Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
देश

बर्ड फ्लू से जुड़े हर सवाल का जवाब जानने के लिए पढ़िए विशेषज्ञों की यह रिपोर्ट

By – आशीष श्रीवास्तव उत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के कई राज्यों में एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के मामलों में छिटपुट वृद्धि देखी जा रही है। हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में 25 हजार से ज्यादा बतख, कौवे और प्रवासी पक्षियों की मौत हो चुकी है। एहतियात बरतने की जरूरत इस

By – आशीष श्रीवास्तव

उत्तर, पश्चिम और दक्षिण भारत के कई राज्यों में एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) के मामलों में छिटपुट वृद्धि देखी जा रही है। हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश और केरल जैसे राज्यों में 25 हजार से ज्यादा बतख, कौवे और प्रवासी पक्षियों की मौत हो चुकी है।


एहतियात बरतने की जरूरत

इस खबर से जनता में दहशत फैलने लगी है। लोग पहले ही कोविड-19 संक्रमण के कारण सदमे में हैं और बर्ड फ्लू जैसी एक और वायरल बीमारी आ गई है। लोगों को डर है कि कहीं ये भी महामारी में न बदल जाए। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने ऐसी संभावना को नकार दिया है और जनता को डरने के बजाय एहतियात बरतने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि बर्ड फ्लू का कारण बनने वाले एच5एन1 वायरस के इंसान से इंसान में संचरित होने का जोखिम दुर्लभ है। ऐसा तब ही संभव है जब कोई व्यक्ति पक्षियों की संक्रमित प्रजातियों के साथ निकटता में काम करे।

अभी तक मुर्गी पालन से जुड़े पक्षियों में एच5एन1 वायरस की मौजूदगी नहीं पाई गई है। (Wikimedia Commons)

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिशन के प्रोफेसर डॉ. हर्षल आर. साल्वे ने आईएएनएस से कहा, “जो लोग पोल्ट्री के साथ करीब से काम करते हैं उन्हें संक्रमण होने का खतरा अधिक होता है। वरना एच5एन1 वायरस के इंसान में संचरण होने का खतरा बहुत कम होता है, लिहाजा घबराने की जरूरत नहीं है।”

मैक्स सुपरस्पेशिलिटी हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. राजीव गुप्ता कहते हैं, “बर्ड फ्लू का पता बीमार पक्षियों में लगाया जाता है।”

यह भी पढ़ें – शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है तलाक : अध्ययन

अधपके पोल्ट्री प्रोडक्ट और मीट खाने से बचें

इसी तरह मेडियोर कुतुब इंस्टीट्यूशनल एरिया (दिल्ली) में प्रिवेंटिव हेल्थ एंड कंसल्टेंट मेडिसिन की प्रमुख डॉ. उपली नंदा ने यह भी कहा कि एवियन इन्फ्लुएंजा के इंसान से इंसान में फैलने की आशंका बहुत कम है। इस बीच लोगों ने अंडे और चिकन खाना बंद कर दिया है कि कहीं इन्हें खाने से वे एच5एन1 वायरस से संक्रमित न हो जाएं। जबकि एवियन इन्फ्लुएंजा के प्रसार और अंडों के सेवन के बीच कोई संबंध ही नहीं है। डॉक्टरों ने डर को दूर करने के लिए कुछ समय तक अधपके पोल्ट्री प्रोडक्ट और मीट खाने से बचने का सुझाव दिया है।

एवियन इन्फ्लुएंजा के प्रसार और अंडों के सेवन के बीच कोई संबंध नहीं है। (Wikimedia Commons)

डॉ. साल्वे ने कहा है, “ऐसे कोई सबूत उपलब्ध नहीं है जो मांस या अंडे खाने से बर्ड फ्लू होने की बात कहते हों। फिर भी जब तक इसके मामले आना कम नहीं हो जाता है, तब तक प्रभावित क्षेत्र में कच्चे मांस और अंडे खाने से बचना चाहिए।”

डॉ. नंदा ने कहा, “लोगों को सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए। कच्चा मीट और अंडे को छूने से पहले और बाद में अपने हाथों को गर्म पानी और साबुन से धोएं। कच्चे मांस को पकाते समय सुनिश्चित करें कि वह अच्छी तरह पके। मुर्गियों के सीधे संपर्क में आने से बचें। यदि मार्केट में जाने के दौरान इनके संपर्क में आना पड़े तो मास्क और ग्लब्स पहनें।”

अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए – Here Is Why Routine Eye Check-Up Is Important For Older Adults

मुर्गियों में अब तक बर्ड फ्लू नहीं मिला है

जानवरों में बीमारियों का पता लगाने वाले नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज ने आईएएनएस को बताया है कि अभी तक मुर्गी पालन से जुड़े पक्षियों में एच5एन1 वायरस की मौजूदगी नहीं पाई गई है। देश की राजधानी के सबसे बड़े पोल्ट्री मार्केट गाजीपुर मंडी के अध्यक्ष ने भी आईएएनएस को बताया है कि मुर्गियों में अब बर्ड फ्लू नहीं मिला है। (आईएएनएस)

Popular

यूनेस्को को पूर्व पेंटागन अधिकारी, माइकल रुबिन की फटकार (Wikimedia Commons)

