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अमेरिकी विदेशी विभाग की वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर  ( Jammu and Kashmir ) में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए धीरे-धीरे कुछ सुरक्षा और संचार प्रतिबंधों को हटाते हुए कदम उठाना जारी रखा है।

इस रिपोर्ट को मंगलवार को वाशिंगटन में विदेश मंत्री एंटनी ब्लिन्केन ने जारी किया। इस रिपोर्ट में हिरासत में लिए गए राजनीतिक कार्यकर्ताओं की रिहाई, इंटरनेट सेवा की बहाली और स्थानीय चुनावों के आयोजन का उल्लेख किया गया है। स्थानीय चुनावों में विपक्षी गठबंधन ने अधिकांश सीटों पर जीत दर्ज की।


रिपोर्ट में आतंकवादियों द्वारा सरकारी अधिकारियों और नागरिकों की हत्या और यातना पर भी ध्यान आकर्षित किया गया है। साथ ही सुरक्षा बलों द्वारा मानवाधिकारों के हनन का भी उल्लेख किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “अलगाववादियों ने जघन्य अपराध किए हैं। इसमें सशस्त्र बलों के जवानों, पुलिस, सरकारी अधिकारियों और नागरिकों की हत्या शामिल है। साथ ही इसमें बाल ‘सैनिकों’ की भर्ती और उनका दुरुपयोग सहित कई गंभीर अपराधों का जिक्र है।”

“2020 कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स ( Human rights ) प्रैक्टिसेज” शीर्षक वाली इस रिपोर्ट में पूरे भारत में मानवाधिकारों की स्थिति पर व्यापक रोशनी डाली गई है। इसका एक हिस्सा कश्मीर को समर्पित किया गया है। यह रिपोर्ट सरकारी रिपोर्ट एवं बयान, न्यूज स्टोरीज और कई एनजीओ की रिपोर्ट सरीखे सूत्रों पर आधारित है।

विदेश विभाग की रिपोर्ट में संयुक्त राष्ट्र के स्पेशल रिपोर्टरों के हवाले से कहा गया है कि अगस्त, 2019 में जब कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस ले लिया गया था तो “जम्मू और कश्मीर में मानवाधिकार की स्थिति में गिरावट देखी गई और वे इस बात को लेकर विशेष रूप से चिंतित थे कि कोविड-19 महामारी के दौरान कई प्रदर्शनकारी अभी भी हिरासत में हैं और इंटरनेट प्रतिबंध लागू हैं।”
 

रिपोर्ट में पूरे भारत में मानवाधिकारों की स्थिति पर व्यापक रोशनी डाली गई है।  ( Unsplash ) 

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लेकिन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, “सरकार ने ज्यादातर राजनीतिक कार्यकर्ताओं को नजरबंदी से रिहा कर दिया। जनवरी में सरकार ने इंटरनेट सेवा को आंशिक रूप से बहाल कर दिया; हालांकि हाई स्पीड ( High speed )  वाले 4जी मोबाइल इंटरनेट ( internet )  जम्मू और कश्मीर के अधिकांश हिस्सों में प्रतिबंधित रहा।”

विदेश विभाग ने कहा कि जम्मू ऐंड कश्मीर कोअलीशन ऑफ सिविल सोसायटी (जेकेसीसीएस) के अनुसार, 2019 में 662 व्यक्तियों को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 412 अगस्त तक नजरबंद रहे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने अधिकांश राजनीतिक कार्यकर्ताओं को हिरासत से रिहा कर दिया और 15 सितंबर को गृह मंत्रालय ने कहा कि केवल 223 कश्मीरी राजनीतिक नेता जिन्हें अगस्त 2019 के बाद हिरासत में लिया गया था, हिरासत में रहे। लेकिन, “कोई भी व्यक्ति नजरबंद नहीं है।”

रिपोर्ट में कश्मीरी पंडितों की दुर्दशा पर भी ध्यान दिया गया और इसमें कहा गया है कि उनमें से हजारों लोगों ने संघर्ष और हिंसक धमकी के कारण 1990 के बाद कश्मीर घाटी को छोड़ दिया। इसकी वजह यह रही कि कश्मीरी अलगाववादियों ने कश्मीरी पंडितों के घरों एवं मंदिरों को नष्ट कर दिया, व्यापक स्तर पर यौन शोषण किया गया और उनकी संपत्तियों की लूटपाट की गई। ( AK आईएएनएस ) 
 

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने तारीफ की (wikimedia commons )

