

कई मशहूर अभिनेताओं ने अपनी लोकप्रियता के दम पर राजनीति में कदम रखा। कुछ ने जनता का भरोसा जीतकर सत्ता और बड़े पद हासिल किए, जबकि कुछ को असफलता भी मिली।
एम. जी. रामचंद्रन, एन. टी. रामाराव और जयललिता जैसे सितारे राजनीति में बेहद सफल रहे। वहीं अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना और गोविंदा जैसे कलाकार ज्यादा समय तक राजनीति में नहीं टिक पाए।
हेमा मालिनी, शत्रुघ्न सिन्हा, पवन कल्याण और सनी देओल जैसे अभिनेता आज भी राजनीति में सक्रिय हैं। इससे साफ है कि फिल्मों से राजनीति तक का सफर मेहनत और जनसमर्थन पर निर्भर करता है।
बॉलीवुड के सितारे हमेशा से ही लोगों की ज़िंदगी पर गहरा असर डालते आए हैं। बड़े पर्दे पर तालियाँ बटोरने वाले कई अभिनेता जब राजनीति में उतरे, तो उनके नाम और चेहरे ने जनता का ध्यान तुरंत खींचा। यही वजह है कि आज़ादी के बाद से लेकर अब तक कई फिल्मी सितारों ने राजनीति में भी अपनी किस्मत आज़माई। कुछ अभिनेता ऐसे रहे, जिन्होंने जनता का भरोसा जीता और सत्ता तक पहुँचे, तो कुछ को राजनीति की कड़वी सच्चाई का सामना करना पड़ा और वे हार के बाद दोबारा फिल्मों की दुनिया में लौट गए।
राजनीति की दुनिया फिल्मों से बिल्कुल अलग होती है। यहाँ सिर्फ लोकप्रिय चेहरा होना काफी नहीं होता, बल्कि ज़मीन से जुड़ाव, संगठन और लगातार मेहनत की ज़रूरत होती है। यही कारण है कि एम. जी. रामचंद्रन, एन. टी. रामाराव, जयललिता जैसे कलाकार राजनीति में बेहद सफल रहे, जबकि कई सितारे चुनाव हारने के बाद राजनीति से दूर हो गए।
आज हम आपको ऐसे 15 एक्टर्स (15 actors who entered politics) के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने फिल्मी पर्दे से निकलकर संसद और विधानसभा तक का सफर तय किया। इनमें कुछ राजनीति के सुपरस्टार बने, तो कुछ के लिए यह सफर एक अधूरा सपना साबित हुआ।
एम. जी. रामचंद्रन (M.G Ramachandran) तमिल सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टारों में से एक थे, जिन्होंने अपनी लोकप्रियता का राजनीति में भरपूर इस्तेमाल किया। उन्होंने 1950 के दशक में राजनीति में कदम रखा और पहले डीएमके (DMK ) से जुड़े। 1972 में उन्होंने अपनी पार्टी AIADMK बनाई। MGR 1977 से 1987 तक तमिलनाडु के मुख्यमंत्री रहे और तीन बार लगातार सत्ता में आए। उनके कार्यकाल में गरीबों और महिलाओं के लिए कई जनकल्याण योजनाएँ शुरू हुईं। उन्होंने सरकारी स्कूलों में मध्याह्न भोजन योजना को प्रभावी रूप से लागू किया, जिससे बच्चों की स्कूल में उपस्थिति बढ़ी और कुपोषण में कमी आई। महिलाओं, विधवाओं और बुजुर्गों के लिए पेंशन व सहायता योजनाएँ शुरू की गईं, जिससे सामाजिक सुरक्षा मजबूत हुई। शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्तियाँ और मुफ्त सुविधाएँ प्रदान की गईं, वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार से गरीबों को बेहतर और सस्ता इलाज मिला। 24 दिसंबर 1987 को उनका निधन हो गया लेकिन आज भी MGR को तमिलनाडु में एक जननायक और करिश्माई नेता के रूप में याद किया जाता है।
एन. टी. रामाराव (NTR) तेलुगु सिनेमा के महान अभिनेता थे, जिन्होंने देवताओं की भूमिकाओं से भरपूर लोकप्रियता हासिल की। उन्होंने 1982 में राजनीति में प्रवेश किया और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की स्थापना की। NTR 1983 से 1989 तक और फिर 1994 से 1995 तक आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। उन्होंने क्षेत्रीय स्वाभिमान और गरीबों के मुद्दों को राजनीति के केंद्र में रखा। 18 जनवरी 1996 को उनका निधन हो गया, लेकिन आज भी NTR आंध्र प्रदेश में काफ़ी लोकप्रिय हैं।
जयललिता (Jayalalitha) ने अपने करियर की शुरुआत एक सफल तमिल अभिनेत्री के रूप में की, लेकिन बाद में वे राजनीति की सबसे ताकतवर महिलाओं में शामिल हुईं। उन्होंने 1982 में राजनीति में प्रवेश किया और AIADMK से जुड़ीं। जयललिता 1991 से 1996, 2001, 2002–2006 और 2011 से 2016 तक तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं। अपने सख़्त फैसलों और जनकल्याण योजनाओं के कारण वे “अम्मा” के नाम से मशहूर हुईं। जयललिता ने “अम्मा कैंटीन” शुरू की, जहाँ गरीब लोगों को बहुत कम कीमत पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। 5 दिसंबर 2016 को उनका निधन हो गया, पर आज भी जयललिता को तमिलनाडु की सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्री के रूप में याद किया जाता है।
