Never miss a story

Get subscribed to our newsletter


×
व्यवसाय

घर से काम करने के नियमों में सरकार ने किए सुधार

अब कंपनियों को पुनः अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास पर फिर से ध्यान देने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि लाखों कर्मचारी फिलहाल अपने घर से ही काम कर रहे हैं।

कंपनियां अब वर्क फ्रॉम होम में उत्पन्न हुई नई समस्याओं का हल ढूंढने में लगी हैं। (Unsplash)

मार्च के महीने में लगे लॉकडाउन के बाद घर से काम करने का चलन काफी बढ़ गया है। इसके लिए सरकार ने आईटी/आईटीईएस/बीपीओ सेक्टर के कर्मचारियों के लिए लिए वर्क फ्रॉम होम (डब्ल्यूएफएच) और वर्क फ्रॉम एनीवेयर (डब्ल्यूएफए) की सुविधा देने के नियमों में सुधार किया है। इन सुधारों के बाद कंपनियों को इसे ‘नया सामान्य’ बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनानी पड़ेगी। इसके लिए कंपनियों को अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण और कौशल विकास पर फिर से ध्यान देने की जरूरत पड़ेगी, क्योंकि लाखों कर्मचारी फिलहाल अपने घर से काम कर रहे हैं।

ये महामारी इस सदी की सबसे बड़ी रुकावट है और सरकार का यह कदम आईटी और बीपीओ उद्योग के लिए एक गेमचेंजर हो सकता है। ये भारत को वैश्विक आउटसोर्सिग हब के रूप में अग्रणी बना सकता है और छोटे शहरों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।


ये कंपनियों को कहीं से भी टैलेंट को कम लागत में आकर्षित करने का अवसर देता है। इससे नए मानव संसाधन, विपणन, बिक्री और कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी।

यह भी पढ़ें – अजीम प्रेमजी, भारत के सबसे परोपकारी इंसान

साइएंट के अध्यक्ष और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) कार्तिकेयन नटराजन, जो एक प्रमुख इंजीनियरिंग और डिजिटल समाधान कंपनी है, ने सरकार के कदम की सराहना करते हुए कहा कि, “इस दिशानिर्देश से न सिर्फ वर्कफोर्स को मैनेज करने में मदद मिलेगी, बल्कि टियर-2 और 3 शहरों में रोजगार का सृजन भी होगा। खासकर ऐसे समय में, जब महामारी अगले दो सालों के लिए कहीं नहीं जा रही।”

स्टार्टअप कंपनियां ऑनलाइन व्यवसाय का कुशलतापूर्वक संचालन करने के लिए वर्कफोर्स को प्रशिक्षण देने को लेकर आशावादी हैं।

मार्च से लगे लॉकडाउन में घर से काम करने के नियमों को काफी आसान किया गया है। (Unsplash)

एमवाईजेन की सह-संस्थापक शम्मी पंत, जो आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) आधारित कोचिंग देती हैं, दफ्तरों के क्रियाकलाप को सु²ढ़ करने और पूरी तरह से बदलने के जबरदस्त अवसर के तौर पर इसे देख रही हैं।

उनके अनुसार, कर्मचारियों के साथ प्रभावी संचार व्यवस्था इस मॉडल को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। लर्निग एंड डेवलपमेंट (एलएंडडी) टीम की भूमिका सही लर्निग सॉल्यूशन्स देने में काफी महत्वपूर्ण होगी। ये टीमें उच्च तकनीक वाले डिजिटल और एआई सीखने वाले टूल पेश कर सही लर्निग सॉल्यूशंस देंगी।

दूसरी ओर, कंपनियां भी सक्रिय रूप से इन मुद्दों पर विचार कर रही हैं, जो अब वर्क फ्रॉम होम के 6 महीने से अधिक समय में उत्पन्न हुई नई समस्याओं का हल ढूंढने में लगी हैं।

यह भी पढ़ें – मंजूर अली कैसे बने कश्मीर के ‘मंजूर पेंसिल’

बारको इंडिया के प्रबंध निदेशक राजीव भल्ला के अनुसार, “जब हम कोविड-19 के आर्थिक प्रभाव का आकलन करते हैं, तो कर्मचारियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वे आगामी चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने आप को ज्यादा से ज्यादा प्रशिक्षित करें।”

सरकार द्वारा इस नीति की घोषणा डिजिटल दुनिया में बदलते परिदृश्य के मद्देनजर है। मार्च में लॉकडाउन शुरू होने के समय से ही घर से काम करने के नियमों को आसान किया गया है।

उदाहरण के लिए, अप्रैल में दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने घर से काम करने के समझौते के लिए सुरक्षा राशि जमा करने की आवश्यकता को खत्म कर दिया। 5 नवंबर को डीओटी ने बीपीओ और आईटीईएस कंपनियों के अन्य सेवा प्रदाताओं (ओएसपी) और कर्मचारियों के लिए भारत में स्थायी डब्ल्यूएफएच या डब्ल्यूएफए की अनुमति देने के लिए दिशा-निर्देशों को पूरी तरह से बदल दिया। (आईएएनएस)

Popular

अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Wikimedia Commons)

