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इतिहास

भारतीय इतिहास से जुड़ा ऐसा सच जिसे आप भी जानकर रह जाएंगे दंग!

भारत के इतिहास को लिबरल और वामपंथी इतिहासकारों ने समय-समय पर तोड़-मरोड़ कर सभी के समक्ष रखा है।

भारत के इतिहास को समय-समय पर गलत ढंग से लिखा गया।(Wikimedia Commons)

भारत के इतिहास को लिबरल और वामपंथी इतिहासकारों ने समय-समय पर तोड़-मरोड़ कर सभी के समक्ष रखा है। चाहे वह मुगलों को हिन्दू मंदिरों का रक्षक बताने में हो या टीपू सुल्तान जैसे क्रूर शासक को महान बताने में, इन सभी ने हर सम्भव प्रयास किया कि देश की जनता और नवयुवकों तक गलत और आधा-अधूरा इतिहास पहुंचे। और इन सब मनगढ़ंत इतिहास के पीछे इनका एक ही तर्क सामने आता है, यह की देश में सौहार्द की स्थिति बनी रहे। किन्तु इस तर्क का न तो सर है और न ही पैर, बस इनके द्वारा एक धर्म विशेष को खुश करने के लिए यह हतकंडे अपनाए गए और कुछ वर्षों तक यह सफल भी रहे। लेकिन अब जब देश के युवा और राष्ट्रवादी नागरिक जागरूक हो रहे हैं, तब सभी तथ्यों को कुरेद-कुरेद कर निकाला जा रहा है। इसका प्रयास पहले भी किया गया था, किन्तु देश में कुछ ऐसे तत्व थे जिन्होंने इन इतिहास को जनता तक पहुंचने नहीं दिया।

आज इतिहास से जुड़ा एक ऐसा ही सत्य आप सबके सामने लाया जाएगा जिसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। किन्तु एक सवाल यह कि क्यों जोधा अकबर के झूठे प्रेम संबंध को दिखाकर मुगलों का बखान किया जाता है? जबकि ऐसे कई राजपूती शासक थे जिनका विवाह मुस्लिम महिलाओं के साथ हुआ था, लेकिन न तो उनकी चर्चा हुई है और न ही किसी उदारवादी इतिहासकार ने इस पर लिखने या कहने की चेष्टा की है। आज हम आपको कुछ ऐसे राजपूती राजाओं से परिचय कराएंगे, जिनकी पत्नी या तो मुगल थीं या उनके प्रेम में कायल थीं।


राजपूती राजा जिनकी पत्नी मुस्लिम थी:
  • अकबर की बेटी शहजादी खानूम से महाराजा अमर सिंह का विवाह हुआ था,
  • कुंवर जगत सिंह ने उड़ीसा के अफगान नवाब कुतुल खां की बेटी मरियम से विवाह किया था,
  • महाराणा सांगा का मुस्लिम सेनापति की बेटी मेहरूनिशां से और अन्य तीन मुस्लिम लड़कियों से विवाह हुआ था,
  • महाराणा कुम्भा का जागीरदार वजीर खां की बेटी के साथ विवाह,
  • बप्पा रावल गजनी के मुस्लिम शासक की बेटी से और 30 से अधिक मुस्लिम राजकुमारियों से विवाह,
  • विक्रम जीत सिंह गोतम का आजमगढ़ की मुस्लिम लड़की से विवाह,
  • जोधपुर के राजा हनुमंत सिंह का मुस्लिम लड़की जुबैदा से विवाह,
  • चन्द्रगुप्त मौर्य का सिकंदर के सेनापति सेल्युकस निकेटर की बेटी हेलेना से विवाह,
  • महाराणा उदय सिंह का एक मुस्लिम लड़की लाला बाई से विवाह,
  • राजा मानसिंह का मुस्लिम लड़की मुबारक से विवाह,
  • अमर कोट के राजा वीरसाल का हमीदा बानो से विवाह,
  • राजा छत्रसाल का हैदराबाद के निजाम की बेटी रूहानी बाई से विवाह,
  • मीर खुरासन की बेटी नूर खुरासन का राजपूत राजा बिंदुसार से विवाह,

जिन मुगलों के अत्याचार को देश ने सहा उन्हें महान कहें?(काल्पनिक चित्र, Unsplash)

अब बात करते हैं उन मुस्लिम महिलाओं की जो थीं राजपूती राजाओं के प्रेम में
  • अलाउद्दीन खिलजी की बेटी फिरोजा जो जालोर के राजकुमार वीरम देव की दीवानी थी, वीरम देव के युद्ध में वीरगति प्राप्त होने पर फिरोजा सती हो गयी थी !
  • औरंगजेब की बेटी जेबुनिशां जो कुँवर छत्रसाल की दीवानी थी, और प्रेम पत्र लिखा करती थी, और छत्रसाल के अलावा किसी और से शादी करने से इनकार कर दिया था !
  • औरंगजेब की पोती और मुहम्मद अकबर की बेटी सफीयतनिशां जो राजकुमार अजीत सिंह के प्रेम में दीवानी थी !
  • इल्तुतमिश की बेटी रजिया सुल्तान जो राजकुमार जागीरदार कर्म चंद्र से प्रेम करती थी !
  • औरंगजेब की बहन भी छत्रपति शिवाजी महाराज की दीवानी थी, शिवाजी से मिलने आया करती थी !
  • राजपूत राजाओं की और भी बहुत सी मुस्लिम पत्नियां थी, लेकिन वह राजपरिवार और धनी वर्ग से नहीं थी !

यह भी पढ़ें: राम एवं रामचरितमानस से क्यों डरते हैं लिब्रलधारी?

अब सवाल यह है कि क्यों जोधा अकबर की जोड़ी को इतिहासकारों ने प्रेम की तस्वीर या ‘खूबसूरत’ प्रेमी जैसे शब्दों से सम्बोधित किया। साथ ही इन दोनों के प्रेम को कितनी चतुराई से फिल्म में दिखाया गया यह हम सबने देखा है। उसमें यह बताने का प्रयास हुआ कि मुगलों ने ही भारत में शांति और सौहार्द को बरकरार रखा। जबकि ‘वास्तविक’ इतिहास कुछ और ही कहता है। इतिहास को देखें तो जो लिब्रलधारी जोधा अकबर के नाम पर इतराते हैं, उन्ही जोधा बाई का नाम अकबर ने मरियम-उज़-ज़मानी रखा था। अब आप कहेंगे कि नाम में क्या रखा है, तो उसका भी जवाब सुनिए! कई इतिहासकार इस बात से साफ मुकर जाते हैं कि जोधा बाई नामक कोई राजपूती महिला अकबर की पत्नी थी। जब इतिहासकारों के मन में इस बात का संशय है कि जोधा बाई का कोई अस्तित्व था भी या नहीं, तब इनकी प्रेम कहानी को किस आधार पर लिब्रलधारियों ने अपने एजेंडा का अभिन्न अंग बना लिया?

(उक्त दिए गए तथ्य सर्व समाज की राष्ट्रीय समाचार पत्रिका के सितंम्बर मास 2019 में छपे आलेख से लिए गए हैं।)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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