बॉलीवुड के 8 एक्टर्स जिनके धार्मिक बयानों से भड़क उठी जनता!

बॉलीवुड (Bollywood) के सितारे सिर्फ बड़े पर्दे पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहसों के कारण भी अक्सर सुर्खियों में आ जाते हैं।
कंगना रनौत मीडिया को इंटरव्यू देते हुए
8 बॉलीवुड (Bollywood) अभिनेता जो धार्मिक विवादों में फंसे Ai
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बॉलीवुड (Bollywood) के सितारे सिर्फ बड़े पर्दे पर ही नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहसों के कारण भी अक्सर सुर्खियों में आ जाते हैं। कभी किसी अभिनेता के फिल्म का दृश्य, कभी सामाजिक या धार्मिक टिप्पणियाँ, तो कभी उनके द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट विवाद पैदा कर देता है। कभी‑कभी तो यह विवाद इतना बढ़ जाता है कि सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुँच जाता हैं या फिर किसी कारण से सोशल मीडिया पर बहस छिड़ जाती है।

आज हम आपको ऐसे 8 बॉलीवुड (Bollywood) अभिनेता के बारे में बताने जा रहे हैं, जो धार्मिक विवादों में फंसे और जिनकी टिप्पणियों या फिल्मों ने जनता के धार्मिक मान्यताओं को ठेस पहुंचाई।

शाहरुख़ खान

शाहरुख़ खान (Shahrukh Khan) कई बार मीडिया और सोशल मीडिया पर धार्मिक बयानों और विवादों के कारण फंसे हैं। लेकिन उनमें से कई AI या एडिटेड बयान भी रहे हैं। एक वास्तविक विवाद 2015 का था जब उन्होंने धर्मनिरपेक्षता (Secularism) और धार्मिक असहिष्णुता (Religious Intolerance) पर अपनी राय दी थी। उन्होंने कहा कि धार्मिक असहिष्णुता भारत को पिछड़े युग में ले जा सकती है और देश में सबका सम्मान होना चाहिए।

उनके (शाहरुख के) इस बयान को कुछ समूहों ने नजरअंदाज़ किया तो कुछ ने इसे धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने वाला बताया, जिससे उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा। हाल के समय में IPL 2026 के संदर्भ में भी विवाद उठा जब शाहरुख़ खान की टीम ने बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिज़ुर रहमान को खरीदा, जिसके बाद कुछ लोगों ने उन्हें ‘देशद्रोही’ तक कह दिया।

नुसरत भरूचा

नुसरत भरूचा (Nusrat Bharucha) हाल ही में उज्जैन के प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में दर्शन और भस्म आरती में शामिल हुईं, जो एक शांतिपूर्ण धार्मिक यात्रा थी। लेकिन यह कदम कुछ लोगों के लिए विवाद का कारण बन गया। क्योंकि नुसरत मुस्लिम धर्म से हैं। एक मुस्लिम धार्मिक नेता मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी ने उनके मंदिर दर्शन को इस्लाम के खिलाफ “गुनाह‑ए‑अज़ीम” बताया और कहा कि यह शरीयत के खिलाफ है और उन्हें तौबा करके कलमा पढ़ना चाहिए। इससे सोशल मीडिया पर बड़ी बहस शुरू हो गई।

लोगों की प्रतिक्रियाएँ दो हिस्सों में बंटीं कुछ ने नुसरत की धार्मिक सहिष्णुता और पर्सनल चॉइस की सराहना की, जबकि दूसरे ने उनके कदम को धार्मिक भावनाओं को लेकर असंवेदनशील बताया। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर खुलकर बहस की कि किसी का निजी विश्वास और पूजा‑अर्चना उनकी आज़ादी है।

रणवीर सिंह

रणवीर सिंह (Ranveer Singh) 2025 में कांतारा फिल्‍म से जुड़े धार्मिक विवाद में फँसे थे। यह मामला IFFI (इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया) के समापन समारोह में हुआ, जहाँ रणवीर ने कांतारा: चैप्टर 1 के एक सीन की मिमिक्री की और कथित तौर पर फिल्म में दिखाए गए देवी/दैव तत्व (चामुंडी दैवा) को “भूत” कहा। इससे कुछ दर्शक और विशेषकर तुलु समुदाय के लोगों की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे संस्कृति और धार्मिक प्रतीकों का अपमान बताया और हिन्दू जनजागृति समिति समेत कुछ समूहों ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई। बाद में रणवीर सिंह ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज़ पर अपने बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगी और कहा कि उनकी मंशा किसी की भावना को ठेस पहुंचाने का नहीं था, बल्कि उन्होंने कांतारा की शानदार अभिनय क्षमता की तारीफ करने के लिए ऐसा किया था।

दीपिका पादुकोण

दीपिका पादुकोण (Deepika Padukone) कई बार धार्मिक और सांस्कृतिक विवादों में फँसी हैं, खासकर फिल्म पद्मावत को लेकर। फिल्म के रिलीज़ से पहले कुछ समूहों ने दावा किया कि इसमें रानी पद्मावती और अलाउद्दीन खिलजी के बीच एक रोमांटिक दृश्य दिखाया गया है, जिससे धार्मिक और ऐतिहासिक भावनाओं को ठेस पहुँच सकती हैं। इन विरोधों के बीच दीपिका ने कहा था कि वे फिल्म के बारे में कोई नकारात्मक बयान नहीं देना चाहतीं। इस मामले पर लोगों की प्रतिक्रियाएँ दो‑तरफ़ा रहीं। कुछ ने विरोध करते हुए कहा कि फिल्म धार्मिक भावनाओं के खिलाफ़ है, जबकि अन्य ने दीपिका का समर्थन किया और कहा कि कलाकार फिल्म की कहानियों को निभाते हैं न कि वास्तविक इतिहास बदलते हैं।

