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दुनिया

ट्रंप ने दिया इशारा, स्वीकार कर सकते हैं बाइडेन से हार

ट्रंप अब तक बाइडेन की जीत से इनकार करते रहे हैं और उन्होंने तो कुछ नतीजों को अदालतों में चुनौती देने की कसम भी खाई है। देखते हैं यह तनाव और कितना बढ़ता है।

अमेरिका के मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प। (VOA)

By: अरुल लुइस

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वह जो बाइडेन से हार स्वीकार कर सकते हैं क्योंकि मीडिया ने जॉर्जिया में भी डेमोक्रेट को विजेता घोषित कर दिया है, जहां पर मतगणना अभी भी जारी थी।


ट्रंप अब तक बाइडेन की जीत से इनकार करते रहे हैं और उन्होंने तो कुछ नतीजों को अदालतों में चुनौती देने की कसम भी खाई है। लेकिन शुक्रवार को कोरोनावायरस पर आधारित ब्रीफिंग के दौरान कहा, “भविष्य में जो होगा, कोई नहीं जानता, कि कौनसा प्रशासन होगा। यह तो समय भी बताएगा।”

20 जनवरी को किसी और प्रशासन के बारे में बोलने का उनका पहला मौका था। इस बात को लेकर अटकलें लगाई जाती रही हैं कि आखिरकार वह हार कैसे स्वीकार करेंगे। ट्रंप के एक अज्ञात वरिष्ठ सहयोगी ने एनबीसी से कहा है कि ऐसी संभावना है कि ट्रंप चुनाव के फैसले को स्वीकार कर सकते हैं।

देश में कोविड-19 के कहर और इसकी दूसरी लहर के बीच ट्रंप ने कहा कि वह देशव्यापी लॉकडाउन लागू नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, “हम लॉकडाउन में नहीं जाएंगे। यह प्रशासन लॉकडाउन में नहीं जाएगा। भविष्य में क्या होगा, कौन सा प्रशासन होगा, यह समय बताएगा।”

हालांकि मतगणना अभी भी जारी है और परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किए गए हैं, मीडिया ने बाइडेन को उनके अनुमानों के आधार पर विजेता का ताज पहनाया है और इस आधार पर बाइडेन और डेमोक्रेट ने मांग की है कि उन्हें अधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति चुने जाने का दर्जा दिया जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें: जनवरी में ट्विटर पर विशेषाधिकार खो देंगे ट्रंप

मीडिया के अनुसार, बाइडेन को 306 इलेक्टोरल कॉलेज वोट और ट्रम्प को 232 मिले हैं, जबकि जीतने के लिए 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोटों की जरूरत होती है।

बाइडेन ट्रांजिशन टीम के प्रवक्ता जेन पसाकी ने एक ब्रीफिंग के दौरान शिकायत की कि वे लोग “कोविड को लेकर चल रहे कामों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जबकि शासन करने की तैयारी के लिए यह जरूरी है।”

कानूनी रूप से चुने गए राष्ट्रपति को कार्यालय में स्थानांतरित होने और ब्रीफिंग तक पहुंचने की आधिकारिक सुविधाएं दी जानी चाहिए। लेकिन सामान्य सेवा प्रशासन के प्रमुख एमिली मर्फी इसके लिए चुनाव परिणामों की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा कर रहे हैं। राज्यों के पास आधिकारिक तौर से परिणाम घोषित करने के लिए 14 दिसंबर तक का समय है।

ट्रंप बिना सबूतों के चुनावों में धांधली होने की बात कह रहे हैं जबकि देश भर के चुनाव अधिकारियों ने ऐसी संभावना से साफ इनकार किया है।(आईएएनएस)

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आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में भारत की दिया कुमारी ने रखा भारत का पक्ष।(सांकेतिक चित्र, Pixabay)

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली बैठक में बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दे पर भारतीय महिला संसदों के दल ने हिस्सा लिया। स्पेन के मैड्रिड में आईपीयू की 143वीं असेंबली के दौरान आयोजित महिला सांसद पूनम बेन मादाम और दीयाकुमारी के फोरम के 32वें सत्र को संबोधित किया।

