Rajasthan के स्कूलों में छात्रों को फीस न देने के कारण दी जा रही है मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना

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कई स्कूलों ने फिर से खुलने के बाद अपनी फीस में 25 प्रतिशत की वृद्धि की है और ड्रेस बदल दी है (IANS)

महामारी के दौरान फीस न देने की वजह से छात्रों और स्कूलों के बीच काफी विवाद हुआ था। दोनों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। स्कूल किसी न किसी तरह से छात्रों को फीस न देने के चलते दंडित कर रहे हैं।

स्कूल उन छात्रों का रिजल्ट रोक रहे हैं और जो फीस का भुगतान करने में असमर्थ हैं और अपने बच्चों को दूसरे स्कूलों में स्थानांतरित करने के लिए कह रहे हैं।

कई स्कूलों ने फिर से खुलने के बाद अपनी फीस में 25 प्रतिशत की वृद्धि की है और ड्रेस बदल दी है और परिवहन शुल्क दोगुना कर दिया है। राजस्थान के अभिभावक एकता आंदोलन के प्रदेश अध्यक्ष मनीष विजयवर्गीय ने कहा कि राज्य सरकार ने अभी तक ऐसे किसी भी स्कूल के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई नहीं की है।

उन्होंने कहा कि इस मामले में पहला उदाहरण एक लड़की का दिया जा सकता है जिसका हाल ही में एक स्कूल शिक्षक द्वारा फीस का भुगतान न करने पर हाथ तोड़ दिया गया था। शिक्षक ने स्कूल खत्म होने के बाद लड़की को रोका और उसके हाथ को इतनी जोर से घुमाया कि वह टूट गया।

उसके पिता बादल ने कहा कि उसने अपनी 10 साल की बेटी शिवानी पांचाल की तीन महीने को छोड़कर पूरी फीस जमा कर दी। तब भी स्कूल ने छात्रा को प्रताड़ित करना जारी रखा।

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उन्होंने कहा कि हाल ही में उसके शिक्षक ने मेरी बेटी को स्कूल में रोक लिया था, उसे थप्पड़ मारा और उसका हाथ जोर से मरोड़ दिया, जिससे उसके हाथ की हड्डी टूट गई। जब लड़की की तबीयत बिगड़ गई, तो शिक्षक ने हमें फोन किया और हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है।


एक अन्य स्कूल में, छात्रों को कथित तौर पर धूप में खड़ा करने के लिए कहा गया(Wikimedia Commons)

मैं एक पेट्रोल पंप पर काम करता हूं और जो पैसे मेरे पास आए उससे फीस जमा कर दी है। उन्होंने कहा कि तीन महीने की फीस लंबित थी जिसे वापस करने का वादा किया गया था।

एक अन्य स्कूल में, छात्रों को कथित तौर पर धूप में खड़ा करने के लिए कहा गया क्योंकि उनके माता-पिता फीस का भुगतान नहीं कर सकते थे।

विद्याश्रम स्कूल में लगभग 500 बच्चों को पुस्तकालय में बैठाया गया, और उनके माता-पिता को उनका रिजल्ट नहीं दिया गया। दरअसल, स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को धमकी दी थी कि बच्चों का प्रमोशन नहीं किया जाएगा जिस पर सैकड़ों अभिभावकों ने स्कूल का विरोध किया। वे स्कूल के बाहर जमा हो गए और प्रदर्शन किया और स्कूल के खिलाफ बजाज नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।

इस बीच विजयवर्गीय ने आईएएनएस को बताया कि विद्याश्रम स्कूल के छात्रों के अभिभावकों ने शिकायत दर्ज कराई है कि 80 फीसदी फीस जमा होने के बावजूद मासूम बच्चों को घंटों लाइब्रेरी में रखा जा रहा है।

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भारत में शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है, सुप्रीम कोर्ट ने भी स्पष्ट रूप से कहा था कि फीस बकाया होने पर बच्चों को ऑनलाइन और ऑफलाइन परीक्षाओं से नहीं निकाला जाएगा और न ही उनका परीक्षा परिणाम रोका जाएगा। इसके बावजूद जयपुर के कई स्कूल ऐसा कर रहे हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि हमने शिकायत की है लेकिन सरकार ने आज तक किसी भी स्कूल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

विजयवर्गीय ने कहा कि हालांकि राज्य सरकार ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन अधिकारियों को कोई जल्दी नहीं है, इसलिए शिकायतों की जांच के लिए गठित समितियों की ओर से कोई अपडेट नहीं आया है।

विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि अधिकारी भी स्कूलों के साथ मिले हुए है।

आईएएनएस(DS)

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