हमारा देश भारत अनेकता में एकता वाला देश है । हमारे यंहा कई धर्म जाती के लोग एक साथ रहते है , जो इसे दुनिया में सबसे अलग श्रेणी में ला कर खड़ा करता है । योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं । उन्होंने एक बयान में कहा कि नई थ्योरी में पता चला है कि पूरे देश का डीएनए एक है। यहां आर्य-द्रविण का विवाद झूठा और बेबुनियाद रहा है। भारत का डीएनए एक है इसलिए भारत एक है। साथ ही उन्होंने कहा की दुनिया की तमाम जातियां अपने मूल में ही धीरे धीरे समाप्त होती जा रही हैं , जबकि हमारे भारत देश में फलफूल रही हैं। भारत ने ही पूरी दुनिया को वसुधैव कुटुंबकम का भाव दिया है इसलिए हमारा देश श्रेष्ठ है। आप को बता दे कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की व राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित एक श्रद्धांजलि समारोह का शुरुआत करने गये थे। आयोजन के पहले दिन मुख्यमंत्री ने कहा कि कोई भी ऐसा भारतीय नहीं होगा जिसे अपने पवित्र ग्रन्थों वेद, पुराण, उपनिषद, रामायण, महाभारत आदि की जानकारी न हो। हर भारतीय परम्परागत रूप से इन कथाओं ,कहनियोंको सुनते हुए, समझते हए और उनसे प्रेरित होते हुए आगे बढ़ता है।

साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे यंहा के कोई भी वेद पुराण हो या ग्रंथ हो इनमे कही भी नहीं कहा गया की हम बहार से आये थे । हमारे ऐतिहासिक ग्रन्थों में जो आर्य शब्द है वह श्रेष्ठ के लिए और अनार्य शब्द का प्रयोग दुराचारी के लिए कहा गया है। मुख्यमंत्री योगी ने रामायण का उदाहरण भी दिया योगी ने कहा कि रामायण में माता सीता ने प्रभु श्रीराम की आर्यपुत्र कहकर संबोधित किया है। लेकिन , कुटिल अंग्रेजों ने और कई वामपंथी इतिहासकारों के माध्यम से हमारे इतिहास की किताबो में यह लिखवाया गया कि आर्य बाहर से आए थे । ऐसे ज्ञान से नागरिकों को सच केसे मालूम चलेगा और ईसका परिणाम देश लंबे समय से भुगतता रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में बात करते हुए योगी ने कहा कि , आज इसी वजह से मोदी जी को एक भारत-श्रेष्ठ भारत का आह्वान करना पड़ा। आज मोदी जी के विरोध के पीछे एक ही बात है। साथ ही वो विपक्ष पर जम के बरसे। उन्होंने मोदी जी के बारे में आगे कहा कि उनके नेतृत्व में अयोध्या में पांच सौ वर्ष पुराने विवाद का समाधान हुआ है। यह विवाद खत्म होने से जिनके खाने-कमाने का जरिया बंद हो गया है तो उन्हें अच्छा कैसे लगेगा।

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अल्जाइमर रोग एक मानसिक विकार है। (unsplash)

ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एक अभूतपूर्व अध्ययन में 'ब्लड-टू-ब्रेन पाथवे' की पहचान की है जो अल्जाइमर रोग का कारण बन सकता है। कर्टिन विश्वविद्यालय जो कि ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर में है, वहाँ माउस मॉडल पर परीक्षण किया गया था, इससे पता चला कि अल्जाइमर रोग का एक संभावित कारण विषाक्त प्रोटीन को ले जाने वाले वसा वाले कणों के रक्त से मस्तिष्क में रिसाव था।

कर्टिन हेल्थ इनोवेशन रिसर्च इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रमुख जांचकर्ता प्रोफेसर जॉन मामो ने कहा "जबकि हम पहले जानते थे कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों की पहचान विशेषता बीटा-एमिलॉयड नामक मस्तिष्क के भीतर जहरीले प्रोटीन जमा का प्रगतिशील संचय था, शोधकर्ताओं को यह नहीं पता था कि एमिलॉयड कहां से उत्पन्न हुआ, या यह मस्तिष्क में क्यों जमा हुआ," शोध से पता चलता है कि अल्जाइमर रोग से पीड़ित लोगों के दिमाग में जहरीले प्रोटीन बनते हैं, जो रक्त में वसा ले जाने वाले कणों से मस्तिष्क में रिसाव की संभावना रखते हैं। इसे लिपोप्रोटीन कहा जाता है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Wikimedia Commons)

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन को संम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चरमपंथ और कट्टरपंथ की चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए एससीओ द्वारा एक खाका विकसित करने का आह्वान किया। 21वीं बैठक को संम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मध्य एशिया में अमन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है विश्वास की कमी।

इसके अलावा, पीएम मोदी ने विश्व के नेताओं से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि मानवीय सहायता अफगानिस्तान तक निर्बाध रूप से पहुंचे। मोदी ने कहा, "अगर हम इतिहास में पीछे मुड़कर देखें, तो हम पाएंगे कि मध्य एशिया उदारवादी, प्रगतिशील संस्कृतियों और मूल्यों का केंद्र रहा है।
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