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दुनिया

अमेरिका : कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके लोगों को मास्क पहनना जरूरी नहीं

अमेरिका में जिन लोगों का पूरी तरह से कोविड वैक्सीनेशन हो चुका है, उन्हें न तो मास्क पहनने की जरूरत है और न ही सामाजिक दूरी का पालन करना जरूरी है।

अमेरिका में लगभग 15.4 करोड़ लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है| (Pexels)

अमेरिका (America) में जिन लोगों ने पूरी तरह से कोविड वैक्सीन लगवा ली है, उन्हें अब मास्क (Mask) पहनने की जरूरत नहीं है। इसकी घोषणा अमेरिका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ऐंड प्रीवेंशन (सीडीसी) ने की है। सीडीसी के अनुसार, अमेरिका में जिन लोगों का पूरी तरह से कोविड वैक्सीनेशन (Vaccination) हो चुका है, उन्हें न तो मास्क पहनने की जरूरत है और न ही सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) का पालन करना जरूरी है। ऐसे लोगों को घरों के अंदर तथा बाहर और यहां तक कि भीड़भाड़ वाले स्थानों पर भी ऐसे नियमों का पालन करना जरूरी नहीं है।

सीडीसी के निदेशक रोशेल वालेंस्की ने गुरुवार को एक व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में कहा, ” जो कोई भी पूरी तरह से वैक्सीनेट हो चुका है, वह मास्क पहने बिना या शारीरिक दूरी (Social Distancing) का पालन किए बिना किसी भी छोटी या बड़ी इनडोर या आउटडोर गतिविधियों में भाग ले सकता है। ”


उन्होंने कहा, ” यदि आपका पूरी तरह से टीकाकरण हो चुका है, तो आप उन चीजों को करना शुरू कर सकते हैं, जिन्हें आपने महामारी के कारण करना बंद कर दिया था। ”

समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने वालेंस्की के हवाले से कहा, ” हम सभी उस पल के लिए तरस रहे हैं, जब हम सामान्य स्थिति में वापस आ सकें। ”

अमेरिका में जिन लोगों ने पूरी तरह से कोविड वैक्सीन लगवा ली है, उन्हें अब मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। (Pexels)

पूरी तरह से टीकाकरण करा चुके लोगों के लिए सामान्य स्थिति में वापस आने का रास्ता प्रदान करने के लिए सीडीसी के बहुत धीमे होने के लिए वालेंस्की को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। इसके बाद अब यह घोषणा की गई है।

इस बीच बसों, ट्रेनों, विमानों और सार्वजनिक परिवहन पर यात्रा के दौरान मास्क पहनने की आवश्यकता अभी भी है, वालेंस्की ने कहा है कि यात्रा के लिए दिशानिदेशरें को जल्द ही अपडेट किया जाएगा।

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टीकाकृत व्यक्तियों को उस समय भी अपने चेहरे को ढंकने और शारीरिक दूरी का पालन करने को कहा गया है जब वह डॉक्टरों, अस्पतालों या नसिर्ंग होम जैसी सुविधाओं में जाते हैं।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में लगभग 15.4 करोड़ लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की कम से कम एक खुराक मिल चुकी है, लेकिन देश के केवल एक तिहाई यानी लगभग 11.76 करोड़ लोग ही पूरी तरह से वैक्सीनेट हुए हैं। (आईएएनएस-SM)

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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद।(PIB)

राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने बुधवार को दोहराया कि भारत सामूहिक स्वास्थ्य और आर्थिक कल्याण सुनिश्चित करने के लिए Covid-19 महामारी के खिलाफ एक निर्णायक और समन्वित प्रतिक्रिया देने के वैश्विक प्रयासों में सबसे आगे रहा है। कोविंद ने यह भी कहा कि दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के तहत भारतीयों को अब तक 80 करोड़ से अधिक खुराक मिल चुकी है।

राष्ट्रपति भवन से एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को एक आभासी समारोह में आइसलैंड, गाम्बिया गणराज्य, स्पेन, ब्रुनेई दारुस्सलाम और श्रीलंका के लोकतांत्रिक गणराज्य के राजदूतों/उच्चायुक्तों से परिचय पत्र स्वीकार किए।

अपना परिचय पत्र प्रस्तुत करने वाले राजदूत निम्न हैं : महामहिम गुडनी ब्रैगसन, आइसलैंड के राजदूत, महामहिम मुस्तफा जवारा, गाम्बिया गणराज्य के उच्चायुक्त, महामहिम जोस मारिया रिडाओ डोमिंगुएज, स्पेन के राजदूत, महामहिम दातो अलैहुद्दीन मोहम्मद ताहा, ब्रुनेई दारुस्सलाम के उच्चायुक्त, महामहिम अशोक मिलिंडा मोरागोडा, श्रीलंका के लोकतांत्रिक समाजवादी गणराज्य के उच्चायुक्त।


इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने इन सभी राजदूतों को उनकी नियुक्ति पर बधाई दी और उन्हें भारत में एक सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत के इन सभी पांच देशों के साथ घनिष्ठ संबंध हैं और भारत इनके साथ शांति, समृद्धि का एक समन्वित दृष्टिकोण साझा करता है।

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

\u0915\u0930\u094d\u0928\u093e\u091f\u0915 \u0930\u093e\u091c\u094d\u092f कर्नाटक राज्य का नक्शा सांकेतिक इमेज (wikimedia commons)

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