अमिताभ बच्चन (Amitabh Bacchan) भारतीय सिनेमा के महानायक हैं, जिन्होंने कुछ समय के लिए राजनीति में भी कदम रखा। वे 1984 में इलाहाबाद लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। यह समय इंदिरा गांधी की हत्या के बाद का था। अमिताभ बच्चन 1984 से 1987 तक राजनीति में सक्रिय रहे, लेकिन राजनीति के माहौल से निराश होकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अमिताभ बच्चन राजनीति में ज़्यादा समय तक नहीं रहे क्योंकि वे राजनीतिक विवादों और आरोप-प्रत्यारोप से असहज महसूस करने लगे थे। उन्होंने कहा था कि राजनीति की जगह उनका दिल अभिनय और सिनेमा में ही लगता है, इसलिए वे उससे अलग हो गए। इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह राजनीति से अलग कर लिया। अमिताभ बच्चन ने अपनी राजनीतिक सफ़र के दौरान कुछ खास लोकप्रियता हासिल नहीं की थी। वे वापस एक्टिंग की दुनिया में आ गए और आज कौन बनेगा करोड़पति जैसे हिट शो चला रहें हैं।
धर्मेंद्र (Dharmendra) हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता रहे हैं, जिन्होंने फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी कदम रखा। वे 2004 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े और राजस्थान के बीकानेर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। धर्मेंद्र 2004 से 2009 तक लोकसभा सांसद रहे। हालांकि, सक्रिय राजनीति में वे ज़्यादा समय तक नहीं टिके और बाद में चुनाव नहीं लड़ा। धर्मेंद्र का निधन 24 नवंबर 2025 को मुंबई में 89 वर्ष की उम्र में हो गया और बॉलीवुड ने अपना चहिता कलाकार खो दिया।
हेमा मालिनी (Hema Malini) हिंदी सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री होने के साथ-साथ एक सफल राजनेता भी हैं। उन्होंने 1999 में राजनीति में कदम रखा और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ गईं। हेमा मालिनी 2014 से मथुरा लोकसभा सीट से सांसद हैं और लगातार चुनाव जीतती आ रहीं हैं। संसद में वे संस्कृति, सड़क सुरक्षा और सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय रहती हैं। राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों और कभी-कभार फिल्मों या सार्वजनिक मंचों पर भी नज़र आती हैं। वे आज भी कला और राजनीति दोनों में संतुलन बनाए हुए हैं।
विनोद खन्ना (Vinod khanna) हिंदी सिनेमा के सफल अभिनेता होने के साथ-साथ एक सक्रिय राजनेता भी रहें। उन्होंने 1997 में राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े। विनोद खन्ना 1998 से 2009 तक लगातार लोकसभा सांसद रहे और बाद में 2014 में फिर से सांसद चुने गए। वे केंद्रीय संस्कृति मंत्री और बाद में विदेश राज्य मंत्री भी रहे। 27 अप्रैल 2017 को उनका निधन हो गया। आज उन्हें एक ऐसे अभिनेता के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने सिनेमा और राजनीति दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई।
शत्रुघ्न सिन्हा हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता हैं जिन्होंने बाद में राजनीति में भी लंबा सफर तय किया है। उन्होंने 1980 के दशक में राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़ गए, जहाँ उन्होंने पार्टी के लिए प्रचार किया और बाद में कई बार लोकसभा सांसद भी रहे। उन्होंने 2009 और 2014 के चुनावों में पटना साहिब से लोकसभा सांसद के रूप में जीत भी हासिल की। लेकिन 2019 में बीजेपी ने उन्हें चुनाव के लिए टिकट नहीं दिया, जिसके कारण उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) जॉइन की। उन्होंने कहा कि उन्हें पार्टी में मौका नहीं मिल रहा था और वे जनता की सेवा जारी रखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। इसके बाद मार्च 2022 में शत्रुघ्न सिन्हा ने तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress, AITC) से भी जुड़कर आसनसोल उपचुनाव में हिस्सा लिया और जीत भी हासिल की। अभी वे AITC से जुड़े हैं और लोकसभा के लिए सक्रिय नेता के रूप में काम कर रहे हैं।