बॉलीवुड (Bollywood) के जाने माने अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी (Nawazuddin Siddiqui) अपने दमदार अभिनय के अलावा अक्सर पुरस्कारों और सम्मानों के साथ वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने को लेकर भी सुर्ख़ियों में रहते हैं। उन्हें मिलने वाले सम्मान उनका आत्मविश्वास बढ़ाते हैं। उसी के बारे में बात करते हुए, अभिनेता ने कहा, "मैं अपनी पहचान या पुरस्कारों पर नजर नहीं रखता, लेकिन यह निश्चित रूप से मुझे प्रेरित करते हैं और उस तरह की फिल्मों या पात्रों को चुनने में मदद करते है जिन्हें मैं करना चाहता हूं। पुरस्कार मुझे अपना काम चुनने में आत्मविश्वास देते हैं।"

नवाज ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय एमी पुरस्कारों (International Emmy Awards) की अपनी यात्रा के साथ सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि उन्हें सुधीर मिश्रा निर्देशित 'सीरियस मेन' में उनके काम के लिए एक अभिनेता श्रेणी द्वारा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में नामांकित किया गया था। हालांकि, अभिनेता डेविड टेनेंट से हार गए, जो ड्रामा मिनिसरीज 'देस' में अपने प्रदर्शन के लिए ट्रॉफी लेकर चले गए।

पहले भी अभिनेता (Nawazuddin Siddiqui) ने कई अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त की है, क्योंकि वह दुनिया के एकमात्र ऐसे अभिनेता हैं जिनके पास कान्स फिल्म समारोह में आधिकारिक तौर पर चयनित और प्रदर्शित 8 फिल्में हैं।

उनकी फिल्म 'पतंग: द काइट' का प्रीमियर 2012 में बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और ट्रिबेका फिल्म फेस्टिवल में हुआ था।

Keep Reading Show less

टोयोटा (Wikimedia Commons)

टोयोटा(Toyota) मोटर कॉर्प ने घोषणा की है कि वह अमेरिका में अपनी कुछ इलेक्ट्रिक वाहन(Electric Vehicles) आपूर्ति श्रृंखला लाने के प्रयास में उत्तरी कैरोलिना में एक नई 1.29 बिलियन डॉलर की लागत से बैटरी फैक्ट्री(Battery Factory) का निर्माण कर रही है।

एक समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, टोयोटा ने घोषणा की है कि वह अगले दशक में बैटरी तकनीक में करीब 13.6 अरब डॉलर का निवेश करेगी, उत्पादन में 9 अरब डॉलर का निवेश शामिल है। क्योंकि यह अपने वाहन लाइनअप को विद्युतीकृत करने का प्रयास करता है।

नया संयंत्र शुरू में सालाना 8 लाख वाहनों के लिए लिथियम-आयन बैटरी की आपूर्ति करने में सक्षम होगा। पहले वर्ष में, फर्म इलेक्ट्रिक वाहनों के आगामी लाइनअप के लिए 1.2 मिलियन बैटरी पैक का उत्पादन करने की योजना बना रही है।

उत्तरी अमेरिका में टोयोटा मोटर के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी क्रिस रेनॉल्ड्स की रिपोर्ट के हवाले से कहा गया है, "यह निवेश, जो मुझे लगता है कि उत्तरी कैरोलिना के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा निजी पूंजी निवेश है.. कम से कम 1,750 नई नौकरियां पैदा करेगा और हमें ऑटोमोटिव बैटरी उत्पादन को विकसित करने और स्थानीय बनाने में मदद करेगा जो यहां निर्मित बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका में मार्ग प्रशस्त करेगा।"

Keep Reading Show less

जेएनयू के कॉमरेड को अब बाबरी मस्जिद चाहिए (Image: Wikimedia Commons)

अपने हिंदू विरोधी कर्तव्य के लिए प्रसिद्ध साम्यवादी(communist) विचारधारा से ग्रसित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ(JNUSU) एक बार फिर से सुर्खियों में है। अबकी बार वह जिस वजह से सुर्खियों में है वह है बाबरी मस्जिद(Babri Masjid)। दरअसल, जेएनयूएसयू ने अयोध्या(ayodhya) में ध्वस्त बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर कैंपस के अंदर एक विरोध मार्च निकाला। विरोध मार्च चंद्रभागा छात्रावास में समाप्त हुआ, जहां छात्र नेताओं ने जमकर नारेबाजी और भाषण बाजी करी।

इसके अलावा एक जगह पर तख्तियां लिए हुए, नारेबाजी करते हुए जमा हो गए और बाद में उन्होंने परिसर के अंदर मार्च निकाला। छात्र नेताओं ने मस्जिद(Babri Masjid) के पुनर्निर्माण की मांग को लेकर भाषण भी दिया। जेएनयूएसयू(Janusu) के उपाध्यक्ष साकेत मून(Saket Moon) ने कहा कि बाबरी मस्जिद के पुनर्निर्माण से न्याय मिलेगा। उपाध्यक्ष जी न्याय दिलवाने की बात करके मस्जिद के निर्माण की बात कर रहे हैं, लेकिन शायद वह भूल गए कि राम मंदिर(Ram Mandir) आज सुप्रीम कोर्ट (supreme Court) द्वारा किए गए न्याय पर मिल रहा है।

Keep reading... Show less