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व्यवसाय

आज़ादी के बाद पहली बार भारत ने इस तरह की तकनीकी मंदी में किया प्रवेश

भारत की अर्थव्यवस्था ने जुलाई और सितंबर के बीच 7.5 प्रतिशत का संकुचन देखा। यह आंकड़े संकेत देते हैं कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।

भारत में लगे लॉकडाउन की वजह से कई लोगों ने अपनी नौकरियां गंवा दी हैं। (Pixabay)

हाल ही में जारी हुई रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था ने जुलाई और सितंबर के बीच 7.5 प्रतिशत का संकुचन देखा। उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों के बीच भारत का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के हिसाब से आज़ादी के बाद पहली बार भारत ने इस तरह की तकनीकी मंदी (technical recession) में प्रवेश किया है।

असल में तकनीकी मंदी (technical recession) उस स्थिति को कहते हैं जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में दो तिमाहियों (quarters) से लगातार संकुचन देखने को मिल रहा हो।


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हालांकि पिछली तिमाही के हिसाब से तुलना करें तो इस तिमाही में सुधार आया है। पिछली तिमाही में 23.9 प्रतिशत संकुचन दर्ज किया गया था। इस तिमाही में अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत संकुचित हुई। लेकिन यह आंकड़े संकेत देते हैं कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। क्योंकि यह देश में नौकरियां पैदा करने की मांग को पुनर्जीवित कर देती है, जो कि इस कोरोनाकाल में एक कठिन प्रयास साबित हो सकता है।

संकुचन के दो क्रमिक क्वार्टर का मतलब है कि देश ने 1947 के बाद पहली बार “तकनीकी मंदी (technical recession)” दर्ज की है।

बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों की गिनती में भारत का प्रदर्शन सबसे खराब रहा है। (Unsplash)

आपको बता दें कि महामारी के प्रकोप की चपेट में रहने के बावजूद 30 सितंबर को समाप्त हुई तिमाही के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान और जर्मनी सहित प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं द्वारा दर्ज की गई वृद्धि ने दुनिया को हैरान कर दिया है।

भारत के केंद्रीय बैंक (Central Bank of India) के गवर्नर शक्तिकांत दास द्वारा जारी किए गए अनुमानों के अनुसार, इस साल अर्थव्यवस्था में 9.5 प्रतिशत की गिरावट की उम्मीद है। वहीं दूसरी तरफ अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (The International Monetary Fund) ने इस बीच यह अनुमान लगाया है कि भारत की अर्थव्यवस्था इस वर्ष 10.3 प्रतिशत संकुचित होगी। ऑक्सफ़ोर्ड इकोनॉमिक्स (Oxford Economics) द्वारा नवंबर में जारी हुई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि महामारी के मार्मिक प्रभाव में कमी आने के बाद भी भारत की अर्थव्यवस्था सबसे बुरी तरह घायल रहेगी।

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देखा जाए तो भारत की अर्थव्यवस्था महामारी से पहले भी संघर्ष करती दिख रही थी। वायरस ने आ कर वैश्विक गतिविधि को प्रभावित तो किया ही और साथ ही साथ सख्त लॉकडाउन ने देश को एक गंभीर झटका भी दिया है।

136 करोड़ लोगों की आबादी वाले विशाल भारत में लगे लॉकडाउन की वजह से कई लोग बेरोज़गार हो गए। जिसमें लाखों प्रवासी श्रमिक (migrant workers) शामिल हैं।

ऐसे तो सरकार ने लॉकडाउन में ढील दे कर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश की है। मगर आज देश में बढ़ते कोरोना के मामले और किसानों की पीड़ा हवा का रुख किस ओर मोड़ेगी, यह तो वक़्त ही बताएगा। (VOA)

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मोहम्मद खालिद (IANS)

मिलिए झारखंड(Jharkhand) के हजारीबाग निवासी मृतकों के अज्ञात मित्र मोहम्मद खालिद(Mohammad Khalid) से। करीब 20 साल पहले उनकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई, जब उन्होंने सड़क किनारे एक मृत महिला को देखा। लोग गुजरते रहे लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।

हजारीबाग में पैथोलॉजी सेंटर चलाने वाले खालिद लाश को क्षत-विक्षत देखकर बेचैन हो गए। उन्होंने एक गाड़ी का प्रबंधन किया, एक कफन खरीदा, मृत शरीर को उठाया और एक श्मशान में ले गए, बिल्कुल अकेले, और उसे एक सम्मानजनक अंतिम संस्कार(Last Rites) दिया। इस घटना ने उन्हें लावारिस शवों का एक अच्छा सामरी बना दिया, और तब से उन्होंने लावारिस शवों को निपटाने के लिए इसे अपने जीवन का एक मिशन बना लिया है।

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