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मनोरंजन

दशहरा 2020 : बुराई पर अच्छाई की जीत से जुड़ी फिल्में

कलाकारों ने दशहरे के मौके पर बुराई पर अच्छाई की जीत से जुड़ी अपनी पसंदीदा फिल्मों को साझा किया है।

देश भर में 25 अक्टूबर को दशहरा मनाया जा रहा है। (Pixabay)

By – नतालिया निंगथौजम

बंधन

दिग्गज अभिनेत्री हिमानी शिवपुरी के लिए ऐसी फिल्म साल 1998 में आई सलमान खान स्टारर ‘बंधन’ है।


उन्होंने कहा, “‘बंधन’ मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है। यह एक ऐसी फिल्म है, जो इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि सच की हमेशा जीत होती है। उन सभी लोगों के लिए जिन्होंने यह फिल्म नहीं देखी है, कहानी यह था कि जैकी श्रॉफ द्वारा निभाया किरदार स्वार्थी उद्देश्यों और पुनर्विवाह का शिकार कैसे होता है। इसके चलते वह अपनी पूर्व पत्नी और अपने बहनोई के साथ अपने संबंधों को खराब कर देता है। उन्हें बहुत बाद में रिश्तों के महत्व और गलतियों के बारे में पता चलता है।”

अभिनेत्री ने आगे कहा, “दशहरे के इस त्योहारी सीजन के दौरान यह फिल्म पापी या गलत विचारों और क्रोध का शिकार न होने के लिए एक प्रेरित करता है, इसके बजाय लोगों में अच्छाई की तलाश करें, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।”

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लक्ष्मी बॉम्ब

अभिनेता-निर्माता तुषार कपूर ने अक्षय कुमार अभिनीत अपनी आगामी फिल्म ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ को चुना।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “मैं अभी बुराई पर अच्छाई जीत के बारे में किसी और फिल्म के बारे में नहीं सोच सकता, लेकिन हां ‘लक्ष्मी बॉम्ब’ ऐसी फिल्म है। यह एक खास फिल्म है, क्योंकि यह बुराई पर अच्छाई की जीत के बारे में एक फिल्म है, भारतीय मूल्यों के साथ बनी इस फिल्म में कुछ ऐसा है जिससे हर कोई जुड़ेगा, कुछ ऐसा जो आपको सबक सिखाएगा, कुछ ऐसा जो प्रेरित करेगा।”

रंग दे बसंती

हरलीन सेठी ने ‘रंग दे बसंती’ को अपना पसंदीदा बताया।

उन्होंने कहा, “‘रंग दे बसंती’ कभी पुरानी नहीं होगी। यह युवाओं को अन्याय के खिलाफ उठने के लिए प्रोत्साहित करता है, देशभक्ति की भावना जगाता है, और नैतिक और राजनीतिक भ्रष्टाचार के खिलाफ सामूहिक अखंडता दिखाता है। यह आपको सोचने के लिए मजबूर करता है कि अन्याय होने देना भी अन्याय का एक रूप है।”

द लायन किंग

अभिनेता हितेन तेजवानी के लिए यह क्लासिक हॉलीवुड फिल्म ‘द लायन किंग’ है।

अभिनेता ने कहा, “मुझे ‘द लायन किंग’ बहुत पसंद है, किस तरह सिम्बा चला जाता है और बाद में वापस आता है, और राजा बन जाता है, यह चीज मुझे बहुत अच्छी लगी।”

अभिनेत्री ग्रेसी सिंह ने बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए साल 2001 की ब्लॉकबस्टर रिलीज ‘लगान’ को चुना।

अभिनेत्री ने कहा, “फिल्म वास्तव में इस विषय को जीवंत करती है कि बुराई पर अच्छाई की जीत कितनी प्यारी है। भारी करों और कई वर्षों के सूखे से परेशान चंपानेर के किसान एक साथ क्रिकेट के खेल पर ब्रिटिश सेना को चुनौती देने के लिए आते हैं, ताकि वे उन पर लगे लगान (कर) को रोकें। उनकी मेहनत और ईमानदारी आखिर में रंग लाती है। फिल्म ने यही संदेश दिया है।”

