Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
संस्कृति

गोरक्षपीठ की शोभा यात्रा : सांस्कृतिक एकता का प्रतीक

गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा में मुस्लिम समाज द्वारा शोभायात्रा की अगुवाई कर रहे गोरक्षपीठाधीश्वर का आत्मीय अभिनंदन किया जाता है।

गोरखनाथ मंदिर [Wikimedia Commons]

By: विवेक त्रिपाठी

गोरक्षपीठ सिर्फ उपासना का स्थल नहीं है, बल्कि जाति, पंथ मजहब के विभेद से परे ऐसा बड़ा केन्द्र हैं, जहां सांस्कृतिक एकता की नजीर देखने को मिलती है। बात चाहे पीठ के आंतरिक प्रबंधन की हो, या फिर जन सरोकारों की। यहां कभी भी जाति या धर्म की दीवार आड़े नहीं आती है।

पीठ की सामाजिक समरसता की एक जीवंत तस्वीर प्रतिवर्ष विजयादशमी के दिन पूरी दुनिया के सामने होती है। इस गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा में मुस्लिम समाज द्वारा शोभायात्रा की अगुवाई कर रहे गोरक्षपीठाधीश्वर का आत्मीय अभिनंदन किया जाता है।

योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के साथ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर भी हैं। इसकी तीन पीढ़ियों ने लगातार समाज को जोड़ने और जाति, धर्म से परे असहाय को संरक्षण देने का काम किया है। योगी आदित्यनाथ के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के बारे में कभी वीर सावरकर ने कहा था कि यदि महंत दिग्विजयनाथ जी की तरह अन्य धमार्चार्य भी देश, जाति व धर्म की सेवा में लग जाएं तो भारत पुन: जगद्गुरू के पद पर प्रतिष्ठित हो सकता है। अपने समय में दिग्विजयनाथ उन सभी रूढ़ियों के विरोधी थे, जो धर्म के नाम पर समाज को तोड़ने का कार्य कर रही थीं। रही बात योगीजी के गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की तो उनकी तो पूरी उम्र ही समाज को जोड़ने में गुजर गई। सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने लगातार सहभोज के आयोजन किए। उनके शिष्य और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपने गुरु की ही परंपरा का अनुसरण करते हैं। न जाने कितनी बार सार्वजनिक रूप से उन्होंने कहा कि वे किसी जाति, पंथ या मजहब के विरोधी नहीं हैं। बल्कि उनका विरोध उन लोगों से है जो राष्ट्र के विरोधी हैं।


कई दशकों से मंदिर को कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार गिरीश पांडेय बताते हैं कि एक दशक पहले बात है। योगी तब गोरखपुर के सांसद थे और पीठ के उत्तराधिकारी। गोरखपुर के सबसे व्यस्ततम बाजार गोलघर में बदमाशों ने इस्माईल टेलर्स की दुकान पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर पूरे शहर को दहला दिया था। योगी उस समय किसी कार्यक्रम में थे, जैसे ही उन्हें सूचना मिली वह गोलघर पहुंच गए और खराब कानून व्यवस्था को लेकर अपने समर्थकों के साथ धरने पर बैठ गए। लोगों को हैरानी हो रही थी कि हिन्दुत्व का इतना बड़ा ध्वजवाहक एक मुस्लिम व्यापारी के समर्थन में सड़क पर कैसे बैठ सकता है। कुछ लोगों ने योगी से पूछा भी, जिस पर योगी ने कहा कि व्यापारी मेरे लिए सिर्फ व्यापारी है और मैं गोरखपुर को 1980 के उस बदनाम दौर की ओर हरगिज नहीं जाने दूंगा।

\u0917\u094b\u0930\u0916\u0928\u093e\u0925 \u092e\u0902\u0926\u093f\u0930 , \u0917\u094b\u0930\u0915\u094d\u0937\u092a\u0940\u0920 गोरक्षपीठ की शोभा यात्रा [wikimedia commons]


उन्होंने बताया कि फरवरी 2014 के आम चुनाव में गोरखपुर में नरेंद्र मोदी की रैली होनी थी। फर्टिलाइजर का मैदान इस बड़ी रैली के अनुकूल था और सुरक्षित भी। योगी के प्रयास के बावजूद राजनीतिक वजहों से रैली के लिए वह मैदान नहीं मिल सका। उसी से सटे मानबेला में गोरखपुर विकास प्राधिकरण ने किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया था। समय कम था और सामने दो बड़ी चुनौतियां। पहली उस जमीन के आसपास के गांव अल्पसंख्यक बहुल आबादी के थे, दूसरा उस जमीन को रैली के लिए तैयार करना था। गांव वालों को जब योगी के इस संशय के बारे में पता चला तो वह खुद उनसे मिलने आए। भरोसा दिलाया कि वह रैली की सफलता में न केवल हर संभव मदद करेंगे बल्कि बढ़-चढ़कर भाग भी लेंगे। यही हुआ भी और यह घटना उस समय अखबारों की सुर्खियां बनी।

