क्रिकेट का सितारा और बॉलीवुड की रानी – एक अधूरी कहानी

रवि शास्त्री (Ravi Shastri) और अमृता सिंह (Amrita Singh) का रिश्ता 1980 के दशक में सुर्खियों में रहा, लेकिन शादी को लेकर विचारों में टकराव ने इस प्यार को अधूरा छोड़ दिया। रवि की परंपरागत सोच और अमृता के स्वतंत्र करियर के फैसले ने दोनों को अलग रास्तों पर जाने के लिए मजबूर कर दिया।
रवि शास्त्री (Ravi Shastri)
क्रिकेट के चमकते सितारे रवि शास्त्री और बॉलीवुड की सुपरहिट अभिनेत्री अमृता सिंह के बीच रिश्ता शुरू हुआ, तो वह हर अखबार और पत्रिका की सुर्खियां बन गया।Wikimedia commons
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क्रिकेट और सिनेमा का संगम

1980 और 1990 का दशक भारत में क्रिकेट (Cricket)और सिनेमा दोनों का स्वर्णिम समय था। इन दोनों क्षेत्रों की हस्तियां आम लोगों के लिए हीरो जैसी होती थीं। जब क्रिकेट के चमकते सितारे रवि शास्त्री (Ravi Shastri) और बॉलीवुड की सुपरहिट अभिनेत्री अमृता सिंह के बीच रिश्ता शुरू हुआ, तो वह हर अखबार और पत्रिका की सुर्खियां बन गया। यह एक ऐसा दौर था जब लोगों को इनका साथ एक "परफेक्ट कपल" जैसा लगता था।

लेकिन जितना रोमांटिक उनका रिश्ता था, उतना ही दुखद उनका ब्रेकअप भी रहा। इस प्रेम कहानी के पीछे छिपी है समाज की सोच और करियर की प्राथमिकता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की कहानी।

रवि शास्त्री (Ravi Shastri) और अमृता सिंह (Amrita Singh) की पहली मुलाकात 1986 में हुई थी। यह मुलाकात एक प्रसिद्ध फिल्म मैगज़ीन Cine Blitz के फोटोशूट के दौरान हुई थी। कैमरे के सामने दोनों की जोड़ी इतनी शानदार लगती थी कि उनके बीच की केमिस्ट्री हर किसी को दिखने लगी। धीरे-धीरे उनके रोमांस की खबरें अखबारों में आने लगीं। फिर कुछ रिपोर्ट्स के माध्यम से जो भी खबर आयी उसके अनुसार, रवि शास्त्री ने अमृता सिंह को न्यूयॉर्क के एक रेस्टोरेंट में प्रपोज़ किया था। उसके बाद उनकी सगाई की भी अफवाहें भी उड़ने लगीं, हालांकि किसी ने इसकी सार्वजनिक रूप से बताया नहीं था।

रवि शास्त्री (Ravi Shastri)
1980 और 1990 का दशक भारत में क्रिकेट (Cricket)और सिनेमा दोनों का स्वर्णिम समय था। Wikimedia commons

जब रवि और अमृता का रिश्ता शुरू हुआ, तब दोनों ही अपने-अपने क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे थे। रवि शास्त्री भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार ऑलराउंडर बन चुके थे। 1985 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन कर उन्होंने देश को गौरव दिलाया और खुद को एक मैच विनर साबित किया। वहीं, अमृता सिंह बॉलीवुड की सबसे चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल थीं। बेताब, मर्द, चमेली की शादी, और सनी जैसी फिल्में कर चुकीं अमृता का करियर बुलंदियों पर था। वे एक आत्मनिर्भर और मजबूत सोच रखने वाली अभिनेत्री थीं। अमृता और रवि शास्त्री की जोड़ी को मीडिया ने 'ग्लैमरस कपल' का दर्जा दिया था।

हालाँकि उनका रिश्ता काफी गहरा था, लेकिन कुछ समय बाद इसमें दरार आने लगी। इसकी सबसे बड़ी वजह थी रवि शास्त्री की वह सोच जो अमृता के स्वतंत्र व्यक्तित्व से मेल नहीं खा रही थी। रवि शास्त्री (Ravi Shastri) ने एक इंटरव्यू में कहा था, मैं एक अभिनेत्री पत्नी नहीं चाहता। मैं थोड़ा कट्टर हूं। उसका घर उसकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यह बयान अमृता सिंह को अंदर तक चुभ गया। अमृता एक सफल और स्वतंत्र महिला के रूप में वो यह नहीं चाहती थीं कि शादी के बाद उन्हें अपना फिल्मी करियर छोड़ना पड़े। वो जानती थीं कि उनका आत्मसम्मान और करियर उनकी पहचान हैं। इसी तरह से रवि शास्त्री की सोच और अमृता सिंह की स्वतंत्रता के बीच की खाई धीरे-धीरे इतनी गहरी होती चली गई, फिर दोनों ने अलग होने का फैसला कर लिया। यह एक कठिन फैसला था उन दोनों के लिए लेकिन यह निर्णय बहुत ही ज़रूरी था दोनों के लिए।