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मर्दानी 2

अभिनेत्री शमीन मन्नान के लिए ऐसी फिल्म ‘मर्दानी 2’ है, जिसमें रानी मुखर्जी को पुलिस अवतार में देखा गया।

उन्होंने कहा, “जिस तरह से रानी सीरियल रेपिस्ट को न सिर्फ गिरफ्तार करती है, बल्कि उसे बहुत पीटती हैं, वह आश्चर्यजनक है। जब भी मैं उस फिल्म को देखती हूं, तो मेरे रोए खड़े हो जाते हैं और जिस तरह से रानी के किरदार एसपी शिवानी साक्षात्कार में बताती है कि सभी महिलाओं को क्या करना है और पुरुषों की तुलना महिलाओं से क्यों नहीं होनी चाहिए, वह उत्कृष्ट है। इस तरह के प्रदर्शन ने बाकी सभी को हरा दिया। बेशक नेगेटिव लीड ने भी अच्छा काम किया है, हमें इस तरह की और फिल्में चाहिए।”

अभिनेत्री सबा सौदागर उनसे सहमत हैं। उन्होंने कहा “मुझे ‘मर्दानी’ बेहद पसंद है, इसका कारण यह है कि मुझे यह बहुत वास्तविक और गैर-फिल्मी लगती है। मदार्नी का बुरा हिस्सा उस समाज को दर्शाता है जिसमें हम रहते हैं और अच्छा हिस्सा उस समाज को भी दर्शाता है, जिसे हम जीते हैं, लेकिन हम इसे हल्के में लेते हैं। ‘मर्दानी 2’ का आखिरी ²श्य, जहां रानी एक घर के बाहर दोषी को पीटती है और उनके पीछे देवी की मूर्ति है, इस ²श्य ने मेरे रोए खड़े कर दिए।”

कहानी

अभिनेत्री पूजा बनर्जी के लिए ऐसी फिल्म विद्या बालन अभिनीत ‘कहानी’ है।

उन्होंने कहा, “इसकी कहानी शानदार है, शानदार पटकथा, पावर-पैक प्रदर्शन और बैकग्राउंड विषय के रूप में दुर्गा पूजा है। यह एक फिल्म के रूप में मेरे लिए सबसे अच्छा था, जो बुराई पर अच्छाई की जीत को दर्शाता है। साथ ही कुछ पुरुषों ने महिलाओं, विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के साथ कैसा व्यवहार करते हैं, इसकी वास्तविकता को देखकर वाकई दिल दहल जाता है। यह वास्तव में मेरे लिए सबसे प्रभावशाली फिल्म थी।” (आईएएनएस)

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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झारखंड के नोआमुंडी में खदान की कमान महिलाओं के हाथ में सौंपेगी टाटा स्टील कंपनी। [Wikimedia Commons]

टाटा स्टील (Tata Steel) कंपनी झारखंड में लौह अयस्क की एक खदान की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होगी। फावड़ा से लेकर ड्रिलिंग तक और डंपर चलाने से लेकर डोजर-शॉवेल जैसी हेवी मशीनों का संचालन कुशल महिला कामगारों के द्वारा किया जाएगा। नये साल यानी 2022 में पश्चिम सिंहभूम जिले की नोआमुंडी आयरन ओर माइन्स को पूरी तरह महिलाओं के हाथ में सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। ऐसा प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है।

टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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इस साल देश में हिरासत में कुल 151 मौतें हुई हैं। (सांकेतिक चित्र, File Photo )

इस साल देश में हिरासत(police custody)में कुल 151 मौतें हुई हैं। केंद्र ने लोकसभा(Loksabha) में मंगलवार को यह जानकारी दी। बीजेपी सांसद वरुण गांधी के सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय(Nityanand Rai)ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुताबिक 15 नवंबर तक पुलिस हिरासत में मौत के 151 मामले दर्ज किए गए हैं।

महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत(police custody) में सबसे अधिक (26) मौतें हुईं हैं, उसके बाद गुजरात (21) और बिहार (18) का स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में 11-11 लोगों की मौत की खबर है।

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