ह भी पढ़ें : नवरात्रि के विषय में नौ ऐसी बातें जिन्हे आपके लिए जानना है महत्वपूर्ण

मकर संक्रांति से शुरू होकर माह भर चलने वाले खिचड़ी मेले में तमाम दुकानें अल्पसंख्यकों की ही होती हैं। गोरखनाथ मंदिर से जुड़े प्रकल्पों में भी जाति, पंथ और मजहब का कोई भेदभाव नहीं है। हिंदू धर्म की सभी जातियों के साथ ही अल्पसंख्यक समुदाय के लोग भी अहम भूमिका में हैं। गोरखनाथ मंदिर में निर्माण और सम्पत्ति की देखरेख करने वाले दो जिम्मेदार अल्पसंख्यक समुदाय के ही हैं। (आईएएनएस, MS)

न्यूज़ग्राम के साथ Facebook, Twitter और Instagram पर भी जुड़ें!

Popular

महिला बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी (Wikimedia Commons)

जैसा कि राष्ट्र ने 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस(National Girl Child Day) मनाया, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री(Union Minister of Women and Child Development) श्रीमती स्मृति जुबिन ईरानी(Smriti Zubin Irani) ने देशवासियों से देश की बेटियों की सराहना करने और उनकी उपलब्धियों का जश्न मनाकर उन्हें प्रोत्साहित करने और एक समावेशी निर्माण के लिए लिंग विभाजन को पाटने और समान समाज का संकल्प लेने का आह्वान किया।

"शिक्षित करें, प्रोत्साहित करें, सशक्त करें! आज का दिन हमारी लड़कियों को समान अवसर प्रदान करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता को नवीनीकृत करने का दिन है। राष्ट्रीय बालिका दिवस पर, जैसा कि हम अपनी बेटियों की उपलब्धियों का जश्न मनाते हैं, हम एक समावेशी और समान समाज के निर्माण के लिए लिंग भेद को पाटने का संकल्प लेते हैं”, ईरानी ने अपने ट्वीट संदेश में कहा।

Keep Reading Show less

नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

गणतंत्र दिवस समारोह(Republic Day Celebration) हमेशा संस्कृति का पर्याय होते हैं, क्योंकि इस दिन विभिन्न राज्यों की झांकियों को नई दिल्ली में राजपथ पर परेड के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। दर्शकों का स्वागत रंग-बिरंगे छींटों और देश की विविधता के प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व के साथ किया जाता है।

इस वर्ष, भारतीय गणराज्य के 73वें वर्ष के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(Narendra Modi) को दो अलग-अलग कपड़ों में देखा गया - जो देश के दो अलग-अलग राज्यों से संबंधित हैं - जिनका पारंपरिक महत्व है।

Keep Reading Show less

डॉ. मुनीश रायजादा ने इस वेब सीरीज़ के माध्यम से आम आदमी पार्टी में हुए भ्रस्टाचार को सामने लाने का प्रयास किया है।

पंजाब(Punjab) में जहां एक तरफ आगामी चुनाव में आम आदमी पार्टी(Aam Aadmi Party) एक बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है, तो वहीं दूसरी ओर इसी पार्टी के एक पूर्व सदस्य ने एक वेब सीरीज के ज़रिये इस पार्टी के भीतर छिपे काले सच को बाहर लाने की कोशिश की है। वेब सीरीज का नाम है ट्रांसपेरेंसी : पारदर्शिता(Transparency : Paardarshita) है, जोकि डॉ मुनीष रायजादा(Dr Munish Raizada द्वारा निर्देशित और निर्मित है। डॉ रायजादा शिकागो में एक डॉक्टर के तौर पर कार्यरत हैं और कुछ समय पहले तक आम आदमी पार्टी के लिए काम भी करते थे, पर जैसे ही उन्होंने यह देखा की आम आदमी पार्टी अपने मूल सिद्धांतो से भटक रही है तो उन्होंने इसके खिलाफ अपनी आवाज़ उठाई।

मीडिया एजेंसी IANS से फ़ोन पर बातचीत करते हुए डॉ रायजादा ने बताया, "पारदर्शिता एक राजनीतिक वेब सीरीज है, इसलिए हमने पहले इसके ज़्यादा प्रचार और प्रसार के बारे में नहीं सोचा, परंतु जब बात आई इसे समाज के हर तबके तक पहुंचाने की तो फिर हमें यूट्यूब का ख्याल आया।" पारदर्शिता वेब सीरीज का पहला एपिसोड 17 जनवरी को यूट्यूब पर रिलीज़ किया गया था।

Keep reading... Show less