर ब्रांडों का डिजिटल विज्ञापनों के विकास को आगे बढ़ाएंगे।


रिडसीर के इंगेजमेंट मैनेजर,अभिषेक गुप्ता ने कहा,नए जमाने की कंपनियां हाल के वर्षों में डिजिटल विज्ञापनों पर प्रमुख रूप से खर्च कर रही हैं। ट्रेडिशनल कंपनियां भी डिजिटल पर तेजी से खर्च कर रही हैं। इस बढ़ती विकास का एक प्रमुख हिस्सा युवा और टिनेजर्स है। जो अपना अधिकांश समय डिजिटल पर बिताते हैं।

एक नई रिपोर्ट मुताबिक, मिलिनिएल्स और जेन जेड के नेतृत्व में ऑनलाइन गतिविधियों में तेजी हुई है.[Wikimedia Commons]

उन्होंने कहा, इस प्रवृत्ति के केवल बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि विशेष रूप से टियर 2प्लास( बड़े शहर) शहरों में अधिक लोग वेबसाइटों, ऐप्स, सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक डिजिटल रूप से जुड़ते हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 बनाम 2020 की तुलना से पता चलता है कि, लोकप्रिय ऐप में मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता (एमएयू) कितने महत्वपूर्ण हैं, जिसमें चैट मैसेंजर, ओटीटी, ई-कॉमर्स, सोशल मीडिया, जैसे अन्य शामिल हैं।

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यह वृद्धि यूजर्स द्वारा खर्च किए गए समय, जुड़ाव और अन्य फैक्टार में भी रिफ्लेक्ट होती है।भारत के डिजिटल विज्ञापन खर्च में लगातार वृद्धि हुई है। हालाँकि, यह तुलनात्मक रूप से चीन और अमेरिका जैसे देशों की तुलना में बहुत कम है। जहाँ डिजिटल अपनाने की दर अभी भी भारत की तुलना में अधिक है।

गुप्ता ने जोर कहा डिजिटल विज्ञापनों का विकास जारी रहने और मजबूत होने की संभावना है। क्योंकि कोविड के मद्देनजर डिजिटल सेवाओं के यूजर्स कई गुना बढ़ गऐ है। यह कंपनियों और ब्रांडों द्वारा खर्च किए गए विज्ञापन पर सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए जरुरी है। क्योंकि यूजर्स इन प्लेटफार्मों पर अतिरिक्त समय और खर्च करते है,।(आईएएनएस PS)

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पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने स्लीपर सेल्स के ज़रिये दिल्ली में लगवाई आईईडी- रिपोर्ट (Wikimedia Commons)

एक सूत्र ने कहा कि आरडीएक्स-आधारित इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED), जो 14 जनवरी को पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर फूल बाजार में पाया गया था और उसमें "एबीसीडी स्विच" और एक प्रोग्राम करने योग्य टाइमर डिवाइस होने का संदेह था।

कश्मीर और अफगानिस्तान में सक्रिय जिहादी आतंकवादियों द्वारा लगाए गए आईईडी में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जाने वाले इन स्विच का पाकिस्तान(Pakistan) सबसे बड़ा निर्माता है। सूत्र ने कहा कि इन फोर-वे स्विच और टाइमर का उपयोग करके विस्फोट का समय कुछ मिनटों से लेकर छह महीने तक के लिए सेट किया जा सकता है।

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राष्ट्रपति भवन (Wikimedia Commons)

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम(South Delhi Municipal Corporation) में भाजपा के मुनिरका वार्ड से पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द(Ramnath Kovind) को एक पत्र लिखकर राष्ट्रपति भवन(Rashtrapati Bhavan) में स्थित मुगल गार्डन का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डाक्टर अब्दुल कलाम वाटिका(Abdul Kalam Vatika) के नाम पर रखने की मांग की है। निगम पार्षद भगत सिंह टोकस ने राष्ट्रपति को भेजे अपने पत्र में लिखा है, मुगल काल में मुगलों द्वारा पूरे भारत में जिस प्रकार से आक्रमण किए गए और देश को लूटा था। वहीं देशभर में मुगल आक्रांताओं के नाम से लोगों में रोष हैं। जिन्होंने भारत की संस्कृति को खत्म करने का प्रयास किया उनको प्रचारित न किया जाए।

rastrapati bhavan, mughal garden राष्ट्रपति भवन स्थित मुगल गार्डन (Wikimedia Commons)

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शोधकर्ताओं ने कोविड के खिलाफ लड़ने में कारगर हिमालयी पौधे की खोज। ( Pixabay )

कोविड के खिलाफ नियमित टीकाकरण के अलावा दुनिया भर में अन्य प्रकार की दवाईयों पर अनेक संस्थायें रिसर्च कर रही हैं जो मानव शरीर पर इस विषाणु के आक्रमण को रोक सकती है। इसी क्रम में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं को एक बड़ी सफलता मिली है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने एक हिमालयी पौधे की पंखुड़ियों में फाइटोकेमिकल्स की खोज की है जो कोविड संक्रमण के इलाज में करगर साबित हो सकती है।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी में स्कूल ऑफ बेसिक साइंस के बायोएक्स सेंटर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. श्याम कुमार मसाकापल्ली के तर्ज पर एक वक्तव्य में कहा की, अलग अलग तरह के चिकित्सीय एजेंटों में पौधों से प्राप्त रसायनों फाइटोकेमिकल्स को उनकी क्रियात्मक गतिविधि और कम विषाक्तता के कारण विशेष रूप से आशाजनक माना जाता है। टीम ने हिमालयी बुरांश पौधे की पंखुड़ियों में इन रसायनों का पता लगया है। पौधे का वैज्ञानिक नाम रोडोडेंड्रोन अर्बोरियम है जिसे वहाँ के स्थानीय लोग अलग अलग तरह की बीमारियों में इसका इस्तेमाल करते हैं।

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