इस दौरान सांसद दीयाकुमारी ने कहा कि जहां सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) अवसरों के नए रास्ते खोलती है, वहीं वे बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार सहित चुनौतियों, खतरों और हिंसा के नए रूपों को भी जन्म देती हैं। भारत में ऑनलाइन बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से निपटने के लिए कड़े उपाय हैं।

सांसद दीया ने कहा कि भारत ने वर्ष 2000 में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम बनाया था और समय-समय पर इसमें संशोधन किया है। यह अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रकाशित करने और प्रसारित करने पर रोक लगाता है और अधिनियम के विभिन्न वर्गों में उल्लंघन के लिए दंडात्मक प्रावधान भी निर्धारित करता है। उन्होंने आईटी इंटरमीडियरीज गाइडलाइंस रूल्स, 2011 के साथ-साथ पॉक्सो एक्ट पर भी विचार व्यक्त किये। भारतीय दल ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधान और उनका सख्ती से क्रियान्वयन ही काफी नहीं है, ऑनलाइन यौन शोषण से बच्चों को बचाने के लिए विशेष नीतियों की आवश्यकता है।

अंतर-संसदीय संघ आईपीयू की 143वीं असेम्बली में भारत का दल।(IANS)

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भारत ने रूस और चीन से कहा कि अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए।(IANS)

भारत ने रूस और चीन से कहा कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा अफगान क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं किया जाना चाहिए। RIC Meeting त्रिपक्षीय ढांचे की 18 वीं बैठक की अध्यक्षता के दौरान रखा, जो शुक्रवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग पर हुई, जिसमें रूस और चीन के विदेश मंत्रियों सेर्गेई लावरोव और वांग यी ने भी भाग लिया।

जयशंकर ने अफगानिस्तान में समावेशी और प्रतिनिधि सरकार होने पर भारत के रुख को दोहराते हुए कहा, "RIC देशों के लिए आतंकवाद, कट्टरपंथ, मादक पदार्थों की तस्करी आदि के खतरों पर संबंधित दृष्टिकोणों का समन्वय करना आवश्यक है।" मंत्री ने मास्को और बीजिंग के अपने दो समकक्षों को बताया कि, अफगान लोगों की भलाई के लिए भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप, नई दिल्ली ने देश में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए अफगानिस्तान को 50,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति की पेशकश की थी।

हालांकि, मानवीय पहल में रुकावट आ गई थी, क्योंकि बुधवार तक पाकिस्तान इस खेप को अपने क्षेत्र से गुजरने की अनुमति देने के लिए प्रतिबद्ध नहीं था। जयशंकर ने आज कहा, "RIC देशों को यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है कि मानवीय सहायता बिना किसी रुकावट और राजनीतिकरण के अफगान लोगों तक पहुंचे। एक निकट पड़ोसी और अफगानिस्तान के लंबे समय से साथी के रूप में, भारत उस देश में हाल के घटनाक्रमों, विशेष रूप से अफगान लोगों की पीड़ा के बारे में चिंतित है।"

तीनों मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि आरआईसी देशों के बीच सहयोग न केवल उनके अपने विकास में बल्कि वैश्विक शांति, सुरक्षा, स्थिरता में भी योगदान देगा। जयशंकर ने अपने संबोधन में, आरआईसी तंत्र के तहत यूरेशियन क्षेत्र के तीन सबसे बड़े देशों के बीच घनिष्ठ संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत की निरंतर प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और राजनीति आदि क्षेत्रों में हमारा सहयोग वैश्विक विकास, शांति और स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।"

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वैज्ञानिको के अनुसार कोरोना का यह नया वैरिएंट डेल्टा वैरिएंट से भी ज़्यादा खतरनाक है। (Wikimedia Commons)

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दक्षिण अफ्रीका(South Africa) में इस वैरिएंट के अब 100 मामले सामने आए हैं और अब यह धीरे-धीरे तेज़ी से फैलता जा रहा है।

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