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एक महिला वकील और राजनेता मीरा राघवेंद्र ने शहर के मजिस्ट्रेट कोर्ट परिसर में रेशनलिस्ट (तर्कवादी) कन्नड़ लेखक के.एस.भगवान के चेहरे पर काली स्याही फेंक दी। उन्होंने न केवल उन्हें अपने खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू करने की हिम्मत दिखाने की चुनौती दी बल्कि अपनी हरकत को सही ठहराते हुए 34 सेकंड की क्लिप को अपने ट्विटर टाइमलाइन पर पोस्ट भी कर दिया।


अपने ट्विटर बायो में, वह राजनेता होने का दावा करती हैं लेकिन उस पार्टी के नाम का उल्लेख नहीं किया है जिसके साथ वह जुड़ी हुई हैं।

उन्होंने गुरुवार को ट्वीट कर कहा कि हिंदू भावनाओं को आहत करने से जुड़े एक मामले में भगवान जमानत पाने में कामयाब रहे लेकिन ‘मुझे संतोष है कि मैंने उनके चेहरे पर स्याही फेंकी’ जय श्री राम।

एक क्लिप में, एक महिला (जिसकी पहचान आईएएनएस द्वारा स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं की जा सकी) को लेखक के खिलाफ यह कहते हुए सुना जा सकता है कि उसे धर्म पर अपने रुख के लिए ‘शर्मिदा’ होना चाहिए। भगवान पर वह चीखते हुए यह कहते सुनी जा सकती हैं, “आप एक प्रोफेसर हैं और इतने उम्रदराज हैं, फिर भी आप हमारे धर्म हिंदू धर्म और देवी- देवताओं के बारे में बकवास बोलते रहते हैं। क्या आपको खुद पर शर्म नहीं आती है।”

 

भगवान सनातन धर्म और इसके रीति-रिवाजों के सबसे कट्टर आलोचकों में से एक हैं और उन्होंने भगवान राम के खिलाफ किताबें लिखी हैं। हिंदू धर्म पर उनकी किताबों और विचारों की दक्षिमपंथियों ने जबरदस्त आलोचना की है। हाल ही में, कर्नाटक ने सरकार द्वारा संचालित सार्वजनिक पुस्तकालयों से अयोध्या में राम मंदिर का विरोध करने को लेकर उनकी पुस्तक ‘राम मंदिर येके बेदा’ (हमें राम मंदिर की आवश्यकता क्यों नहीं है) को हटा दिया है।

पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या की जांच कर रही एक पुलिस टीम ने कहा कि कथित हत्यारों के निशाने पर भगवान का नाम भी था। उनकी जान को खतरे के कारण उन्हें पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा प्रदान की गई है। राघवेंद्र ने 17 दिसंबर, 2020 को घोषणा की थी कि उन्होंने उनके खिलाफ मामला दर्ज कराया है और जल्द ही उन्हें अदालत द्वारा तलब किया जाएगा।

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सेंट्रल अनुचेत के डीसीपी ने कहा कि महिला मीरा राघवेंद्र के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “जब वह (भगवान) कार से बाहर निकले, तो उन्होंने (राघवेंद्र) उन पर स्याही फेंक दी।” अपनी शिकायत में, भगवान ने अपनी जान को खतरा बताया।(आईएएनएस)

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
"भारत इन देशों के साथ अपनी कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और हम मानते हैं कि भूमि से घिरे मध्य एशियाई देश भारत के विशाल बाजार से जुड़कर अत्यधिक लाभ उठा सकते हैं"

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क्रांतिकारी दुर्गावती देवी (wikimedia commons)

हिंदुस्तान की भूमि पर कई साहसी और निडर लोगों का जन्म हुआ जिन्होने भारत की आजादी में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया था। लेकिन दुःख की बात यह है कि इनका नाम इतिहास के पन्नों में इतनी बार दर्ज नहीं हुआ जितना होना चाहिए था। ऐसी ही एक वीरांगना का नाम है दुर्गावती देवी। इन्हें दुर्गा भाभी के नाम से भी जाना जाता है। यह उन महिलाओं में से एक थी जिन्होंने ब्रिटिश राज के खिलाफ क्रांति में भाग लिया था।

दुर्गा भाभी का जन्म 7 अक्टूबर 1907 में उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में हुआ था। इनका जन्म छोटी उम्र में ही भगवती वोहरा जी के साथ हुआ। भगवती वोहरा का परिवार लाहौर का प्रतिष्ठित परिवार था। दुर्गावती के पति भी क्रांति में पुरजोर तरीके से भाग लेना चाहते थे। लेकिन पिता के दबाव के कारण ऐसा कर नहीं पा रहे थे। पिता का देहांत होने के बाद भगवती जी ने भी क्रांति में भाग लिया था।

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