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यदि बाउंसर बनने का काम सिर्फ मर्दों का ही होता है तो आप किसी गलतफहमी में हैं। हम आज एक ऐसी महिला की बात करने करने जा रहे हैं जो एक मशहूर महिला बाउंसर(female bouncer) है। मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखने वाली 34 वर्षीय मेहरूनिसा(Mehrunisa) नाइट क्लब(Night Club) में होने वाली लड़ाई को खत्म कराने के साथ साथ महिला ग्राहकों पर नजर रखने तक का काम करती हैं। मेहरुनिसा(Mehrunisa) शौकत अली को आप ग्राहकों या सहकर्मियों के साथ बात करने के तरीके से अंदाजा नहीं लगा पाएंगे कि इसके पीछे एक कड़क मिजाज बाउंसर भी छिपा हुआ है। मेहरूनिसा(Mehrunisa) के परिवार में कुल 3 भाई और उनके अलावा 4 बहने हैं। हालांकि मेहरुनिशा उनकी एक और बहन भी उन्हीं के नक्शे कदम पर बढ़ चुकी हैं।


दरअसल 34 साल की मेहरूनिसासा यूपी के सहारनपुर जिले से ताल्लुक रखती हैं। सन 2004 से ही इस लाइन से जुड़ गई, और 10वीं कक्षा से ही बाउंसर का काम करने लगी, हालांकि शुरूआत में बाउंसर की जगह उन्हें सिक्युरिटी गार्ड कहा जाता था, जिसका उन्होंने विरोध किया। मेहरूनिशा ने आईएएनएस को बताया, मैं देश की पहली महिला बाउंसर(Female Bouncer) हूं, ये दर्जा प्राप्त करने के लिए मैंने बहुत लड़ाई लड़ी। जब मुझे गार्ड कहा जाता तो बहुत गुस्सा आता था। लेकिन कड़े संघर्ष के बाद मुझे देश की पहली महिला बाउंसर(female bouncer) का दर्जा प्राप्त हुआ। हालांकि उनके इस काम से उनके पिता खफा रहते थे। स्थानीय लोगों के ताने सुन कर उनके पिता हर वक्त नौकरी छोड़ने के लिए कहते। लेकिन वक्त ने ऐसी करवट ली कि लोग अब यह कहते हुए सुनाई पड़ते हैं कि बेटी हो तो मेहरूनिसा(Mehurnisa) जैसी।

मेहरूनिसा क्लब में होने वाली लड़ाई को खत्म कराने के साथ महिला ग्राहकों पर नजर रखने का काम करती हैं।(Pexel)

हालांकि मेहरूनिसा(Mehurnisa) के पास इस वक्त कोई काम नहीं है। कोरोना(corona) काल मे क्लब बंद हो जाने के बाद उनकी नौकरी चली गई। वहीं प्राइवेट इवेंट्स भी आने बंद हो गए। जिसकी वजह से अब वह बेरोजगार है।घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए उनकी नौकरी बेहद जरूरी है, लेकिम इस वक्त वह हाथ पर हाथ रखे बैठी है। उनके अलावा जितनी भी महिलाओं को बाउंसर की नौकरी पर लगवाया वह सभी मौजूदा वक्त में कोई काम नहीं कर रही हैं।मेहरूनिसा(Mehurnisa) को अब तक कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। हाल ही में उन्हें 8 मार्च को महिला दिवस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल(Arvind Kejriwal) की तरफ से भी अवार्ड से सम्मानित किया गया। इतना ही नहीं उनके ऊपर एक किताब भी लिखी जा रही है।

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इतना कुछ प्राप्त करने के बावजूद भी वह खुश नहीं हैं। उनके मुताबिक जिस तरह उनका संघर्ष रहा, उन्हें वह पहचान नहीं मिल सकी और अब तो हालत ये हो गई है कि फिलहाल उनके पास नौकरी तक नहीं है। मेहरूनिसा(Mehurnisa) ने आगे बताया कि, शुरूआत में बहुत परेशानी देखी, न परिवार साथ देता था और न ही वक्त। मेरा वजन भी ज्यादा था, इसके बाद मैंने एनसीसी ज्वाइन किया। मुझे आर्मी या पुलिस की नौकरी करनी थी लेकिन मेरा पिता को यह पसंद नहीं था। मैंने एक परीक्षा भी दी थी, जिसमे मैंने उसे पास कर लिया था। यदि मेरे पिता उस वक्त हां कर देते तो मुझे सब इंस्पेक्टर की नौकरी मिल जाती। उन्होंने आगे बताया कि, जिंदगी मे इतना संघर्ष रहा कि मैं शादी भी नहीं कर सकी। एक सड़क हादसे के बाद मेरी बहन के पति ने उसे छोड़ दिया, जिसके बाद उनके बच्चों की जिम्मेदारी मेरे पास आ गई। मेरी शादी के रिश्ते आते हैं लेकिन बच्चों की जिम्मेदारी कोई नहीं लेता।(आईएएनएस-SHM)

