जानिए प्रख्यात भारतीय अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के जीवन से जुड़े कुछ प्रेरणादायी किस्से

आज ही के दिन प्रख्यात भारतीय अर्थशास्त्री और दार्शनिक अमर्त्य सेन का जन्म हुआ था
अमर्त्य सेन
अमर्त्य सेनWikimedia

प्रख्यात भारतीय अर्थशास्त्री और दार्शनिक अमर्त्य सेन (Amartya Sen) का जन्म 3 नवम्बर 1933 हुआ। सेन ने कल्याणकारी अर्थशास्त्र (welfare economics), सामाजिक पसंद सिद्धांत (social choice theory), आर्थिक और सामाजिक न्याय (economic and social justice), निर्णय सिद्धांत (decision theory), विकास अर्थशास्त्र (development economics), सार्वजनिक स्वास्थ्य (public health) में योगदान दिया है। उन्होंने अकाल के अर्थशास्त्र (economics of famines) का भी अध्ययन किया है। अमर्त्य सेन को अर्थशास्त्र विज्ञान में नोबेल पुरस्कार (Nobel Prize), भारत रत्न से सम्मानित किया गया है।

उन्होंने दुनियाभर में भारत का नाम रोशन किया। आज उनके जन्मदिन के मोके पर आपको बताये उनसे जुडी कुछ प्रेरणादायी बातें।

अमर्त्य सेन के पिता आशुतोष सेन ढाका विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान के प्रोफेसर, दिल्ली में विकास आयुक्त, और फ़िर पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रहे। उनकी माता अमिता सेन लेखक थी जो रबीन्द्रनाथ टैगोर (Rabindranath Tagore) द्वारा लिखे कई नृत्य नाटकों में दिखाई दी। अमर्त्य सेन के जन्म के बाद उनके पिता उन्हें रवीन्द्रनाथ टैगोर के पास ले गए और टैगोर ने उनका नामांकरण करते हुए कहा की ‘यह असामान्य बालक है। बड़ा होकर असाधारण बनेगा और दुनिया से जाने के बाद भी इसका नाम अक्षुण्ण रहेगा इसलिए इसका नाम 'अमर्त्य' होना चाहिए।'

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रविंद्रनाथ टैगोर ने अमर्त्य सेन के बारे में बचपन में जो भविष्‍यवाणी की थी, वह सेन के बड़े होने के बाद फलीभूत हुई। अमर्त्‍य सेन के देश का सर्वोच्‍च नागरिक सम्‍मान भारत रत्‍न और अर्थशास्‍त्र का नोबल पुरस्कार प्राप्‍त करते समय गुरुदेव का आशीर्वाद और उनकी भविष्यवाणी सही साबित होती दिखी।

नौ साल की उम्र में सेन के साथ एक जीवन बदल देने वाला किस्सा हुआ। कुछ छात्रों ने एक मानसिक रोगी प्रतीत होने वाले व्यक्ति का मज़ाक उड़ाया और छेड़ा। सेन उन लोगों में से थे जो उस व्यक्ति की सहायता करना चाहते थे। उन्होंने द गार्जियन के एक साक्षात्कार में कहा, "मुझे उस आदमी से बात करने के लिए मिला और यह बहुत स्पष्ट हो गया कि उसने लगभग 40 दिनों तक नहीं खाया था।” 

अमर्त्य सेन संपन्न परिवार से होने के कारण बंगाल में अकाल की परिस्थिति से भी बचे रहे मगर उन्होंने भूख से दम तोड़ते लोगो को देखा था जिसका उनके मन पर काफ़ी प्रभाव पड़ा और बड़े होकर गरीबी और भूख की समस्या पर काम किया।

उन्होंने मानव विकास सूचकांक (Human Development Index) में योगदान दिया, जो संयुक्त राष्ट्र (United Nations) द्वारा एक राष्ट्र की प्रगति का मूल्यांकन करने के लिए उपयोग किया जाने वाला उपकरण है। एचडीआई को किसी देश के दीर्घकालिक आर्थिक विकास को निर्धारित करने के लिए सबसे विश्वसनीय समग्र माना जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि सेन और पाकिस्तानी अर्थशास्त्री महबूब उल हक इसके निर्माण में भागीदार थे। 1990 में, संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (United Nations Development Programme) ने समय-श्रृंखला तरीके से अपने आंकड़े उपलब्ध कराए।

वह वर्तमान में हार्वर्ड विश्वविद्यालय (Harvard University) में अर्थशास्त्र और दर्शनशास्त्र (Philosophy) के प्रोफेसर के साथ-साथ थॉमस डब्ल्यू लैमोंट विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के पद पर हैं।

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"निरंतर परिवर्तन जीवन का पहिया बदल देता है, और इसलिए वास्तविकता अपने सभी रूपों में बैठती है। शांति से रहें क्योंकि परिवर्तन ही सभी पीड़ित संवेदनशील प्राणियों को मुक्त करता है और उन्हें बहुत खुशी देता है।” - अमर्त्य सेन 

RS

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