सनी देओल

सनी देओल (Suny Deol) 2025 में अपनी फिल्म “जाट” को लेकर धार्मिक विवाद में फँसे, जब फिल्म का एक चर्च (Church) सीन ईसाई समुदाय को धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाला लगा। फिल्म में एक दृश्य दिखाया गया जिसमें Randeep Hooda का किरदार चर्च के अंदर क्रुसीफिक्स (क्रूस पर पहाड़ा चित्र) के नीचे खड़ा दिखाया गया और उसके बाद वहाँ हिंसा की झलक दिखाई गई, जिससे कुछ लोगों ने यह कहा कि यह ईसाई विश्वास का गलत प्रतिनिधित्व है।

ईसाई समुदाय के नेताओं ने फिल्म को (पर) धार्मिक अपमान का आरोप लगाते हुए बैन की मांग की और फिल्म के खिलाफ़ FIR दर्ज की। पुलिस ने मामला दर्ज किया और समाज के कुछ हिस्सों ने सोशल मीडिया पर गुस्सा भी जताया। इसके बाद फिल्म के निर्माताओं ने आधिकारिक बयान जारी कर उस विवादित सीन को फिल्म से हटा दिया और कहा कि उनका मकसद किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं था तथा उन्होंने माफी भी माँगी।

आमिर खान

आमिर खान (Aamir Khan) की फिल्म “पीके” जो 2014 में आई थी वह भी धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों के कारण विवाद में फंस गई। फिल्म ने पाखंड, झूठे ग़ुरुओं और धार्मिक रहस्यों पर सवाल उठाए, और कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं को चोट पहुँचाने वाला बताया। आलोचकों ने कहा कि फिल्म धर्म का मज़ाक उड़ा रही है और इसमें पुराने रीति‑रिवाज़ों को गलत दिखाया गया है। जब विवाद बढ़ा, तो आमिर खान ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया कि “पीके किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं है और वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।” उन्होंने कहा कि फिल्म का उद्देश्य धर्म के नाम पर लोगों को फ़ायदा पहुंचाने वालों को दिखाना था, न कि किसी विश्वास को अपमानित करना।

आमिर खान ने यह भी जोड़ा कि इंटरफेथ प्रेम को ‘लव जिहाद’ कहना गलत है और यह “मानवता” के बारे में है। लोगों की प्रतिक्रियाएँ मिश्रित रहीं कुछ दर्शकों ने फिल्म के संदेश और सत्यता को सराहा, जबकि कुछ समूहों ने इसे धार्मिक भावना के खिलाफ़ बताते हुए सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना की।

अक्षय कुमार

अक्षय कुमार (Akshay Kumar) एक बयान के कारण धार्मिक विवाद में आए थे जब उन्होंने “मैं किसी धर्म को नहीं मानता, मैं केवल भारतीय होने में विश्वास रखता हूँ” कहा था। यह बयान उन्होंने अपने फिल्म सूर्यवंशी (Sooryavanshi) के प्रमोशन के दौरान दिया था, जिसमें उन्होंने कहा कि वे किसी विशेष धर्म में नहीं मानते बल्कि सबसे पहले भारतीय होने पर जोर देते हैं। इसका मतलब उन्होंने यह समझाया कि धर्म से ऊपर देशभक्ति है।

लेकिन कुछ लोगों ने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान समझ लिया और सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू हो गई। कई यूज़र्स ने कहा कि यह बयान धार्मिक असम्मान जैसा लगता है और इसे संवेदनशील धार्मिक मुद्दों पर अपमान के रूप में देखा गया। वहीं दूसरे लोगों ने अक्षय की बात का समर्थन किया और कहा कि वे सब धर्मों का सम्मान करते हैं और उनके शब्दों को गलत तरीके से पेश किया गया है। इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ देखने को मिलीं, जिसमें समर्थन और विरोध दोनों शामिल थे।

कंगना रनौत

कंगना रनौत (Kangana Ranaut) कई बार धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर विवादों में रहीं। एक प्रमुख विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने ज्ञानवापी मस्जिद विवाद पर बयान देते हुए कहा कि “काशी के कण‑कण में महादेव हैं”, जिससे कुछ वर्गों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा।

इसके अलावा गांधी जयंती पर कंगना के बयान – “देश के पिता नहीं, देश के लाल होते हैं” जैसे कथित बयानों ने भी लोगों की संवेदनशीलता को भड़काया, खासकर जब कुछ राजनीतिक समूहों ने इसे महात्मा गांधी के प्रति असम्मान के रूप में लिया।

इन टिप्पणियों पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं। कुछ लोगों ने कंगना की बातों को धार्मिक प्रतीकों के प्रति अनादर बताया और आलोचना की। [Rh]

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