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शिक्षा मंत्री निशंक ने युवा दिवस पर शुरूआत करी ‘आई स्किल जूनियर प्रोग्राम’ की

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने मंगलवार को स्वामी विवेकानंद जयंती यानी ‘युवा दिवस’ के अवसर पर ‘आई स्किल जूनियर प्रोग्राम’ का शुभारंभ किया, जिसे खास भारतीय युवाओं को ध्यान में रखकर आई नेचर एजुकेशन सलूशन, बैंगलोर द्वारा डिजाइन किया गया है। यह भारत के युवाओं को भविष्य के नए आयाम सीखने में मदद

केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने मंगलवार को स्वामी विवेकानंद जयंती यानी ‘युवा दिवस’ के अवसर पर ‘आई स्किल जूनियर प्रोग्राम’ का शुभारंभ किया, जिसे खास भारतीय युवाओं को ध्यान में रखकर आई नेचर एजुकेशन सलूशन, बैंगलोर द्वारा डिजाइन किया गया है। यह भारत के युवाओं को भविष्य के नए आयाम सीखने में मदद करेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा, “भारत युवाओं का देश है और विवेकानंदजी ने हमेशा से युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार के प्रयोग और प्रोग्राम युवाओं को नई दिशा देंगे और विवेकानंदजी के सपनों के भारत को स्थापित करने में मदद देंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 ने हमारे देश में शिक्षा के लिए बहुत प्रगतिशील दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है और कई अवसर खोले हैं।”

छात्रों और कौशल भारत के राष्ट्रीय मिशन के लिए कई सीखने के मार्ग की शुरुआत से प्रेरित होकर, आई नेचर ने आई स्किल जूनियर को डिजाइन किया है, जो सीखने का एक अभिनव मॉडल है जो आज के छात्रों को भविष्य के लिए तैयार होने में सक्षम करेगा।


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छात्रों के लिए क्यों ख़ास है यह प्रोग्राम

ये प्रोग्राम छात्रों को सीखने के एक नए अनुभव के उद्देश्य से बनाया गया है, जो छात्रों की जन्मजात क्षमता को बढ़ने में मदद करता है और उन्हें 21वीं सदी के कौशल प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करता है जो उन्हें स्मार्ट निर्णय लेने में मदद करेगा और उन्हें भविष्य के लिए तैयार करेगा। डॉ. निशंक ने कहा, “स्वामी विवेकानंदजी की जयंती पर मैं स्वामीजी को नमन करता हूं और देश के युवाओं को अनेक शुभकामनाएं प्रदान करता हूं।”

उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत की दृष्टि और भारत की प्रगति का संकल्प लेने वाले युवाओं को भारतीय दर्शन से प्राप्त होने वाला आनंद ही विवेकानंद है। आई नेचर एजुकेशन के अध्यक्ष सुजय नायर ने जोर देकर कहा, “इस प्रोग्राम की स्थापना, अनुसंधान, एडैप्टेशन और खुद के अनुभव से सीखने के मॉडल पर की गई है, जो छात्रों को नए आकर्षक अनुभव और एक अवसर प्रदान करता है।”

उन्होंने कहा कि ये प्रोग्राम पूरे भारत में लाखों छात्रों के लिए नि:शुल्क चलाया जाएगा, ताकि इसका लाभ सभी युवा ले सकें। वहीं, शिक्षा मंत्री ने स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा, “उनका हिमालय से गहरा प्रेम था और स्वामीजी ने कहा है कि ये पहाड़ हमारी सभ्यता की अति सुंदर स्मृतियों से जुड़े हुए हैं। अगर धार्मिक भारत से हिमालय को निकाल दिया जाए तो हमारे पास बताने के लिए शेष बहुत कम रह जाता है। उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य में भी आई स्किल जूनियर प्रोग्राम हिमालया विश्वश्विद्यालय के साथ चलाया जाएगा।” (आईएसएनएस)

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भारत का खूबसूरत क्षेत्र कोडाईकनाल।(Unsplash)