अमृता सिंह (Amrita Singh) ने कुछ साल बाद, 1991 में अभिनेता सैफ अली खान से शादी कर ली। यह रिश्ता भी काफी चर्चित रहा क्योंकि सैफ उनसे उम्र में 12 साल छोटे थे। अमृता और सैफ के दो बच्चे हुए, सारा अली खान और इब्राहिम अली खान। सारा आज एक सफल अभिनेत्री हैं। 12 साल यह रिश्ता चलने के बाद 2004 में अमृता और सैफ का तलाक हो गया। उसके बाद रवि शास्त्री भी अपने जीवन में आगे बढ़ चुके थे, उन्होंने भी 1990 में अपनी बचपन की दोस्त रितु सिंह से शादी की। इनकी एक बेटी है, अलेका शास्त्री। लेकिन 22 साल बाद, 2012 में उनका तलाक हो गया और बेटी की कस्टडी रितु को मिली। बाद में रवि शास्त्री का नाम अभिनेत्री निमरत कौर से जोड़ा गया, पर दोनों ने इन अफवाहों को खारिज कर दिया।

अमृता सिंह (Amrita Singh)
अमृता एक सफल और स्वतंत्र महिला के रूप में वो यह नहीं चाहती थीं कि शादी के बाद उन्हें अपना फिल्मी करियर छोड़ना पड़े। वो जानती थीं कि उनका आत्मसम्मान और करियर उनकी पहचान हैं। Wikimedia commons

रवि शास्त्री: क्रिकेट करियर

रवि शास्त्री (Ravi Shastri) भारतीय क्रिकेट (Cricket) के सबसे प्रसिद्ध चेहरों और चर्चित आवाज़ों में से एक हैं, लेकिन कमेंटेटर और कोच बनने से पहले वे एक सफल और प्रभावशाली क्रिकेटर रह चुके हैं।

बॉम्बे (अब मुंबई) में जन्मे शास्त्री ने कम उम्र में ही शुरुआत की और जल्दी ही आगे बढ़ गए। सिर्फ़ 17 साल की उम्र में ही वे बॉम्बे रणजी ट्रॉफी टीम में शामिल हो गए, वे उस समय सबसे कम उम्र के खिलाड़ी थे। एक साल बाद, वे भारत के लिए खेल रहे थे। उन्होंने अपना करियर बाएं हाथ के स्पिनर के रूप में शुरू किया, 10वें नंबर पर बल्लेबाजी करते हुए, लेकिन जल्द ही वे क्रम में ऊपर चले गए। आखिरकार, उन्होंने ओपनिंग की और अपने टेस्ट करियर के दौरान हर पोजीशन पर खेला।

रवि शास्त्री (Ravi Shastri)
उनके सबसे बड़े पलों में से एक 1985 में आया, जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट की विश्व चैंपियनशिप जीती। [Wikimedia Commons]Wikimedia commons

शास्त्री की बल्लेबाजी बहुत बचाव करने वाला होता था इसके लिए लोगों के बिच उनका चर्चा भी होता था , उन्होंने 11 टेस्ट शतक बनाए, जिनमें से सात भारत के बाहर थे, जिसमें इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के कठिन दौरे भी शामिल थे। उन्होंने 1980 के दशक में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ 77.75 का प्रभावशाली औसत भी बनाया।

उनके सबसे बड़े पलों में से एक 1985 में आया, जब भारत ने ऑस्ट्रेलिया में क्रिकेट की विश्व चैंपियनशिप जीती। शास्त्री ने उस जीत में अहम भूमिका निभाई और उन्हें प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया और उन्हें ऑडी कार भी मिली। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में एक ओवर में छह छक्के लगाकर इतिहास भी रचा, जो एक दुर्लभ उपलब्धि है।

संन्यास लेने के बाद शास्त्री एक लोकप्रिय कमेंटेटर भी बन गए । उनकी बोल्ड आवाज़ और आकर्षक वन-लाइनर्स भारत के सबसे बड़े क्रिकेटिंग पलों का हिस्सा बन गए, जैसे 2011 विश्व कप की जीत और युवराज सिंह के छह छक्के।

बाद में वे कोचिंग में चले गए। उन्होंने भारत को असफलताओं से उबरने में मदद की और 2017 में विराट कोहली के साथ मिलकर काम करते हुए मुख्य कोच का पद संभाला। उनके नेतृत्व में, भारत ने 2018-19 में ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली टेस्ट सीरीज़ जीती और भारतीय इतिहास की सबसे मज़बूत तेज़ गेंदबाज़ी इकाइयों में से एक विकसित की। हालाँकि भारत 2019 विश्व कप सेमीफाइनल में हार गया, लेकिन शास्त्री को 2021 टी20 विश्व कप तक कोच के रूप में विस्तार दिया गया।

निष्कर्ष

रवि शास्त्री (Ravi Shastri) और अमृता सिंह (Amrita Singh) की कहानी यह दिखाती है कि प्यार में भावनाएं ज़रूरी होती हैं, लेकिन विचारों की समानता और एक-दूसरे की स्वतंत्रता का सम्मान उससे भी ज़्यादा ज़रूरी होता है। अगर रिश्ते में कोई एक व्यक्ति अपने सपनों से समझौता करे, तो वह रिश्ता टिकता नहीं है। उनका रिश्ता भले ही पूरा न हो सका, लेकिन आज भी उनकी कहानी एक मिसाल है, कि कैसे दो मजबूत लोग अपने आत्मसम्मान, करियर और सोच के लिए अलग हो गए, लेकिन जीवन में आगे बढ़े और सफल बने।

यह एक ऐसी प्रेम कहानी है, जो अधूरी होकर भी पूरी लगती है। [Rh/PS]

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