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दुनिया

कट्टरता को कब तक अपनी जागीर समझोगे?

आतंकवाद के खिलाफ भारत पहले से आवाज़ उठाता रहा है और अब फ्रांस के साथ वह मजबूती के साथ खड़ा है। किन्तु कुछ भारतीय, फ्रांस में हुई घटना को जायज़ बता रहे हैं।

मैक्रों को इस्लामोफोबिया का शिकार बताया जा रहा है। (Wikimedia Commons)

“कट्टरता का बिगुल फूँक कर कब तक हुड़दंग मचाएगा, कब तक चाकू तलवार उठेगा और कब जाने तू पछताएगा?”
कट्टरता के नाम जो ज़ुल्म ढाया जा रहा है, क्या यह इस मानसिकता को नहीं दर्शाता कि यह सदियों से दिल में दबी आग का नतीजा है? फ्रांस के राष्ट्रपति ने जो कहा वह सही है या गलत वह हर एक का अपना व्यक्तिगत सोच है। भारत उन चुनिंदा देशो में से एक है जिसने फ्रांस का इस्लामिक आतंकवाद के खिलाफ समर्थन किया है। किन्तु सोचने की बात यह है कि इस देश में ही कुछ लोग हैं जिन्हे आतंकवाद से प्रेम है और वह मानते हैं कि फ्रांस में हुई शिक्षक की हत्या जायज़ है, और वह कोई नहीं मशहूर शायर मुनव्वर राणा हैं।

क्या खुद को चमकाने के लिए हत्या जैसे अपराध को जायज़ कहना सही होगा? और क्यों केवल एक धर्म के विषय में सभी का मत छिन्न-भिन्न हो जाता है? विश्व में 50 ऐसे देश हैं जिनमे अधिकांश मुस्लिम आबादी रहती है और विश्व में 180 करोड़ लोग इस्लाम धर्म से नाता रखते हैं। मुद्दा यह है कि जब भी आतंकवाद के विषय में बात होती है तब इस्लाम का भी ज़िक्र हो जाता है। इसके पीछे अनेक कारण हैं कुछ आप जानते हैं और कुछ आप अनसुना कर देते हैं।


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पहला तो यह कि इस्लाम अल्पसंख्यक तबका नही है, विश्व की कुल आबादी का 24 प्रतिशत मुस्लिम है। दूसरा, कट्टरता को अपनी जागीर समझने वाले धर्म गुरु और शिक्षक बाकियों में नफ़रत का ज़हर भर रहे हैं। तीसरा, अगर कोई मुस्लिम किसी अन्य धर्म के विषय में गलत कह दे तब इस देश का एक बुद्धिजीवी कुनबा उनके समर्थन में उतर आता है, किन्तु अन्य धर्म के लोग इस्लाम के खिलाफ कुछ बोल दे तो विश्व भर में इस्लामिक समाज एक जुट हो जाता है। जिसका सबसे नया उदाहरण है फ्रांस। चौथा, खासकर भारत में राजनीति को धर्म ने जकड़ लिया है और वह अल्पसंख्यकों के वोटबैंक के लालच में सब हत्कंडे अपनाएं जा रहे हैं। उदाहरण स्वरूप बंगाल में हिंदू पर्व को रोक दिया जाता है किन्तु इस्लामिक त्यौहार के लिए लॉकडाउन तक खोल दिया जाता है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी एआई.एम.आई.एम नेता असदुद्दीन औवेसी यह कहते हैं कि राम मंदिर को तोड़ कर वहीं मस्जिद का निर्माण होगा।

कट्टरता के नाम पर जान ले ली जा रहीं है, हाल ही में फ्रांस के एक चर्च में तीन महिलाओं की गाला-रेत कर हत्या कर दी गई और हत्यारा मुस्लिम था। किन्तु इस विषय कहीं से कोई प्रतिक्रिया नहीं आएगी मगर इस्लामोफोबिया का ढिंढोरा पीटने वाले हुड़दंग मचाते रहेंगे। आज अभिव्यक्ति की आज़ादी को मज़ाक बना कर छोड़ दिया गया है, और आज़ादी के विषय में JNU से बेहतर कौन जनता है। जाकिर नाइक उन में से ही एक है जो नफरत फ़ैलाने को अपना कर्तव्य समझते हैं।

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टोयोटा (Wikimedia Commons)

टोयोटा(Toyota) मोटर कॉर्प ने घोषणा की है कि वह अमेरिका में अपनी कुछ इलेक्ट्रिक वाहन(Electric Vehicles) आपूर्ति श्रृंखला लाने के प्रयास में उत्तरी कैरोलिना में एक नई 1.29 बिलियन डॉलर की लागत से बैटरी फैक्ट्री(Battery Factory) का निर्माण कर रही है।

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, टोयोटा ने घोषणा की है कि वह अगले दशक में बैटरी तकनीक में करीब 13.6 अरब डॉलर का निवेश करेगी, उत्पादन में 9 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। क्योंकि यह अपने वाहन लाइनअप को विद्युतीकृत करने का प्रयास करता है।

