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कोविड की तीसरी लहर की आशंका, दिल्ली 100 टन वाले ऑक्सीजन टैंकर खरीदे, आईटी पोर्टल बेहतर करे : आईआईटी

कोरोना की तीसरी लहर से दिल्लीवासियों को बचाने के लिए आईआईटी दिल्ली ने एक विशेष रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार एवं न्यायालय को सौंपी गई है।

आईआईटी दिल्ली ने दिल्ली को तीसरी लहर से बचने से चेताया।(Wikimedia Commons)

कोरोना की तीसरी लहर से दिल्लीवासियों को बचाने के लिए आईआईटी दिल्ली ने एक विशेष रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट दिल्ली सरकार एवं न्यायालय को सौंपी गई है। अपनी रिपोर्ट में आईआईटी ने दिल्ली में ऑक्सीजन के बुनियादी ढांचे और आपूर्ति में सुधार के लिए दिल्ली सरकार को रणनीतिक सिफारिशें प्रदान की हैं।

आईआईटी दिल्ली ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना की तीसरी लहर में दिल्ली को प्रतिदिन 45 हजार कोरोना संक्रमण के मामलों के लिए तैयार रहना होगा। साथ ही तब हर रोज करीब 9000 लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत पड़ेगी।


ऐसी स्थिति में दिल्ली में कोरोना रोगियों के उपचार के लिए प्रतिदिन 944 मीट्रिक टन ऑक्सिजन की जरूरत होगी। कोरोना की तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीजन की आपूर्ति और इसकी सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी दिल्ली और दिल्ली सरकार की एक संयुक्त टीम बनाई गई। इसमें आईआईटी के विशेषज्ञ, दिल्ली सरकार के अधिकारी, स्वास्थ्य एवं आईटी विभाग आदि अधिकारी शामिल हुए। इस टीम ने उन मुद्दों का विश्लेषण किया, जो ऑक्सीजन प्रबंधन में रुकावट बन रहे थे।

आईआईटी दिल्ली की टीम ने जो समाधान खोजे हैं उनमें मुख्य रुप से दिल्ली में ऑक्सीजन भंडारण, उत्पादन और वितरण को बढ़ाने की योजना है। आईआईटी ने दिल्ली में ऑक्सीजन के बुनियादी ढांचे का विश्लेषण कर और ब्लू प्रिंट तैयार किया है। इसके मुताबिक दिल्ली सरकार को 20-100 टन की क्षमता वाले 20-25 क्रायोजेनिक ऑक्सिजन टैंकर खरीदने को कहा गया है। इससे ऑक्सिजन का वितरण सुगम होगा।

दिल्ली को तीसरी लहर के लिए तैयार रहना चाहिए।(सांकेतिक चित्र, Wikimedia Commons)

रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली सरकार को ऑक्सिजन टैंकर के साइज को लेकर सजग रहना होगा। यह वयवस्था ट्रांसोपोर्ट के अलग-अलग माध्यमों के अनुरूप होनी चाहिए। आईआईटी दिल्ली ने ऑक्सीजन प्रबंधन के लिए बनाए गए वर्तमान आईटी पोर्टल और डैशबोर्ड को बेहतर बनाने की बात कही है। इसके अलावा आईआईटी की इस टीम ने दिल्ली सरकार इस पर भी समाधान सुझाए हैं कि दिल्ली सरकार ऑक्सीजन के सिस्टम को सुधारने के लिए तकनीकी समाधानों को एकीकृत करें।

यह भी पढ़ें: एक तरफ कोविड, दूसरी तरफ कृषि कानून पर राजनीति, किसका खतरा अधिक?

दिल्ली के भीतर ऑक्सीजन के बुनियादी ढांचे और सप्लाई एवं आपूर्ति में आ रही समस्याओं को हल करने के लिए व्यावहारिक समाधान विकसित किए हैं। संयुक्त टीम ने दिल्ली उच्च न्यायालय को अपनी रिपोर्ट सौंपी है। आईआईटी दिल्ली स्थित प्रबंधन अध्ययन विभाग प्रोफेसर संजय धीर ने कहा, “हमारा प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि राज्य में ऑक्सीजन से संबंधित बुनियादी ढांचे के मुद्दों के कारण कोई जान न जाए। हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि हम विशिष्ट और

व्यावहारिक रूप से लागू करने योग्य समाधान खोजें।”

आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग की बात करते हुए, दिल्ली के व्यापार और कराधान आयुक्त अंकुर गर्ग ने कहा, “दिल्ली पहले से ही सीओवीआईडी 19 की तीसरी लहर की तैयारी कर रही है और आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग इस रणनीतिक योजना प्रक्रिया को और अधिक कारगर बना देगा।”(आईएएनएस-SHM)

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

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इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
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