राजेश खन्ना (Rajesh khanna) हिंदी सिनेमा के पहले सुपरस्टार थे, जिन्होंने फिल्मों के शिखर पर रहते हुए राजनीति में भी कदम रखा था। उन्होंने 1991 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जॉइन की और 1992 से 1996 तक नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद रहे। संसद में रहते हुए उन्होंने सामाजिक और राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी बात रखी, हालांकि उनका राजनीतिक करियर ज्यादा लंबा नहीं रहा। 18 जुलाई 2012 को राजेश खन्ना का निधन हो गया। हालांकि राजेश खन्ना का राजनीतिक सफर कुछ खास अच्छा नहीं रहा जितना उन्होंने बॉलीवुड में अपनी एक्टिंग से पहचान बनाई थी। राजनीति में वह कुछ खास जादू नहीं बिखेर पाए।
चिरंजीवी तेलुगु सिनेमा के मेगास्टार हैं, जिन्होंने फिल्मों के साथ-साथ राजनीति में भी बड़ा कदम उठाया। उन्होंने 2008 में ‘प्रजा राज्यम पार्टी’ बनाकर राजनीति में प्रवेश किया। बाद में उनकी पार्टी का कांग्रेस में विलय हो गया। चिरंजीवी 2012 से 2014 तक केंद्र सरकार में पर्यटन मंत्री रहे। हालांकि राजनीति में सफलता न मिलने के कारण उन्होंने इस क्षेत्र से धीरे-धीरे दूरी बना ली। वर्तमान में चिरंजीवी सक्रिय राजनीति से दूर हैं और पूरी तरह फिल्मों पर ध्यान दे रहे हैं। वे आज भी तेलुगु सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं और सामाजिक कार्यों में भी समय-समय पर भाग लेते हैं।
कमल हसन भारतीय सिनेमा के बहुमुखी कलाकार हैं, जिन्होंने सामाजिक मुद्दों से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2018 में अपनी राजनीतिक पार्टी “मक्कल निधि मय्यम (MNM)” की स्थापना की और सक्रिय राजनीति शुरू की। कमल हसन ने पारदर्शिता, शिक्षा और सुशासन को अपनी राजनीति का आधार बनाया। हालांकि वे अब तक कोई बड़ा चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन राज्य की राजनीति में उनकी आवाज़ लगातार सुनाई देती रही।
पवन कल्याण तेलुगु सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता हैं, जिन्होंने राजनीति में भी मज़बूत पहचान बनाई। उन्होंने 2014 में “जनसेना पार्टी” की स्थापना कर राजनीति में प्रवेश किया। शुरुआती वर्षों में चुनावी सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने जनता के मुद्दों पर लगातार आवाज़ उठाई। 2024 में हुए आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में वे पिथापुरम सीट से जीते और गठबंधन सरकार बनने के बाद आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने। पवन कल्याण जनसेना पार्टी के प्रमुख और राज्य सरकार में अहम पद पर हैं। राजनीति के साथ-साथ वे सामाजिक आंदोलनों और जनसभाओं में सक्रिय रहते हैं।
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सनी देओल (Sunny Deol) हिंदी सिनेमा के मशहूर अभिनेता हैं, जिन्होंने फिल्मों के साथ राजनीति में भी कदम रखा। उन्होंने 2019 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) जॉइन की और पंजाब के गुरदासपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। संसद में उन्होंने सीमा क्षेत्र, सड़क, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाया। हालांकि शुरुआती दौर में उनकी सक्रियता को लेकर सवाल भी उठे, लेकिन बाद में वे संसदीय कार्यों में नज़र आए। सनी देओल अभी भी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं लेकिन साथ ही बॉलीवुड में भी नजर आते हैं।
गोविंदा (Govinda) हिंदी सिनेमा के लोकप्रिय अभिनेता रहे हैं, जिन्होंने अपने करियर के शिखर पर राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2004 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस जॉइन किया और महाराष्ट्र की मुंबई नॉर्थ लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। गोविंदा 2004 से 2009 तक सांसद रहे और इस दौरान संसद में सामाजिक और जनहित के मुद्दों पर अपनी बात रखी। हालांकि राजनीति में उन्हें संतोष नहीं मिला। 2009 के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली। फ़िलहाल गोविंदा राजनीति से दूर हैं और कभी-कभार फिल्मों, टीवी शोज़ और सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देते हैं। [Rh]