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देश

Hacking के जरिए किया जा रहा किसानों का समर्थन, रैंसमवेयर हमले में दी गई चेतावनी

भारत में किसानों के विरोध का समर्थन करने के लिए साइबर अपराधियों ने एक अनोखे तरीके से देश में एक नया रैंसमवेयर हमला लॉन्च किया है, जो पैसे की मांग के लिए नहीं, बल्कि समुदाय के लिए न्याय की मांग करता है।

भारत में किसानों के विरोध का समर्थन करने के लिए साइबर अपराधियों ने एक अनोखे तरीके से देश में एक नया रैंसमवेयर ( Ransomware )  हमला लॉन्च किया है, जो पैसे की मांग के लिए नहीं, बल्कि समुदाय के लिए न्याय की मांग करता है। इस रैंसमवेयर हमले में यह संदेश दिया गया है कि जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी डेटा रिकवर नहीं किया जा सकेगा। बुधवार को सामने आई एक नई रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि रैंसमवेयर को भारत में किसानों के विरोध से जुड़ी संस्थाओं को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जिसमें खालसा साइबर फौज नामक हैकर समूह देश में इस हमले का नेतृत्व कर रहा है।


वैश्विक साइबरसिक्योरिटी कंपनी क्विक हील टेक्नोलॉजीज के थ्रीट रिसर्च एंड रिस्पॉन्स डिविजन क्विक हील सिक्योरिटी लैब्स ने कहा कि इसने सर्बलो नाम के रैंसमवेयर की खोज की है, जिसे ईमेल के माध्यम से दुर्भावनापूर्ण वर्ड डॉक्यूमेंट्स के माध्यम से वितरित किया जा रहा है, जिसमें किसानों के समुदाय का समर्थन करने वाला एक राजनीतिक संदेश शामिल है।

क्विक हील सिक्योरिटी लैब्स के निदेशक हिमांशु दुबे ने एक बयान में कहा, “नवीनतम सर्बलो रैंसमवेयर बिना किसी मौद्रिक मिजाज के किसानों के पक्ष में काम करता प्रतीत होता है, जो उनकी बढ़ती हमले क्षमताओं का प्रमाण है।”

बता दें कि रैंसमवेयर ( Ransomware )   साइबर हमला एक तरह से फिरौती मांगना है, जहां वायरस कंप्यूटर के डाटा को लॉक कर देता है और बदले में बिट कॉइन ( Bitcoin ) के जरिए पैसे की मांग की जाती है। इसके लिए कंप्यूटर स्क्रीन पर एक लिंक भी दिया जाता है, जिस पर ऑनलाइन पेमेंट करने को कहा जाता है।
 

किसन आंदोलन आज भी जारी ।( आईएएनएस )

मगर हैरानी की बात यह है कि इस नई हमले की तकनीक के माध्यम से हैकर्स फिरौती मांगने के बजाय फाइलों को एन्क्रिप्ट करके यूजर्स के डिवाइस में गड़बड़ी कर रहे हैं। जबकि आमतौर पर किसी भी रैंसमवेयर का मुख्य उद्देश्य फिरौती मांगना ही होता है।

कंपनी ने उल्लेख किया, “खालसा साइबर फौज सिस्टम फाइलों पर मिल्रिटी-ग्रेड एन्क्रिप्शन का उपयोग कर रही है।”

यह खबर ऐसे समय पर सामने आई है, जब दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे किसान अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ हलचल को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: ‘बुद्ध के प्रसाद’ कालानमक चावल का स्वाद अब सिंगापुर भी चखेगा

किसान राष्ट्रीय राजधानी के विभिन्न सीमाओं पर 26 नवंबर, 2020 से केंद्र की ओर से पारित किए गए तीन नए कृषि कानूनों का विरोध कर रहे हैं।

दुबे ने कहा, “हम खतरे के माहौल का विश्लेषण करना जारी रखेंगे और अपने यूजर्स के लिए सुरक्षा उपायों को तैनात करेंगे।”

कंपनी ने यूजर्स को अज्ञात ईमेल और संदेशों से आने वाले किसी भी अटैचमेंट को डाउनलोड न करने की सलाह दी है।

कंपनी ने सचेत करते हुए कहा है कि किसी भी संदिग्ध या अनचाहे लिंक और स्पैम ईमेल में पाए जाने वाले लिंक पर क्लिक करने से बचें।
( AK-आईएएनएस )

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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