नया संयंत्र शुरू में सालाना 8 लाख वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी की आपूर्ति करने में सक्षम होगा। पहले वर्ष में, फर्म इलेक्ट्रिक वाहनों के आगामी लाइनअप के लिए 1.2 मिलियन बैटरी पैक का उत्पादन करने की योजना बना रही है।

उत्तरी अमेरिका में टोयोटा मोटर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी क्रिस रेनॉल्ड्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है, "यह निवेश, जो मुझे लगता है कि उत्तरी कैरोलिना के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निजी पूंजी निवेश है.. कम से कम 1,750 नई नौकरियां पैदा करेगा और हमें ऑटोमोटिव बैटरी उत्पादन को विकसित करने और स्थानीय बनाने में मदद करेगा जो यहां निर्मित बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्ग प्रशस्त करेगा।"

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जेएनयू के कॉमरेड को अब बाबरी मस्जिद चाहिए (Image: Wikimedia Commons)

अपने हिंदू विरोधी कर्तव्य के लिए प्रसिद्ध साम्यवादी(communist) विचारधारा से ग्रसित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ(JNUSU) एक बार फिर से सुर्खियों में है। अबकी बार वह जिस वजह से सुर्खियों में है वह है बाबरी मस्जिद(Babri Masjid)। दरअसल, जेएनयूएसयू ने अयोध्या(ayodhya) में ध्वस्त बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर कैंपस के अंदर एक विरोध मार्च निकाला। विरोध मार्च चंद्रभागा छात्रावास में समाप्त हुआ, जहां छात्र नेताओं ने जमकर नारेबाजी और भाषण बाजी करी।

इसके अलावा एक जगह पर तख्तियां लिए हुए, नारेबाजी करते हुए जमा हो गए और बाद में उन्होंने परिसर के अंदर मार्च निकाला। छात्र नेताओं ने मस्जिद(Babri Masjid) के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर भाषण भी दिया। जेएनयूएसयू(Janusu) के उपाध्यक्ष साकेत मून(Saket Moon) ने कहा कि बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण से न्याय मिलेगा। उपाध्यक्ष जी न्याय दिलवाने की बात करके मस्जिद के निर्माण की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद वह भूल गए कि राम मंदिर(Ram Mandir) आज सुप्रीम कोर्ट (supreme Court) द्वारा किए गए न्याय पर मिल रहा है।

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एप्पल वॉच, सांकेतिक चित्र (Pixabay)

एप्पल (Apple) ने हाल ही में वॉच सीरीज 7 लाइनअप लॉन्च किया था और अब कंपनी वॉच एसई का एक अपडेटेड वर्जन लॉन्च करने की तैयारी कर रही है, जिसे वॉच एसई 2 नाम दिया जा सकता है। मैकरियूमर्स की रिपोर्ट के अनुसार, 'पावर ऑन' न्यूजलेटर के लेटेस्ट संस्करण में मार्क गुरमन ने कहा कि अगले साल एप्पल वॉच एसई के लिए एप्पल वॉच सीरीज 8 के साथ एक अपडेट लॉन्च कर सकता है।

एप्पल वॉच एसई 2 (Apple watch SE2) मूल एसई मॉडल के अनुरूप होगा जिसे वर्ष 2020 में लॉन्च किया गया था।

मूल एप्पल वॉच एसई 2 (Apple watch SE2)में नियमित एप्पल वॉच मॉडल के समान डिजाइन हैं, लेकिन कुछ उन्नत सुविधाओं की कमी है जिसमें हमेशा ऑन डिस्प्ले, ब्लड ऑक्सीजन सेंसर और ईसीजी कार्यक्षमता शामिल है।

इसके अलावा, एप्पल (Apple) स्पोर्ट्स एथलीटों के उद्देश्य से एक पूरी तरह से नई एप्पल वॉच की भी योजना बना रहा है। इसमें एक 'रग्गेडाइज्ड' डिजाइन होगा जिसमें एक ऐसा केस हो सकता है जो खरोंच, डेंट, फॉल्स और बहुत कुछ के लिए अधिक प्रतिरोधी हो।

इस बीच, एप्पल वॉच 8 को सेंसर विभाग में भी कुछ मेजर केपेबिलिटी अपग्रेड्स मिलने की उम्मीद है।

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एप्पल के आपूर्तिकर्ता कथित तौर पर एप्पल वॉच सीरीज 8 में नेक्स्ट जनरेशन के सेंसर के लिए पुर्जे विकसित कर रहे हैं जो यूजर्स को उनके ब्लड शुगर के स्तर को मापने की अनुमति देगा।

वर्तमान में, क्यूपर्टिनो आधारित टेक दिग्गज के पास स्मार्टवॉच के तीन लाइनअप एप्पल वॉच सीरीज 7, एप्पल वॉच सीरीज 3 और एप्पल वॉच एसई हैं। (आईएएनएस)

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