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देश

क्या भारत के पास वैक्सीन के पहले चरण का लक्ष्य पूरा करने की क्षमता है?

यह देखते हुए कि भारत ने जुलाई तक 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा है, क्या देश इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त खुराक खरीद सकता है? 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने के लिए, देश को 60 करोड़ खुराक की आवश्यकता होगी। जो दो टीके सरकार से अनुमोदन प्राप्त

यह देखते हुए कि भारत ने जुलाई तक 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने का लक्ष्य रखा है, क्या देश इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त खुराक खरीद सकता है? 30 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने के लिए, देश को 60 करोड़ खुराक की आवश्यकता होगी। जो दो टीके सरकार से अनुमोदन प्राप्त करने की दौड़ में सबसे आगे हैं, उन्हें सुरक्षा के लिए प्रति व्यक्ति दो खुराक की आवश्यकता होगी। ये दो टीके जिन्हें सरकार वर्तमान में मंजूरी देने पर विचार कर रही है, वे ‘कोविशिल्ड’ और ‘कोवैक्सीन’ हैं।

पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने क्लिनिकल परीक्षण करने और ‘कोविशिल्ड’ के निर्माण के लिए ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका के साथ भागीदारी की है, भारत बायोटेक ने ‘कोवैक्सीन’ के लिए भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के साथ सहयोग किया है। कोविशिल्ड के लिए स्वीकृति जल्द ही मिलने की उम्मीद है, क्योंकि केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की विषय विशेषज्ञ समिति ने शुक्रवार को इसके आपातकालीन उपयोग की सिफारिश की थी।


कोविशिल्ड की खुराक

हालांकि, अब ऐसा प्रतीत होता है कि मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया जुलाई तक 30 करोड़ खुराक के साथ सरकार को आपूर्ति करने की योजना बना रहा है, जो 15 करोड़ लोगों का टीकाकरण करने के लिए पर्याप्त है।आंकड़े के साथ, तो सरकार कोविशिल्ड के साथ चरण-1 के लक्ष्यों को पूरा करने के सिर्फ आधे रास्ते तक ही पहुंच पाएगी।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर हर्षल आर साल्वे ने आईएएनएस को बताया, “टीकाकरण अभियान को चलाने के लिए, कोल्ड चेन उपकरण जैसे वॉक-इन कूलर, वॉक-इन फ्रीजर, रेफ्रिजरेटर, डीप फ्रीजर पहले से ही खरीदे जाते हैं और राज्यों को वितरित किए जाते हैं।” हवाई अड्डों और प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर वैक्सीन भंडारण क्षमता का निर्माण किया जा रहा है। साल्वे ने कहा, “इस बीच एक और वैक्सीन के लिए भी मंजूरी मिल सकती है, जिसे टीकाकरण अभियान में शामिल किया जा सकता है।”

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भारत का टीकाकरण अभियान

अब यह प्रतीत होता है कि भारत के टीकाकरण अभियान की सफलता कोवैक्सीन की प्रभावशीलता पर निर्भर कर सकती है। यह विशेष रूप से इस तथ्य के मद्देनजर है कि भारत ने अमेरिका सहित कई देशों में अप्रूवल प्राप्त करने वाले अन्य दो टीकों के लिए शुरूआती खरीद सौदों पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिसमें फाइजर-बायोएनटेक और मॉडर्ना द्वारा विकसित टीके शामिल है।

चूंकि ये दो टीके अब बहुत मांग में हैं, इसलिए वे भारत को बड़ी संख्या में खुराक की आपूर्ति करने के लिए तैयार नहीं हैं, भले ही नई दिल्ली तेजी से इसके लिए मंजूरी दे दे। अब विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी हासिल करने के लिए, देश की लगभग 70 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण करना होगा, जिसका मतलब है कि लगभग 90 करोड़ लोगों का टीकाकरण करना होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने इस महीने की शुरूआत में कहा था कि कोविड -19 के खिलाफ लगभग 30 टीके भारत में विकास के विभिन्न चरणों में हैं। (आईएएनएस)

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

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