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खेल

फुटबाल के दीवाने गोवा में विजेंदर का बाउट बॉक्सिंग को नए आयाम देगा

विजेंदर ने कहा, " खुद से अपनी पीठ थपथपाना अच्छा नहीं है। मैं चाहूंगा कि मेरी मुट्ठी शुक्रवार को बात करे।"

गोवा में बॉक्सिंग ज्यादा लोकप्रिय नहीं है क्योंकि यहां लोगों में फुटबॉल का जुनून है। स्थानीय मुक्केबाजी कोच चिदंबरम नाइक का कहना है कि इस रीजन में केवल तीन मुक्केबाजी रिंग हैं। हालांकि अब यह धारणा बदल सकती है क्योंकि भारत के स्टार मुक्केबाज विजेंदर सिंह शुक्रवार को यहां रूस के लंबी कद-काठी के प्रतिद्वंद्वी आर्टीश लोपसान के खिलाफ बैटल ऑन शिप में उतरेंगे। इस मुकाबले के लिए गुरुवार को दोनों मुक्केबाजों के वजन की जांच की गई। इसके बाद विजेंदर ने आईएएनएस से कहा कि वह बोलने से ज्यादा करने में विश्वास रखते हैं।


विजेंदर ने कहा, ” खुद से अपनी पीठ थपथपाना अच्छा नहीं है। मैं चाहूंगा कि मेरी मुट्ठी शुक्रवार को बात करे।”

2008 ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता विजेंदर ने अपने पेशेवर करियर में 12 बाउट खेले हैं और उन्होंने 12-0 का रिकॉर्ड फिलहाल बरकरार रखा है। विजेंदर ने आखिरी बार नवंबर 2019 में बाउट खेली थी जिसमें उन्होंने घाना के चार्ल्स अदामु को दुबई में पराजित किया था।

आज रात खेला जाएगा यह मैच।(Twitter, Vijender Singh)

35 वर्षीय विजेंदर और लोपसान के बीच यह मुकाबला गोवा के मनदोवरी नदी में मैजेस्टिक प्राइड कैसीनो शिप के छत पर आयोजित होगा। मुख्य मुकाबले के अलावा पांच अंडरकार्ट मुकाबले भी होंगे।

यह भी पढ़ें: मानसिक दबाव से निकलने के लिए एथलीटों का प्रशिक्षण जरूरी : वीके सिंह

26 वर्षीय लोपसान ने अब तक छह मुकाबले खेले हैं, जिसमें उसने चार जीते हैं और एक हारे और एक ड्रॉ रहा है।

मैच को लाइव देखने के लिए जहाज पर सीट मिलना मुश्किल है क्योंकि इसकी सीमित क्षमता लगभग 300 ही है। स्थानीय लोग केवल 99 रुपये का भुगतान करके लाइव स्ट्रीमिंग मुकाबला देख सकते हैं।(आईएएनएस-SHM)

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इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) [IANS]

दुनिया की अग्रणी हॉस्पिटैलिटी और पाक कला शिक्षा दिग्गजों में से एक, सॉमेट एजुकेशन (Sommet Education) ने हाल ही में देश के प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी संस्थान, इंडियन स्कूल ऑफ हॉस्पिटैलिटी (ISH) के साथ हाथ मिलाया है। इसके साथ सॉमेट एजुकेशन की अब आईएसएच (ISH) में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जो पूर्व के विशाल वैश्विक नेटवर्क में एक महत्वपूर्ण एडिशन है। रणनीतिक साझेदारी सॉमेट एजुकेशन को भारत में अपने दो प्रतिष्ठित संस्थानों को स्थापित करने की अनुमति देती है। इनमें इकोले डुकासे शामिल है, जो पाक और पेस्ट्री कला में एक विश्वव्यापी शिक्षा संदर्भ के साथ है। दूसरा लेस रोचेस है, जो दुनिया के अग्रणी हॉस्पिटैलिटी बिजनेस स्कूलों में से एक है।

इस अकादमिक गठबंधन के साथ, इकोले डुकासे का अब भारत में अपना पहला परिसर आईएसएच (ISH) में होगा, और लेस रोचेस देश में अपने स्नातक और स्नातकोत्तर आतिथ्य प्रबंधन कार्यक्रम शुरू करेगा।

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Credit- Wikimedia Commons

भारतीय रेलवे (Wikimedia Commons)

पूर्व मध्य रेल ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के बाद इसके अनुपालन में उल्लेखनीय प्रगति हासिल की है। इको स्मार्ट स्टेशन के रूप में विकसित करने के लिए पूर्व मध्य रेल के 52 चिन्हित स्टेशनों पर रेलवे बोर्ड द्वारा सुझाए गए 24 इंडिकेटर (पैरामीटर) लागू किए हैं। सभी 52 स्टेशनों ने पर्यावरण प्रबंधन के लिए एक प्रमाणन आईएसओ-14001:2015 प्राप्त किया है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित पूर्व मध्य रेल के 52 नामांकित स्टेशनों में से 45 का संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें के लिए सहमति-से-स्थापित (सीटीई) प्रस्तावों की ऑनलाइन प्रस्तुतियां सुनिश्चित कीं।

पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेष कुमार ने बताया कि पूर्व मध्य रेल के सभी 45 स्टेशनों के लिए स्थापना की सहमति के लिए एनओसी प्राप्त कर ली गई है और 32 स्टेशनों को कंसेंट-टू-ऑपरेट (सीटीओ) दी गई है। उन्होंने बताया कि इस प्रमाणीकरण ने पूर्व मध्य रेलवे को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोडरें द्वारा निर्धारित पानी, वायु प्रदूषण नियंत्रण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन मानदंडों की आवश्यकता को सुव्यवस्थित करने में मदद की है।

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वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच अब गोरखपुर में भी हो सकेगा। [IANS]

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस समेत अन्य वायरस जनित बीमारियों की विश्व स्तरीय जांच शुरू हो गई है। गोरखपुर (Gorakhpur) में यह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)की क्षेत्रीय इकाई रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (RMRC) के जरिए संभव हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के प्रयास से शुरू इस आरएमआरसी में नौ अत्याधुनिक लैब्स बनकर तैयार हैं। बता दें कि मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) इसका उद्घाटन करेंगे।

राज्य सरकार की ओर से मिली जानकारी के अनुसार आरएमआरसी (RMRC) की इन लैब्स के जरिये न केवल बीमारियों के वायरस की पहचान होगी बल्कि बीमारी के कारण, इलाज और रोकथाम को लेकर व्यापक स्तर पर वल्र्ड क्लास अनुसंधान भी हो सकेगा। सबसे खास बात यह भी है कि अब गोरखपुर (Gorakhpur) में ही आने वाले समय में कोरोनाकाल के वर्तमान दौर की सबसे चर्चित और सबसे डिमांडिंग जीनोम सिक्वेंसिंग (Genome Sequencing) भी हो सकेगी। यह पता चल सकेगा कि कोरोना का कौन सा वेरिएंट (Covid variant) अधिक प्रभावित कर रहा है।

Narendra Modi , PM of India, ICMR मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस RMRC का उद्घाटन करेंगे। [Wikimedia Commons]

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