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रिपोर्ट के अनुसार, एप्पल छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है। (Pixabay)

एप्पल (Apple) कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस, एक आईफोन, एयरपोड्स और वॉच को पावर दे सकता है।

मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट एडीशन में मार्क गुरमन ने कंपनी की भविष्य की वायरलेस चाजिर्ंग तकनीक के बारे में कुछ दिलचस्प जानकारी का खुलासा किया।

उन्होंने लिखा, "मेरा यह भी मानना है कि एप्पल (Apple) छोटी और लंबी दूरी के वायरलेस चाजिर्ंग उपकरणों पर काम कर रहा है और यह एक ऐसे भविष्य की कल्पना करता है जहां एप्पल के सभी प्रमुख उपकरण एक-दूसरे को चार्ज कर सकते हैं। कल्पना कीजिए कि एक आईपैड एक आईफोन चार्ज कर रहा है और फिर वह आईफोन एयरपोड्स या एक एप्पल घड़ी चार्ज कर रहा है।"

apple , wireless charger, Iphone, iPod Chargers एप्पल कथित तौर पर एक ऐसे चार्जर पर काम कर रहा है जो एक साथ कई डिवाइस को पावर दे सकता है। [Wikimedia Commons]

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झारखंड के नोआमुंडी में खदान की कमान महिलाओं के हाथ में सौंपेगी टाटा स्टील कंपनी। [Wikimedia Commons]

टाटा स्टील (Tata Steel) कंपनी झारखंड में लौह अयस्क की एक खदान की कमान पूरी तरह महिलाओं के हाथ में होगी। फावड़ा से लेकर ड्रिलिंग तक और डंपर चलाने से लेकर डोजर-शॉवेल जैसी हेवी मशीनों का संचालन कुशल महिला कामगारों के द्वारा किया जाएगा। नये साल यानी 2022 में पश्चिम सिंहभूम जिले की नोआमुंडी आयरन ओर माइन्स को पूरी तरह महिलाओं के हाथ में सौंपने की तैयारी पूरी कर ली गयी है। ऐसा प्रयोग देश में पहली बार हो रहा है।

टाटा स्टील (Tata Steel) के आयरन ओर एंड क्वेरीज डिविजन के महाप्रबंधक ए. के. भटनागर ने पत्रकारों को बताया कि नोआमुंडी स्थित कंपनी की आयरन ओर माइन्स में सभी शिफ्टों के लिए 30 सदस्यों वाली महिलाओं की टीम की तैनाती की जा रही है। खदान को स्वतंत्र रूप से महिलाओं के हाथों संचालित करने का यह टास्क कंपनी ने महिला सशक्तीकरण की परियोजना तेजस्विनी-2.0 के तहत लिया था और अब इसे सफलतापूर्वक लागू करने की तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं।

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इस साल देश में हिरासत में कुल 151 मौतें हुई हैं। (सांकेतिक चित्र, File Photo )

इस साल देश में हिरासत(police custody)में कुल 151 मौतें हुई हैं। केंद्र ने लोकसभा(Loksabha) में मंगलवार को यह जानकारी दी। बीजेपी सांसद वरुण गांधी के सवाल का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय(Nityanand Rai)ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के मुताबिक 15 नवंबर तक पुलिस हिरासत में मौत के 151 मामले दर्ज किए गए हैं।

महाराष्ट्र में पुलिस हिरासत(police custody) में सबसे अधिक (26) मौतें हुईं हैं, उसके बाद गुजरात (21) और बिहार (18) का स्थान रहा है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पुलिस हिरासत में 11-11 लोगों की मौत की खबर है।

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