माइकल रुबिन, जो एक पूर्व पेंटागन सलाहकार रह चुके हैं, का मानना हैं कि यूनेस्को को न केवल अफगानिस्तान, बल्कि पाकिस्तान को भी अपने संस्था से बाहर कर देना चाहिए क्योंकि दोनों ही देश यूनेस्को की सहायता के योग्य नहीं है। उनका यह भी कहना है कि चीन भी इसी काबिल है। तीनों वर्तमान में यूनेस्को के कार्यपालक समिति में हैं, जबकि तीनों इसके बिल्कुल भी योग्य नहीं है। रुबिन, वाशिंगटन एक्जामिनर में लिखते हैं कि, "सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने के बजाय, यूनेस्को के भ्रष्टाचार ने इसे विनाश का उत्प्रेरक बना दिया है। अफगानिस्तान में, दुनिया को तालिबान को जिम्मेदार ठहराना चाहिए"।

रुबिन आगे कहते हैं कि किस तरह अफगानिस्तान में तालिबान, अफगानिस्तान की सांस्कृतिक विरासत को मिटाने के लिए व्यवस्थित रूप से प्रयास कर रहा है। वे पाकिस्तानी अधिकारियों के इशारे पर ऐसा करते हैं, जो पश्तून राष्ट्रवाद से डरते हैं और विभिन्न अफगान राजवंशों की विरासत के साथ-साथ इसके इतिहास की गहराई को मिटाना चाहते हैं। अफगानी विरासत को खत्म करके, पाकिस्तान अपनी भविष्य की भूमि हथियाने को सही ठहरा सकता है ।

Keep Reading Show less

एप्पल वॉच,सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एक नए अध्ययन से जानकारी समाने आया है कि एप्पल वॉच सीरीज 6 'नियंत्रित परिस्थितियों में फेफड़ों की बीमारियों के रोगियों में हृदय गति और ऑक्सीजन संतृप्ति (एसपीओ2) प्राप्त करने का एक विश्वसनीय तरीका है।'

जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन ने 9टू5मैक की रिपोर्ट 'एप्पल वॉच डिवाइस कमर्शियल ऑक्सीमीटर के बीच मजबूत सकारात्मक सहसंबंध' देखा गया है।

ऐप्पल वॉच या वाणिज्यिक ऑक्सीमीटर उपकरणों में त्वचा के रंग, कलाई की परिधि, कलाई के बालों की उपस्थिति और एसपीओ 2 के लिए तामचीनी कील और हृदय गति माप के मूल्यांकन में कोई सांख्यिकीय अंतर नहीं था।

साओ पाउलो विश्वविद्यालय की ओर से अध्ययन एक आउट पेशेंट न्यूमोलॉजी क्लिनिक से क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और इंटरस्टिशियल लंग डिजीज के 100 रोगियों के साथ किया गया।

इसने ऐप्पल वॉच सीरीज 6 के साथ एसपीओ 2 और हृदय गति डेटा एकत्र किया और उनकी तुलना दो वाणिज्यिक पल्स ऑक्सीमीटर से की।

परीक्षण स्वस्थ व्यक्तियों, इंटरस्टीशियल लंग डिजीज और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज वाले लोगों के साथ किए गए थे।

oximeter, corona virus, covid 19 कोरोना काल में ऑक्सीमीटर का सबसे अधिक उपयोग किया गया है।(Pixabay)

Keep Reading Show less
बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार। (Twitter, Nitish Kumar)

जातीय जनगणना को लेकर बिहार में सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के दो बडे दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (युनाइटेड) अब सीधे तौर पर आमने-सामने नजर आने लगे हैं। केंद्र की भाजपा नीत राजग सरकार जहां जाति आधारित जनगणना कराने से इंकार कर रही है वहीं जदयू के नेता नीतीश कुमार इस मामले को लेकर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ मुखर हैं। ऐसे में कयास लगाया जाने लगा है कि क्या फिर से बिहार की सियासी समीकण बदलेंगे। हालांकि इस मुद्दे को लेकर कोई भी नेता अब तक खुलकर बात नहीं कर रही है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दिल्ली में रविवार को स्पष्ट कर चुके हैं कि जाति जनगणना देश के लिए जरूरी है। उन्होंने दिल्ली में कहा कि केंद्र सरकार को जातिगत जनगणना करानी चाहिए। इसके कई फायदे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के पहले जनगणना हुई थी, आजादी के बाद नहीं हुई। जातीय जनगणना होगी तभी लोगों के बारे में सही जानकारी होगी। तब पता चलेगा कि जो पीछे है, उसे आगे कैसे किया जाए। जातीय के साथ उपजातीय जनगणना भी कराई जाए। उन्होंने यह भी कहा कि इसको लेकर एक बार फिर राज्य में सभी दलों के साथ बैठक कर आगे का निर्णय लेंगे। नीतीश के इस बयान के बाद तय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जातिगत जनगणना के मामले में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। इधर, भाजपा के नेता इसमें व्यवहारिक दिक्कत बता रहे हैं।

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुशील कुमार मोदी कहते हैं कि तकनीकी और व्यवहारिक तौर पर केंद्र सरकार के लिए जातीय जनगणना कराना संभव नहीं है। इस बाबत केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार अगर चाहे तो वे जातीय जनगणना कराने के लिए स्वतंत्र है।


Keep reading... Show less