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दुनिया

डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार-2021 के लिए नामित

इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच शांति समझौते में ट्रंप की अहम भूमिका को देखते हुए यह फैसला किया गया है।

डोनाल्ड ट्रम्प, अमेरिकी राष्ट्रपति (Pixabay)

 अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अगले साल के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। इजरायल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच शांति समझौते में ट्रंप की अहम भूमिका को देखते हुए यह फैसला किया गया है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, नॉर्वे संसद के अति रूढ़िवादी सांसद क्रिश्चियन टाइब्रिंग गजेड ने ट्रंप को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए नामित किया है, जिन्होंने ट्रंप की दुनिया भर में संघर्षों के समाधान के लिए उनके प्रयासों की प्रशंसा की है।

यह भी पढ़ें: लंदन में असांज के खिलाफ प्रत्यर्पण पर सुनवाई शुरू


सिंगापुर में किम जोंग-उन के साथ मुलाकात के लिए 2018 में ट्रंप को नामांकित करने वाले एक टाइब्रिंग गजेड ने अमेरिकी राष्ट्रपति से जुड़े नहीं होने का दावा किया है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन। (VOA News)

ट्रंप समर्थक नहीं होने का दावा करते हुए गजेड ने फॉक्स न्यूज को बताया, “उनकी योग्यता को देखते हुए मुझे लगता है कि उन्होंने अधिकांश अन्य शांति पुरस्कार नोमनी की तुलना में राष्ट्रों के बीच शांति बनाने के लिए अधिक प्रयास किए हैं।”

उन्होंने कहा, “जिन लोगों ने हाल के वर्षो में शांति पुरस्कार प्राप्त किया है, उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप की तुलना में बहुत कम काम किया है। उदाहरण के लिए, बराक ओबामा ने कुछ नहीं किया है।”

नॉर्वे की प्रोग्रेस पार्टी से चार बार के सांसद और नाटो संसदीय सभा के चेयरमैन क्रिश्चियन टाइब्रिंग गजेड ने कहा कि ट्रंप प्रशासन यूएई और इजरायल के बीच संबंधों की स्थापना में अपनी भूमिका के लिए सम्मानित होने के योग्य है।(आईएएनएस)

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बांके बिहारी मंदिर में होली

कहा जाता है कि अगर किसी इंसान को सुकून चाहिए होता है तो उसे वृंदावन या मथुरा की गलियों में जाना चाहिए, क्योंकि इन्ही गलियों में खेलते हुए कृष्ण जी का बचपन बीता हैं। वृंदावन हो या मथुरा यहां हर दूसरा व्यक्ति कृष्ण भक्ति में लीन नज़र आता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता की वह हिंदुस्तानी है या कहीं और से आया है। हर कोई कृष्ण की महिमा में डूबा हुआ होता है। वैसे तो वृंदावन में कई मंदिर है जहां हर रोज हज़ारों की संख्या में भक्त आते हैं और अपनी हाजिरी लगवाते हैं, लेकिन बांके बिहारी मंदिर की बात अलग है। यहां भी भक्तों का मेला लगा रहता है, पर हर किसी को कुछ बातें मालूम नहीं है। ऐसे ही कुछ तथ्यों के बारे में इस आर्टिकल में बताया गया है।

1) बांके बिहारी मंदिर की स्थापना स्वामी श्री हरिदास जी ने की थी। वह श्री कृष्ण के भक्त थे और महान गायक तानसेन के गुरु थे। वह अपने गीत से श्री कृष्ण को प्रसन्न करने की कोशिश किया करते थे। ऐसा कहा जाता है कि श्री हरिदास जी की भक्ति से प्रसन्न हो श्री कृष्ण ने दर्शन दिए थे।

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(instagram , virat kohali)

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और अनुष्का

भारतीय क्रिकेट टीमके कप्तान विराट कोहली और उनके फाउंडेशन ने यहां मड, मलाड में आवारा पशुओं के लिए एक ट्रॉमा और रिहेब सेंटर का उद्घाटन किया है। इसके पहले इस साल की शुरूआत में, भारतीय कप्तान कोहली ने कहा था कि वह मुंबई में दो पशु देखभाल सुविधाएं स्थापित कर रहे हैं।
कोहली ने अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा को शहर में आवारा जानवरों के सामने आने वाली कठिनाइयों को देखने का श्रेय दिया।

अभिनेत्री अनुष्का ने कई मौकों पर जानवरों के कल्याण और उनके अधिकारों के प्रति अपना समर्थन दिया है। अनुष्का के जानवरों के प्रति दीवानगी से प्रेरित होकर कोहली अपने फाउंडेशन के जरिए आवारा जानवरों की मदद करने के मौके तलाश रहे हैं।

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भीड़ में चलते लोग।

मौजूदा समय में विश्व की जनसंख्या 7 अरब से भी ज्यादा है। इस जनसंख्या को यहां तक पहुंचने में कई सदियां लग गई है। समस्त विश्व को 1 अरब से 2 अरब तक की आबादी होने में 100 सालों का समय लगा था। लेकिन 2 अरब से 3 अरब होने में मात्र 30 साल लगे, वहीं 3 से 4 अरब होने में 15 साल लगे थे। उसके बाद से यह अंतर और कम हो गया। औद्योगिक क्रांति के बाद अठारहवीं शताब्दी में विश्व जनसंख्या में विस्फोट हुआ था। तकनिकी प्रगति की वजह से मृत्यु दर में गिरावट आई जो कि जनसंख्या विस्फोट का एक बहुत बड़ा कारण बना। भारत में भी जनसंख्या विस्फोट देखा गया था।

1951 में भारत की जनसंख्या मात्र 36.1 करोड़ थी जो 2011 की जनगणना में 121.02 करोड़ हो गई। और अब यह लगभग 135 करोड़ के ऊपर है। अगर किसी क्षेत्र की जनसंख्या बढ़ती है तो उसका मतलब है कि वहाँ का मृत्यु दर कम है और जन्म दर ज्यादा। यह दर्शाता है कि उस जगह पर चिकित्सकीय सुविधाएं अच्छी है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या देश के लिए मुसीबत का सबब भी बन सकती है, क्योंकि जनसंख्या में वृद्धि हुई है किन्तु साधनों में नहीं। भारत के साथ भी यही समस्या है। लगातार जनसंख्या बढ़ने से कई जगहों पर साधनों की कमी महसूस होने लगी है।

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