भारत के तमिलनाडु राज्य में स्थित कोडाईकनाल एक पर्वतीय नगर है। यह समुद्र तल 2133 मी. की ऊंचाई पर पिलानी नामक पहाड़ पे बसा हैं। ये अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण से सब को मनमोहित कर देता है । खूबसूरत प्राकृतिक दृश्य के कारण इसे भारत का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता हैं। यहां पर घूमने का मजा तब बढ़ जाता है, जब मानसून दस्तक देता है, क्योंकि इस समय यहां के झरने वादियां और भी खूबसूरत हो जाते हैं। यहां कुरिंजी नामक एक फूल है जो कि 12 वर्षों में खिलता है, जिससे यहां की पहाड़ियों में सुंदरता और निखरती है और इसकी महक मदहोश कर देने वाली होती है। कोडाईकनाल में प्रकृति की सुंदरता अपने तमाम रूपों में नजर आती है। विशाल चट्टान , शांत झील ,फलों के बगीचे और यहां के हरे भरे दृश्य अपनी सुंदरता की कहानियां व्यक्त करते हैं। मानसून में यह जगह जन्नत सी नजर आती है। यहां पर लोग पिकनिक मनाने , घूमने फिरने , या हनीमून के लिए आते हैं।

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देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटें। (IANS)

राम भक्तों द्वारा दी गई और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) (Vishwa Hindu Parishad) द्वारा तीन दशक लंबे मंदिर आंदोलन के दौरान देश भर से जमा की गई 2 लाख से अधिक ईंटों का इस्तेमाल अब राम जन्मभूमि स्थल पर भव्य मंदिर का निर्माण के लिए किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने कहा, "1989 के 'शिलान्यास' के दौरान कारसेवकों द्वारा राम जन्मभूमि पर एक लाख पत्थर रखे गए थे। कम से कम, 2 लाख पुरानी कार्यशाला में रह गए हैं, जिन्हें अब निर्माण स्थल पर स्थानांतरित कर दिया जाएगा। ईंटों पर भगवान राम का नाम लिखा है और यह करोड़ों भारतीयों की आस्था का प्रमाण है।

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कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। (wikimedia commons)

हिंदू संगठनों की ओर से आलोचना झेल रही कर्नाटक की भाजपा सरकार नें कर्नाटक में मंदिर विध्वंस के मुद्दे पर फिलहाल राज्य विधानसभा में एक कानून पारित कर पुरे कर्नाटक राज्य में मंदिर विध्वंस अभियान पर विराम लगा दिया है। सत्ताधारी पार्टी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस इन दोनों के बीच मंगलवार को तीखी बहस के बीच प्रस्तावित कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक 2021 को पारित कर दिया गया।

यह प्रस्तावित अधिनियम जिसका नाम 'कर्नाटक धार्मिक संरचना (संरक्षण) विधेयक-2021' है, इसका मुख्य उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार राज्य में धार्मिक संरचनाओं के विध्वंस को रोकना है।

यह अधिनियम में कहा गया है कि 'कर्नाटक धार्मिक संरचना संरक्षण अधिनियम -2021' के लागू होने की तारीख से, कानूनों के कानूनी प्रावधान और अदालतों, न्यायशास्त्र और अधिकारियों के आदेशों या दिशानिदेशरें के बावजूद, सरकार धार्मिक केंद्रों की रक्षा करेगी।

सार्वजनिक संपत्तियों पर बने धार्मिक केंद्रों को खाली करने, स्थानांतरित करने और ध्वस्त करने की प्रक्रिया को रोक दिया जाएगा। इस अधिनियम के लागू होने और विधान परिषद में पारित होने के बाद से ही ।

इसी बीच विपक्ष के नेता सिद्धारमैया ने कर्नाटक सरकार पर आरोप लगाया कि हिंदू जागरण वेदिक और हिंदू महासभा की आलोचना का सामना करने के बाद भाजपा यह कानून लाई है। मैसूर में मंदिर तोड़े जाने के बाद बीजेपी पुनर्निर्माण के लिए नया कानून ला रही है, यह भी आरोप लगायें हैं उन्होंने भाजपा पार्टी के खिलाफ । इसके बाद कांग्रेस के एक और विधायक और पूर्व मंत्री औरयू.टी. खादर ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि छात्र पाठ्यपुस्तकों में पढ़ने जा रहे हैं कि भाजपा ने भारत में आक्रमणकारियों की तरह मंदिरों को ध्वस्त कर दिया।

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