बॉलीवुड के 'शराबी': बोतल छुई तक नहीं और शानदार एक्टिंग से लोगों को हैरात में डाला

हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार आए, जिन्होंने अभिनय से दर्शकों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। इनमें सबसे खास और यादगार नाम है जॉनी वॉकर का। जॉनी वॉकर ने अपनी अदाकारी से न सिर्फ लोगों को हंसाया बल्कि उन्हें अपनी एक्टिंग के जादू में भी बांध लिया। उनकी फिल्मों में अक्सर शराबी का किरदार देखने को मिलता था।
जॉनी वॉकर
जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था। IANS
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उनकी हर अदा और हाव-भाव से ऐसा लगता था कि जैसे वे असली शराबी हैं। लेकिन हकीकत में जॉनी वॉकर ने कभी भी शराब नहीं पी थी।

जॉनी वॉकर (Johny Walker) का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी था। उनका जन्म 11 नवंबर 1920 को मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में हुआ था। उनके पिता एक फैक्ट्री में मजदूरी किया करते थे। परिवार की मुश्किल हालातों की वजह से जॉनी ने छोटी उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया। इंदौर में उन्होंने अंडे, मूंगफली और सब्जियां बेचकर अपने परिवार की मदद की।

जब फैक्ट्री बंद हुई, तो जॉनी वॉकर और उनका पूरा परिवार मुंबई आ गया। मुंबई में जॉनी ने बॉम्बे इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट में बस कंडक्टर की नौकरी शुरू की। इस नौकरी में उन्हें कुछ रुपए महीने मिलते थे। लेकिन, जॉनी अपने मजेदार अंदाज और हंसी-मजाक से यात्रियों का मनोरंजन करते थे। यही अंदाज उनके अभिनय का शुरुआती कदम साबित हुआ।

मुंबई में बस कंडक्टर के तौर पर काम करते हुए जॉनी की किस्मत ने उन्हें फिल्म जगत में लाकर खड़ा कर दिया। अभिनेता बलराज साहनी ने जॉनी की प्रतिभा देखी और उन्हें गुरु दत्त से मिलने के लिए कहा। गुरु दत्त उस समय अपनी फिल्म 'बाजी' की शूटिंग की तैयारी में थे। जॉनी ने गुरु दत्त के सामने शराबी का रोल निभाया। उनकी अदाकारी इतनी असली लगी कि गुरु दत्त ने उन्हें फिल्म 'बाजी' में साइन कर लिया और यहीं से जॉनी वॉकर का फिल्मी सफर शुरू हुआ।

जॉनी वॉकर ने अपने करियर में करीब 300 फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्में सिर्फ हास्य तक सीमित नहीं थीं। वे कई बार फिल्मों में गाने और स्टोरीलाइन का अहम हिस्सा भी बने। उनकी लोकप्रिय फिल्मों में 'मधुमती', 'जाल', 'आंधियां', 'नया दौर', 'टैक्सी ड्राइवर', 'मुझसे शादी करोगी', और 'कागज के फूल' जैसे नाम शामिल हैं। उनके अभिनय की खास बात यह थी कि शराबी का किरदार निभाने के बावजूद वे असल जीवन में शराब से दूर रहे। उनके अभिनय को देखकर लोग हैरान रह जाते थे, लेकिन असल में जॉनी कभी नशे के करीब भी नहीं गए।

जॉनी वॉकर ने फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे काम किए जो पहले किसी ने नहीं किए। वे बॉलीवुड के पहले ऐसे अभिनेता थे जिन्होंने अपना मैनेजर रखा। इसके अलावा, उन्होंने फिल्मों में आम बोलचाल की भाषा और सेट पर संडे को काम न करने जैसे नए ट्रेंड भी शुरू किए।

उनकी कॉमेडी और एक्टिंग के लिए उन्हें कई पुरस्कार भी मिले। उन्हें फिल्म 'मधुमती' के लिए स्पोर्टिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवार्ड मिला और बाद में सर्वश्रेष्ठ हास्य कलाकार का पुरस्कार भी मिला। जॉनी वॉकर ने अपने लंबे करियर में कई बड़े निर्देशकों और अभिनेताओं के साथ काम किया।

जॉनी वॉकर ने फिल्मों से संन्यास ले लिया, लेकिन 1998 में कमल हासन और गुलजार के आग्रह पर उन्होंने फिल्म 'चाची 420' में छोटा सा रोल किया। इस फिल्म में उनके छोटे से किरदार ने भी दर्शकों का दिल जीत लिया। जॉनी वॉकर का देहांत 29 जुलाई 2003 को मुंबई में हुआ, लेकिन उनकी हंसी, सादगी और शराबी की बेहतरीन एक्टिंग आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

(BA)

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