Tuesday, June 15, 2021
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कोविड के कारण अपने अनाथ हुए बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जाएगी

देश बच्चों की सहायता एवं सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगा, ताकि वे मजबूत नागरिक के रूप में उभरें और उनका भविष्य उज्‍जवल हो।

केंद्र सरकार ने शनिवार को कोविड के कारण अनाथ हुए बच्चों के लिए एक बड़ी कल्याणकारी योजना की घोषणा की। पीएम केयर्स 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का कोष बनाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई एक योजना के माध्यम से योगदान देगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कोविड-19 के कारण अपने माता-पिता को खो देने वाले बच्चों की सहायता करने के लिए उठाण् जा सकने वाले कदमों के बारे में चर्चा और विचार-विमर्श करने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की।

प्रधानमंत्री ने वर्तमान कोविड महामारी (Pandemic) से प्रभावित बच्चों के लिए कई सुविधाओं की घोषणा की। इन उपायों की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चे देश के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और देश बच्चों की सहायता एवं सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास करेगा, ताकि वे मजबूत नागरिक के रूप में उभरें और उनका भविष्य उज्‍जवल हो।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे कठिन समय में एक समाज के रूप में यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों की देखभाल करें और उनमें एक उज्‍जवल भविष्य की आशा जगाएं। कोविड-19 के कारण माता-पिता दोनों या माता-पिता में से जीवित बचे या कानूनी अभिभावक/दत्तक माता-पिता को खोने वाले सभी बच्चों को पीएम-केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत सहायता दी जाएगी।

PM-Cares
यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों की देखभाल करें और उनमें एक उज्‍जवल भविष्य की आशा जगाएं। (Pixabay)

उन्होंने यह भी कहा कि जिन उपायों की घोषणा की जा रही है, वे सिर्फ पीएम केयर्स फंड जोकि कोविड-19 के खिलाफ भारत की लड़ाई में सहायता करेगा, में उदार योगदान के कारण संभव हुए हैं।

सरकार के अनुसार, पीएम केयर्स (PM-Cares) 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक बच्चे के लिए 10 लाख रुपये का कोष बनाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई एक योजना के माध्यम से योगदान देगा।

इस कोष का उपयोग 18 वर्ष की आयु से अगले पांच वर्षों तक उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान उनकी व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए मासिक वित्तीय सहायता/छात्रवृत्ति देने के लिए उपयोग किया जाएगा। 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर, उसे व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपयोग के लिए एकमुश्त के रूप से कोष की राशि मिलेगी।

10 साल से कम उम्र के बच्चे को नजदीकी केंद्रीय विद्यालय या निजी स्कूल में डे स्कॉलर के रूप में प्रवेश दिलाया जाएगा। अगर बच्चे का दाखिला किसी निजी स्कूल में होता है तो पीएम केयर्स से आरटीई के नियमों के मुताबिक फीस दी जाएगी। पीएम केयर्स वर्दी, पाठ्य पुस्तकों और नोटबुक पर होने वाले खर्च का भी भुगतान करेगा।

यह भी पढ़ें :- कोविड की तीसरी लहर की आशंका, दिल्ली 100 टन वाले ऑक्सीजन टैंकर खरीदे, आईटी पोर्टल बेहतर करे : आईआईटी

मौजूदा शिक्षा ऋण के मानदंडों के अनुसार, भारत में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों/उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण दिलाने में बच्चे की सहायता की जाएगी। इस ऋण पर लगने वाले ब्याज का भुगतान पीएम केयर्स द्वारा किया जाएगा।

विकल्प के रूप में ऐसे बच्चों को केंद्र या राज्य सरकार की योजनाओं के तहत स्नातक/व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के शिक्षण शुल्क/पाठ्यक्रम शुल्क के बराबर की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। जो बच्चे मौजूदा छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत पात्र नहीं हैं, उनके लिए पीएम केयर्स एक समकक्ष छात्रवृत्ति प्रदान करेगा।

यही नहीं, ऐसे सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना (पीएम-जेएवाई) के तहत लाभार्थी के रूप में नामांकित किया जाएगा, जिसमें 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर होगा। 18 वर्ष की आयु तक के इन बच्चों के लिए प्रीमियम की राशि का भुगतान पीएम केयर्स द्वारा किया जाएगा। (आईएएनएस-SM)

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न्यूज़ग्राम डेस्क
संवाददाता, न्यूज़ग्राम हिन्दी

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