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कोरोना जैसी आपदा को अवसर में बदलने के लिए खुलेआम हो रही धोखाधड़ी

"यह एक बड़ी धोखाधड़ी है और सरकार को इसकी जांच करने के लिए कदम उठाना चाहिए। ऐसा कोई भी कार्ड कोविड को नहीं रोक सकता, यानी ग्राहकों को ठगा जा रहा है।"- आर.के. सिन्हा

कोरोना जैसी आपदा को अवसर में बदलने के लिए खुलेआम हो रही धोखाधड़ी(सांकेतिक तस्वीर, Pexels)

कोरोनावायरस के मद्देनजर मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंस बनाए रखने और ‘काढ़ा’ पीने जैसी नसीहतों के बीच बाजार में एक नया एंटी-कोरोनावायरस आइटम आ गया है और बड़ी संख्या में लोग इसे खरीदने को उमड़ रहे हैं। एक है कोविड-19 ‘शट-आउट’ कार्ड, जो छोटे आईडी की तरह दिखता है, जिसे गले में पहना जाता है।

दावा है कि यह कार्ड वायरस को दूर रखता है और अगर कोई शख्स अपने गले में कार्ड पहनता है, तो वह महामारी में सुरक्षित रह सकता है। इस कार्ड की कीमत बनावट में गुणवत्ता के आधार पर 200 से 400 रुपये के बीच है।


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लखनऊ के नरही क्षेत्र की एक मेडिकल शॉप के सेल्समैन रवि कृष्णा ने कहा, “कार्ड बड़ी संख्या में बिक रहे हैं, क्योंकि लोगों को लगता है कि वायरस को भगाने का यह सबसे आसान तरीका है। हम जो कार्ड बेच रहे हैं वो तीन महीने में एक्सपायर होता है।”

कार्ड ई-कॉमर्स वेबसाइट पर भी उपलब्ध हैं और 30 दिनों की समाप्ति तिथि के साथ इसकी कीमत लगभग 60 रुपये है।

‘शट-आउट’ कार्ड, ई-कॉमर्स वेबसाइट ‘फ्लिपकार्ट’ पर भी उपलब्ध।

चिकित्सकों ने हालांकि, इन काडरें का निर्माण करने वाली कंपनियों द्वारा किए गए दावों का खंडन किया है।

मेडिकल प्रैक्टिशनर आर.के. सिन्हा ने कहा, “यह एक बड़ी धोखाधड़ी है और सरकार को इसकी जांच करने के लिए कदम उठाना चाहिए। ऐसा कोई भी कार्ड कोविड को नहीं रोक सकता, यानी ग्राहकों को ठगा जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि वायरस हटाने के कार्ड अवधारणा ‘एयर प्यूरीफायर’ पर आधारित है जो सांस लेने में समस्या पैदा करने वाले एजेंटों से हवा को साफ कर सकती है, लेकिन यह वायरस को नहीं मार सकती है।

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सिन्हा ने आगे बताया कि वायरस हटाने वाले कार्ड में क्लोरीन ऑक्साइड होता है, जो सतहों पर प्रभावी होता है, लेकिन यह श्वसन प्रणाली पर बहुत हानिकारक होता है।

उन्होंने कहा कि इससे श्वसन संबंधी गंभीर समस्या, आंखों और त्वचा में जलन हो सकता है, क्योंकि यह ‘करोसिव’ (संक्षारक) है।(आईएएनएस)

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टेली-परामर्श की नई प्रदान की गई सुविधा के साथ, केंद्र सरकार स्वास्थ्य योजना (Central Government Health Scheme) के लाभार्थी सीधे विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं, उन्होंने कहा।

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(NewsGram Hindi)

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स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने त्याग पत्र में लिखा था कि "विपरीत परिस्थितियों के बावजूद, मैंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में श्रम, रोजगार मंत्री के रूप में पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ काम किया है। लेकिन मैं दलितों, पिछड़े वर्गों, किसानों, बेरोजगार युवाओं और छोटे मध्यम आकार के व्यापारियों के प्रति घोर उपेक्षा को देखते हुए यूपी मंत्रालय से इस्तीफा दे रहा हूं।"

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